मुरादाबाद: लाल मस्जिद में मजलिस उलमा ए हिंद ने फिलिस्तीन और गाजा के लिए दुआ महफिल का हुआ आयोजन

रिपोर्ट – शाहरुख़ हुसैन
मुरादाबाद: ऐतिहासिक लाल मस्जिद में आज एक शांतिपूर्ण और भावनात्मक दुआ महफिल का आयोजन किया गया। इस महफिल का आयोजन मजलिस उलमा ए हिंद द्वारा किया गया, जिसमें विश्व भर में चल रहे हालात और विशेष रूप से फिलिस्तीन व गाजा में जुल्म और संघर्ष के शिकार लोगों के लिए दुआ की गई।

महफिल में उपस्थित लोगों ने नम आंखों से बारीगाह-ए-इलाही में अपने हाथ उठाकर बेगुनाह लोगों, बच्चों और शहीदों की मगफिरत की गुहार लगाई। शहर के प्रमुख धार्मिक विद्वानों ने इस मौके पर कहा कि इस्लाम हमेशा शांति और इंसानियत का संदेश देता है और आज की यह महफिल उसी पैगाम का प्रतीक है।
विश्व भर में हालात पर जताई गई चिंता
मजलिस उलमा ए हिंद के प्रवक्ताओं ने महफिल में उपस्थित लोगों को विश्वभर में उत्पन्न होने वाले संघर्षों की जानकारी दी। विशेष रूप से फिलिस्तीन और गाजा में बढ़ते संघर्ष, नागरिकों पर हो रहे हमले और बच्चों की जानों की हानि पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में एकजुट होकर दुआ करना और शांति के लिए प्रयास करना बेहद आवश्यक है।
दुआ महफिल का उद्देश्य
इस महफिल का मुख्य उद्देश्य केवल दुआ करना ही नहीं था, बल्कि उन लोगों के प्रति एकजुटता और संवेदनशीलता दिखाना भी था जो युद्ध और संघर्ष के बीच जिंदगियों की लड़ाई लड़ रहे हैं। शहर मुफ्ती मन्नान कलीमी ने कहा, “हमारी यह दुआ महफिल एक संदेश है कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है। हम सबको शांति और भाईचारे के लिए प्रयासरत रहना चाहिए।”

महफिल के दौरान उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से बेगुनाहों और शहीदों के लिए हाथ उठाए। उलेमाओं ने कहा कि ईरान की मजबूती और जीत के लिए भी खास तौर पर दुआ की गई, ताकि वैश्विक संघर्षों में इंसानियत और न्याय की जीत हो।
महफिल की व्यवस्थाएं और शांतिपूर्ण माहौल
महफिल का आयोजन बेहद व्यवस्थित और शांतिपूर्ण तरीके से किया गया। कार्यक्रम में आने वाले हर व्यक्ति के लिए सामाजिक दूरी और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया। आयोजकों ने कहा कि यह महफिल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानवता के प्रति संवेदनशीलता और सहानुभूति का प्रतीक भी है।

महफिल के बाद सभी उपस्थित लोग अत्यंत शांतिपूर्ण ढंग से मस्जिद से विदा हुए। इस दौरान यह स्पष्ट हुआ कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य भय या अशांति पैदा करना नहीं, बल्कि एकजुटता, सहानुभूति और इंसानियत को प्रोत्साहित करना है।
विशेष संदेश और धार्मिक दृष्टिकोण
मजलिस उलमा ए हिंद के राष्ट्रीय प्रवक्ता मुर्तजा इकबाल ने कहा कि इस्लाम शांति का धर्म है और हर स्थिति में इंसानियत की रक्षा का संदेश देता है। उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा कि केवल दुआ ही नहीं, बल्कि अपने दैनिक जीवन में दूसरों की मदद करना और संघर्षग्रस्त लोगों के लिए सहयोग करना भी आवश्यक है।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस तरह की महफिलें लोगों में सामाजिक चेतना और संवेदनशीलता पैदा करती हैं। इसके साथ ही यह संदेश देती हैं कि किसी भी देश या क्षेत्र में जुल्म और अन्याय का विरोध करना एक नैतिक जिम्मेदारी है।
आज की मुरादाबाद लाल मस्जिद में आयोजित दुआ महफिल ने यह संदेश दिया कि धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य केवल आध्यात्मिक लाभ ही नहीं, बल्कि सामाजिक और वैश्विक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता फैलाना भी है। उपस्थित लोगों ने अपने हाथ उठाकर, नम आंखों से और दिल की गहराई से दुआ की कि संघर्षग्रस्त क्षेत्र शांति और न्याय की राह पर आगे बढ़ें।

इस तरह के आयोजन मानवता, सहानुभूति और शांति का प्रतीक बनते हैं। मुरादाबाद की यह ऐतिहासिक लाल मस्जिद न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और वैश्विक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने का भी केंद्र बनती जा रही है।



