मुरादाबाद: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के पक्ष में उतरी कांग्रेस पार्टी, कलेक्ट्रेट पर किया हल्ला-बोल प्रदर्शन

रिपोर्ट – शाहरुख़ हुसैन
मुरादाबाद: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ की जा रही कार्यवाही के विरोध में मुरादाबाद में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष विनोद अग्रवाल के नेतृत्व में भारी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता सिविल लाइंस स्थित कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी से मुलाकात की। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने शंकराचार्य के खिलाफ की जा रही कार्रवाई पर अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की और इसे अनुचित ठहराया।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किया कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप था कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ की जा रही कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है और इससे धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप की संभावना है। कार्यकर्ताओं ने अपने विरोध के रूप में प्रदर्शन करते हुए जिलाधिकारी से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की और शंकराचार्य के खिलाफ कार्रवाई को तत्काल रोके जाने की अपील की। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने विभिन्न नारे लगाए और शंकराचार्य के पक्ष में समर्थन व्यक्त किया।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना था कि धार्मिक नेताओं के खिलाफ राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई किसी भी प्रकार से स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। इस प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने न केवल शंकराचार्य के पक्ष में आवाज उठाई, बल्कि इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को इस मुद्दे में हस्तक्षेप करने की बजाय निष्पक्ष और न्यायपूर्ण तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए।
जानिए क्या बोले विनोद अग्रवाल
कांग्रेस जिलाध्यक्ष विनोद अग्रवाल ने प्रदर्शन के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित है और इसका उद्देश्य शंकराचार्य के धार्मिक और सामाजिक प्रभाव को कमजोर करना है। हम इस कार्रवाई को पूरी तरह से अनुचित मानते हैं और हम इसके खिलाफ हैं। हम जिलाधिकारी से आग्रह करते हैं कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करें और कार्रवाई को तुरंत रोका जाए।”

उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से ही धर्मनिरपेक्षता और न्याय के पक्ष में रही है और ऐसी किसी भी कार्रवाई का विरोध करेगी, जो धार्मिक नेताओं को निशाना बनाती है। अग्रवाल ने आगे कहा, “हम चाहते हैं कि सरकार अपने कार्यों को धर्मनिरपेक्ष तरीके से अंजाम दे, न कि व्यक्तिगत या राजनीतिक फायदे के लिए धार्मिक नेताओं का इस्तेमाल करे।”
कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने बुलंद की अपनी आवाज
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि धार्मिक नेताओं के खिलाफ राजनीतिक दबाव बनाना और उन्हें निशाना बनाना भारतीय लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है। कार्यकर्ताओं का कहना था कि यह आरोप किसी भी प्रकार से उचित नहीं ठहराए जा सकते, क्योंकि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने हमेशा सामाजिक और धार्मिक सौहार्द की दिशा में काम किया है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने यह भी सवाल उठाया कि क्या प्रशासन धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार रखता है, खासकर तब जब मामला साफ तौर पर राजनीति से प्रेरित दिख रहा हो। कार्यकर्ताओं ने यह भी चेतावनी दी कि अगर इस कार्रवाई को तुरंत नहीं रोका गया, तो कांग्रेस पार्टी इसके खिलाफ और भी बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेगी।
जानिए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर आरोप और प्रशासन की भूमिका
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर आरोप है कि उन्होंने कुछ विवादास्पद बयान दिए थे, जिससे समाज में तनाव पैदा हो सकता था। प्रशासन ने इस मामले में कार्रवाई की शुरुआत की थी, लेकिन कांग्रेस पार्टी और कई अन्य धार्मिक समूहों ने इसे गलत तरीके से पेश किया गया कदम बताया है।

अभी तक प्रशासन की तरफ से इस मामले में कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है, लेकिन कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन से यह साफ है कि इस मुद्दे पर राजनीतिक और धार्मिक दृष्टिकोण से बवाल मच सकता है। कांग्रेस ने यह भी मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और जिन अधिकारियों ने इस मामले में कार्रवाई की है, उनकी भूमिका की समीक्षा की जाए।
पढ़िए कांग्रेस का लक्ष्य और भविष्य की योजनाएं
कांग्रेस पार्टी ने अपने प्रदर्शन को जारी रखने का फैसला किया है और यह भी कहा कि अगर शंकराचार्य के खिलाफ की जा रही कार्रवाई को जल्द ही रोका नहीं गया, तो वह आगामी दिनों में और बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करेंगे। इसके साथ ही कांग्रेस पार्टी ने कहा कि वह इस मुद्दे को हर मंच पर उठाएगी और सरकार से जवाब मांगेगी।
कांग्रेस पार्टी का मुख्य उद्देश्य अब यह है कि वह इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जागरूकता फैलाए और सरकार पर दबाव बनाए कि वह इस तरह की राजनीतिक कार्रवाई से बचें। पार्टी का कहना है कि लोकतंत्र में हर किसी को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है और इसे किसी भी प्रकार से कुचलने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।



