जानिए भगवान श्री कृष्ण और ग्रहों के नाते: क्या ग्रहों से कोई डरने की आवश्यकता है?

“न्यूज़ डेस्क”
प्रकृति में मनुष्य के जीवन पर विभिन्न ग्रहों का प्रभाव पड़ता है, लेकिन जब बात भगवान श्री कृष्ण और उनके भक्तों की होती है, तो ये प्रभाव नकारात्मक नहीं होते। श्री कृष्ण के बारे में जितना जानेंगे, उतना ही यह समझ पाएंगे कि उनके साथ सभी ग्रहों के रिश्ते कुछ खास हैं। आइए, समझते हैं कि कैसे भगवान श्री कृष्ण का हमारे जीवन से गहरे संबंध है और ग्रहों का हम पर कोई असर नहीं पड़ता।
भगवान श्री कृष्ण और उनके ग्रहों के नाते
हमारे जीवन में जब कभी ग्रहों का प्रभाव नकारात्मक रूप से महसूस होता है, तो अक्सर हम परेशान हो जाते हैं। लेकिन भगवान श्री कृष्ण के साथ जितने भी ग्रह जुड़े हुए हैं, उनके साथ के रिश्ते यह साबित करते हैं कि एक भक्त को कभी भी ग्रहों से डरने की आवश्यकता नहीं है। इस लेख में हम भगवान श्री कृष्ण और ग्रहों के रिश्तों को विस्तार से जानेंगे, जो हमें इस धारणा को समझने में मदद करेगा कि ग्रहों का प्रभाव भक्तों पर कभी भी बुरा नहीं हो सकता।
यमराज और श्री कृष्ण: रिश्ते का परिपेक्ष्य
भगवान श्री कृष्ण और यमराज के रिश्ते को समझना भी अत्यंत दिलचस्प है। यमराज, जो मृत्यु के देवता माने जाते हैं, यमुना जी के भाई हैं, और यमुना जी भगवान श्री कृष्ण की पटरानी हैं। इस प्रकार यमराज, भगवान श्री कृष्ण के साले हुए। तो क्या यमराज हमारे जीवन में कोई नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं? बिल्कुल नहीं! भगवान श्री कृष्ण के साले होकर यमराज कभी भी भक्तों का अहित नहीं कर सकते।
सूर्य देव और भगवान श्री कृष्ण का रिश्ता
सूर्य देव, भगवान श्री कृष्ण के ससुर माने जाते हैं, क्योंकि यमुनाजी के पिता सूर्य देव ही हैं। यहाँ पर ध्यान देने वाली बात यह है कि सूर्य देव का भगवान श्री कृष्ण से ससुराल का संबंध है। अब जब सूर्य देव ही भगवान श्री कृष्ण के ससुर हैं, तो भला उनका कोई भी नकारात्मक प्रभाव भक्तों पर कैसे हो सकता है?
शनिदेव: भगवान श्री कृष्ण के साले
अब बात करते हैं शनि ग्रह की। शनि, सूर्य देव के पुत्र हैं, और सूर्य देव भगवान श्री कृष्ण के ससुर हैं। इस प्रकार, शनिदेव भी भगवान श्री कृष्ण के साले हुए। और शनि का प्रभाव भी उनके भक्तों पर नकारात्मक नहीं हो सकता, क्योंकि शनि भी भगवान श्री कृष्ण के परिवार का हिस्सा हैं।
पढ़िए चंद्रमा और लक्ष्मी जी के रिश्ते
चंद्रमा और लक्ष्मी जी दोनों समुद्र मंथन से प्रकट हुए थे। लक्ष्मी जी भगवान श्री कृष्ण की पत्नी हैं, और चंद्रमा उनके साले हुए, क्योंकि लक्ष्मी जी और चंद्रमा दोनों के पिता समुद्र हैं। इस प्रकार चंद्रमा और भगवान श्री कृष्ण का रिश्ता भी ससुराल का बनता है, और ऐसे में चंद्रमा भी किसी भी प्रकार से भक्तों को नुकसान नहीं पहुंचा सकते।
बुध ग्रह और भगवान श्री कृष्ण का है अद्भुत है रिश्ता
बुध ग्रह, चंद्रमा के पुत्र माने जाते हैं, और चंद्रमा, जैसा कि हम जानते हैं, भगवान श्री कृष्ण के साले हैं। इसलिए बुध भी श्री कृष्ण के रिश्तेदार के तौर पर देखे जा सकते हैं। जब एक ग्रह हमारे ससुराल के नाते जुड़ा हो, तो वह कभी भी हमारी बुराई नहीं कर सकता। इस प्रकार, भगवान श्री कृष्ण के प्यारे भक्तों को बुध का भी कोई डर नहीं होना चाहिए।
बृहस्पति और शुक्र: सौम्य ग्रह
बृहस्पति और शुक्र दोनों ही ग्रह परम विद्वान माने जाते हैं। इन ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव किसी भी व्यक्ति के जीवन पर नहीं हो सकता, खासकर जब वह श्री कृष्ण के भक्त हों। बृहस्पति और शुक्र ग्रह की कुदृष्टि श्री कृष्ण के भक्तों पर कभी नहीं हो सकती, क्योंकि वे स्वयं भगवान के महान भक्त हैं।
राहु और केतु: भगवान श्री कृष्ण के चक्र के थे भक्त
राहु और केतु, जिन्हें भ्रमणशील ग्रह कहा जाता है, अपने जन्म के दिन से ही भगवान के चक्र में उलझे हुए हैं। इन्हें कभी भी भगवान श्री कृष्ण के भक्तों पर कुदृष्टि डालने की हिम्मत नहीं हो सकती। यह दोनों ग्रह भगवान के चक्र के तहत होते हैं, और जब भी वे किसी पर असर डालने की कोशिश करते हैं, तो वह अंततः श्री कृष्ण की महिमा में ही समाहित हो जाता है।
मंगल ग्रह और भगवान श्री कृष्ण का जानें रिश्ता
मंगल ग्रह, जिसे क्रूर ग्रह माना जाता है, का भगवान श्री कृष्ण से खास रिश्ता है। मंगल ग्रह श्री कृष्ण की पत्नी सत्यभामा जी के भाई हैं। इसी कारण मंगल भी भगवान श्री कृष्ण के ससुराल वाले हैं। इसलिए मंगल का प्रभाव भी भक्तों पर नकारात्मक नहीं हो सकता।



