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मुरादाबाद: आदमखोर बन चुका है तेंदुआ – 5 वर्षीय मासूम को माता-पिता ने बचाया, जरूर पढ़ें इलाके की दहशत

रिपोर्ट – शाहरुख़ हुसैन 

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद में एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। ठाकुरद्वारा कोतवाली क्षेत्र के दलपतपुर गांव में 5 वर्षीय मासूम मोक्ष पर एक आदमखोर तेंदुए ने हमला कर दिया। घटना उस समय हुई जब बच्चा अपने घर के आंगन में खेल रहा था।

जानिए पूरी घटना का विवरण

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, तेंदुआ घात लगाकर बैठा था और अचानक झपट्टा मारकर मोक्ष को गर्दन से पकड़ने की कोशिश करने लगा। यह नजारा देखकर मासूम के माता-पिता की रूह कांप गई, लेकिन उन्होंने तुरंत साहस का परिचय देते हुए बच्चे को बचाने के लिए तेंदुए का सामना किया।

माता-पिता के इस बहादुरीपूर्ण प्रयास से तेंदुआ घायल और दहशत में भाग खड़ा हुआ। हालांकि, इस संघर्ष में मोक्ष गंभीर रूप से घायल हो गया, उसके कान और गर्दन पर गहरे घाव आए हैं।

अस्पताल में चल उपचार

परिजन तुरंत घायल बच्चे को नजदीकी अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे कड़ी निगरानी में रखा है। चिकित्सकों के अनुसार, मोक्ष की हालत स्थिर करने के प्रयास किए जा रहे हैं और हर संभव उपचार जारी है।

डॉक्टरों ने यह भी बताया कि बच्चे को गंभीर चोटों के बावजूद जीवित बचाने में माता-पिता की तुरंत प्रतिक्रिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इलाके में है दहशत का माहौल

घटना के बाद ठाकुरद्वारा और दलपतपुर गांव में लोगों में डर और चिंता की लहर दौड़ गई है। ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुए को पकड़ने और इलाके में पिंजरा लगाने की मांग की है। उनका मानना है कि यदि तेंदुए को जल्दी नहीं पकड़ा गया तो भविष्य में ऐसी घटनाएँ दोबारा हो सकती हैं।

यह है वन विभाग की भूमिका

वन विभाग ने बताया कि वह इलाके में गश्त बढ़ा रहा है और तेंदुए के संभावित ठिकानों पर निगरानी रखी जा रही है। इसके अलावा, टीम द्वारा पिंजरे और अन्य उपकरणों की व्यवस्था की जा रही है ताकि तेंदुए को सुरक्षित तरीके से पकड़ा जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि तेंदुए और मानव आबादी के बीच बढ़ते संपर्क के कारण ऐसे हमले होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए आवश्यक है कि वन्य जीवों के आवास और मानव बसावट के बीच संतुलन बनाए रखा जाए।

पढ़िए क्या हैं बच्चों और ग्रामीणों के लिए सुरक्षा उपाय

इस घटना के बाद बच्चों और ग्रामीणों को चेतावनी दी गई है कि वे जंगल के निकट अकेले न जाएँ। इसके अलावा, स्कूल और पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाने की संभावना है ताकि बच्चे और ग्रामीण तेंदुए जैसी स्थिति में सुरक्षित रह सकें।

इसके अलावा, ग्रामीणों को यह सलाह दी जा रही है कि रात में अकेले बाहर न निकलें और यदि जंगल के निकट कोई तेंदुआ दिखाई दे तो तुरंत स्थानीय अधिकारियों को सूचित करें।

माता-पिता की बहादुरी की हो रही सराहना

स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने मोक्ष के माता-पिता की बहादुरी की खुलकर सराहना की है। उनका कहना है कि यदि माता-पिता ने समय रहते साहसिक कदम नहीं उठाया होता, तो परिणाम बेहद गंभीर हो सकते थे। लोगों के अनुसार, माता-पिता की तुरंत प्रतिक्रिया ने बच्चे को गंभीर खतरे से बचाया। यह घटना माता-पिता की सतर्कता और साहस का एक उदाहरण है।

वन विभाग की होनी चाहिए अहम् भूमिका 

मुरादाबाद की यह घटना मानव और वन्य जीवों के बीच बढ़ते संघर्ष की ओर ध्यान आकर्षित करती है। तेंदुए के हमले से बच्चे की चोट और इलाके में फैलती दहशत यह स्पष्ट करती है कि वन्य जीवों और मानव आबादी के बीच संतुलन बनाए रखना कितना आवश्यक है।

इस घटना के माध्यम से यह भी स्पष्ट हो गया कि माता-पिता की सतर्कता और साहस किसी भी आपदा में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा उठाए जा रहे कदम भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने में सहायक होंगे।

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