
रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा
नई दिल्ली: अमेरिकी डेटा एनालिटिक्स कंपनी Morning Consult द्वारा किए गए हालिया वैश्विक सर्वे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेताओं की सूची में पहले स्थान पर अपनी मजबूती दिखाई है। सर्वे के अनुसार, पीएम मोदी को 68 प्रतिशत समर्थन प्राप्त हुआ, जबकि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को केवल 39 प्रतिशत लोगों ने पसंद किया।

इस अंतरराष्ट्रीय सर्वे में कुल 10 वैश्विक नेताओं की लोकप्रियता को मापा गया। दूसरे स्थान पर अलैन बेरसेट 62 प्रतिशत समर्थन के साथ रहे, वहीं तीसरे स्थान पर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक योल भी 62 प्रतिशत समर्थन के साथ शामिल हुए। यह स्पष्ट करता है कि एशिया के नेताओं को वैश्विक स्तर पर लगातार सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।
जानिए किसको मिला कौन का स्थान
चौथे स्थान पर चेक गणराज्य के प्रधानमंत्री पेत्र फियाला को 57 प्रतिशत समर्थन मिला, जबकि पांचवें और छठे स्थान पर क्रमशः स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति जेवियर माइली और जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा 55 प्रतिशत समर्थन के साथ रहे।
सातवें स्थान पर ब्रिटेन के मार्क कार्नी को 52 प्रतिशत समर्थन मिला, आठवें स्थान पर मेक्सिको की क्लाउडिया शीनबाम को 43 प्रतिशत, नौवें स्थान पर बेल्जियम के बार्ट डी वेवर को 42 प्रतिशत और दसवें स्थान पर ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा को 42 प्रतिशत समर्थन प्राप्त हुआ।
विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बार केवल 39 प्रतिशत समर्थन के साथ सूची में शामिल हुए। इसके पीछे कई कारकों को विशेषज्ञ जोड़ते हैं, जिनमें उनकी पिछली नीतियां, अंतरराष्ट्रीय छवि और वर्तमान वैश्विक परिस्थितियाँ शामिल हैं।
सक्रिय भूमिका की वजह से पीएम हुए लोकप्रिय
सर्वेक्षण के परिणाम यह भी दिखाते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता का कारण उनकी दूरदर्शी नीतियां और वैश्विक नेतृत्व में सक्रिय भूमिका है। इसके अलावा, भारत के विभिन्न सामाजिक और आर्थिक सुधारों को दुनिया भर में सकारात्मक दृष्टि से देखा जा रहा है।

इसके विपरीत, कुछ अन्य वैश्विक नेताओं को कम समर्थन मिलने का कारण उनके देश की आंतरिक राजनीतिक परिस्थितियाँ और मीडिया में आलोचना को माना गया है। इस बात से यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक नेताओं की लोकप्रियता न केवल उनके व्यक्तिगत व्यक्तित्व पर निर्भर करती है, बल्कि उनके देश की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय भूमिका पर भी आधारित होती है।
वैश्विक सर्वेक्षण में विभिन्न देशों के नागरिकों से पूछे गए थे प्रश्न
Morning Consult के वैश्विक सर्वेक्षण में विभिन्न देशों के नागरिकों से प्रश्न पूछे गए, जिनमें उन्होंने यह मूल्यांकन किया कि कौन सा नेता उनके दृष्टिकोण और नीतियों के मामले में सबसे प्रभावी और भरोसेमंद है। इस सर्वे में भाग लेने वालों की संख्या और उनकी विविधता इसे एक विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय आंकड़ा बनाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के वैश्विक सर्वे न केवल नेताओं की लोकप्रियता को दर्शाते हैं, बल्कि यह यह भी संकेत देते हैं कि वैश्विक राजनीति में जनता की धारणा किस दिशा में विकसित हो रही है। इसके अलावा, इससे देशों के बीच संबंधों और कूटनीतिक रणनीतियों पर भी असर पड़ सकता है।
इस सर्वे के माध्यम से यह भी देखा जा सकता है कि एशियाई नेताओं, विशेष रूप से प्रधानमंत्री मोदी, की वैश्विक स्तर पर छवि लगातार मजबूत हो रही है। इसके विपरीत, पश्चिमी नेताओं को कभी-कभी विवादों और आलोचनाओं के कारण कम समर्थन मिल रहा है।
भारत की स्थिति होगी मजबूत
संक्षेप में, पीएम मोदी सबसे लोकप्रिय नेता बने रहने के बाद वैश्विक राजनीति में भारत की स्थिति मजबूत हुई है। यह न केवल प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत लोकप्रियता को दर्शाता है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि भारत की नीतियां और नेतृत्व वैश्विक दृष्टिकोण में प्रभावशाली मानी जा रही हैं।

वैश्विक सर्वे में इस तरह के परिणाम राजनीतिक विश्लेषकों, मीडिया और जनता के लिए महत्वपूर्ण हैं। इससे यह पता चलता है कि जनता किस प्रकार के नेताओं को प्राथमिकता देती है, कौन से वैश्विक मुद्दे उनकी सोच को प्रभावित करते हैं और कौन से नेता विश्व स्तर पर अपनी छवि को मजबूती से स्थापित कर रहे हैं।
वैश्विक राजनीतिक रुझानों में करेगा मदद
इसके अलावा, यह सर्वे भविष्य के वैश्विक राजनीतिक रुझानों को समझने में भी मदद करेगा। इससे न केवल नेताओं को अपनी नीतियों और जनसंपर्क रणनीतियों को बेहतर बनाने का मार्ग मिलेगा, बल्कि दुनिया भर के नागरिकों के दृष्टिकोण और प्राथमिकताओं का भी मूल्यांकन किया जा सकेगा।
अंततः, पीएम मोदी की लोकप्रियता यह दर्शाती है कि उनकी नीतियों, कार्यशैली और वैश्विक दृष्टिकोण ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावशाली नेता के रूप में स्थापित किया है। वहीं, ट्रंप और कुछ अन्य नेताओं के कम समर्थन का परिणाम उनके वैश्विक छवि और नीतियों का ऐतिहासिक और वर्तमान प्रभाव दर्शाता है।



