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तालिबान का नया फरमान – अफगान महिलाओं को पति की अनुमति के बिना रिश्तेदारों से मिलने पर 3 महीने की सजा

काबुल: अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा संचालित सरकार ने एक नया क्रिमिनल कोड लागू किया है, जिसमें विवाहित महिलाओं को अपने पति की अनुमति के बिना रिश्तेदारों से मिलने पर 3 महीने तक की सजा दी जा सकती है। यह नया कानूनी प्रावधान अफगान महिलाओं के अधिकारों और स्वतंत्रता को गंभीर रूप से प्रभावित करने वाला कदम माना जा रहा है। इस कानूनी बदलाव को लेकर वैश्विक समुदाय में चिंता बढ़ गई है, और इसे घरेलू हिंसा को ‘वैध’ बनाने के रूप में देखा जा रहा है।

90 पन्नों का क्रिमिनल कोड: महिला स्वतंत्रता पर प्रतिबंध

तालिबान की शासित अफगान सरकार ने हाल ही में 90 पन्नों का एक नया क्रिमिनल कोड जारी किया है, जिसमें महिलाओं के लिए कई कड़े प्रावधान हैं। इस कोड के तहत, विवाहित महिलाओं को अपने पति की अनुमति के बिना अपने रिश्तेदारों से मिलने की अनुमति नहीं होगी। अगर वे ऐसा करती हैं, तो उन्हें 3 महीने तक की जेल की सजा हो सकती है। इस प्रावधान का उद्देश्य महिलाओं की स्वतंत्रता को सख्ती से नियंत्रित करना है, और यह तालिबान के शासन के तहत महिलाओं के अधिकारों को लेकर जारी कड़े रुख का हिस्सा है।

घरेलू हिंसा को ‘वैध’ बनाने की आशंका

नए क्रिमिनल कोड को लेकर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि इसने घरेलू हिंसा को ‘वैध’ कर दिया है। इस कोड के तहत महिलाओं के खिलाफ हिंसा या शारीरिक उत्पीड़न को कानूनी तौर पर प्रोत्साहित किया जा सकता है, क्योंकि महिलाओं को अपने पति या परिवार के अन्य पुरुषों की अनुमति के बिना कोई स्वतंत्रता नहीं मिल सकती। कई मानवाधिकार संगठनों और वैश्विक नेताओं ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है, और इसे अफगान महिलाओं के खिलाफ एक और गंभीर हमला माना है।

अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों की स्थिति

तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद से ही देश में महिलाओं के अधिकारों की स्थिति में काफी गिरावट आई है। तालिबान ने 2021 में अफगानिस्तान में सत्ता संभालने के बाद महिलाओं की स्वतंत्रता पर सख्त पाबंदियां लगाईं। इसके तहत महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर काम करने, पढ़ाई करने, और यात्रा करने की स्वतंत्रता कम कर दी गई। नई कानून व्यवस्था में भी महिलाओं को पुरुषों की अनुमति के बिना कहीं जाने, काम करने या किसी अन्य स्थान पर अपने अधिकारों का प्रयोग करने की स्वतंत्रता नहीं है।

क्रिमिनल कोड का वैश्विक विरोध

तालिबान के इस नए क्रिमिनल कोड पर वैश्विक स्तर पर तीव्र प्रतिक्रिया आई है। संयुक्त राष्ट्र, मानवाधिकार संगठन और पश्चिमी देशों ने इस कानूनी बदलाव की आलोचना की है और इसे अफगान महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन माना है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि तालिबान सरकार द्वारा महिलाओं के खिलाफ इस तरह के कड़े कदम उठाना अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का उल्लंघन है और यह महिलाओं के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देता है।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने इस नए कानून को तुरंत रद्द करने की मांग की है और अफगानिस्तान में महिलाओं को उनके मूल अधिकारों को बहाल करने का आग्रह किया है। कई देशों ने तालिबान से यह अपील की है कि वे महिलाओं को समान अधिकार देने और उनके खिलाफ उत्पीड़न को समाप्त करने के लिए कदम उठाएं।

अफगान महिलाएं इस बदलाव के खिलाफ मुखर हो रही हैं

हालांकि, अफगानिस्तान में इस प्रकार के कानूनी बदलाव के खिलाफ कई अफगान महिलाएँ और मानवाधिकार कार्यकर्ता भी संघर्ष कर रहे हैं। महिलाएँ अब भी इस नए कानून के खिलाफ अपनी आवाज उठा रही हैं और इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। कई महिला कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह क़ानून उन्हें दमन की ओर धकेलने वाला है और इसके परिणामस्वरूप वे और अधिक सीमित हो जाएंगी।

महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे संगठन, जैसे कि “वुमेन फॉर अफगानिस्तान”, ने कहा है कि इस कानूनी बदलाव से महिलाओं के खिलाफ भेदभाव को और बढ़ावा मिलेगा। वे इसे महिलाओं के स्वतंत्रता और अधिकारों का उल्लंघन मानते हैं और इसके खिलाफ लड़ाई जारी रखने का संकल्प व्यक्त कर रहे हैं।

तालिबान द्वारा अफगानिस्तान में लागू किए गए नए क्रिमिनल कोड ने एक बार फिर महिलाओं के अधिकारों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इस कोड के तहत महिलाओं को पति की अनुमति के बिना रिश्तेदारों से मिलने पर 3 महीने तक की सजा हो सकती है, और घरेलू हिंसा को वैध बनाने के आरोप भी उठाए जा रहे हैं। यह कदम न केवल अफगान महिलाओं के लिए बल्कि वैश्विक समुदाय के लिए भी एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने तालिबान से इस क़ानून को वापस लेने और अफगान महिलाओं को उनके मूल अधिकारों का सम्मान देने की अपील की है।

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