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पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन का नफरत की सियासत पर हमला, इजराइल को ‘आतंकवादी राज्य’ करार

रिपोर्ट – शाहरुख़ हुसैन 

मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद के पूर्व सपा सांसद डॉ. एसटी हसन ने हाल ही में ‘द केरल स्टोरी 2’ फिल्म पर केरल हाई कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक का स्वागत किया। उन्होंने इसे देशहित और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए एक सकारात्मक कदम बताया। इसके साथ ही, उन्होंने फिल्मों के माध्यम से समाज में नफरत फैलाने की कोशिशों की तीखी आलोचना की और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजराइल की भूमिका पर भी कड़ा प्रहार किया। डॉ. एसटी हसन ने इजराइल को एक ‘आतंकवादी राष्ट्र’ करार दिया और कहा कि उनकी नीतियां भारतीय मुसलमानों और इस्लामिक देशों की भावनाओं के खिलाफ हैं।

नफरत की सियासत पर डॉ. एसटी हसन का बड़ा हमला

डॉ. एसटी हसन ने अपनी बात रखते हुए कहा कि ‘द केरल स्टोरी 2’ पर केरल हाई कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक न्यायालय का स्वागतयोग्य कदम है। उन्होंने बताया कि आजकल कुछ फिल्में समाज में नफरत फैला रही हैं और लोगों के बीच वैमनस्य पैदा कर रही हैं। पहले की फिल्में जहां प्यार, मोहब्बत और भाईचारे का संदेश देती थीं, वहीं अब फिल्मों के जरिए धार्मिक और सांप्रदायिक नफरत को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा, “आजकल की फिल्मों का उद्देश्य सिर्फ समाज में विद्वेष फैलाना है। यह समाज की एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचा रहा है। ऐसे में न्यायालय का यह कदम देश के भविष्य के लिए आवश्यक था।”

इजराइल की आलोचना और ‘आतंकवादी राज्य’ करार

इसके बाद, डॉ. एसटी हसन ने इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हरजोग के उस बयान पर पलटवार किया, जिसमें उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था की सराहना की थी। डॉ. हसन ने कहा, “हमारी अर्थव्यवस्था और मैनपावर निस्संदेह बढ़ रहे हैं, लेकिन हमें किसी भी विदेशी देश के द्वारा दी जाने वाली सराहना में छुपे हुए असली मकसद को समझना होगा।”

उन्होंने इजराइल को “आतंकवादी राज्य” बताते हुए कहा, “जो देश मासूम बच्चों और अस्पतालों पर बम बरसाता है, वह किसी का सगा नहीं हो सकता। इजराइल को ‘टेररिस्ट स्टेट’ करार देते हुए उन्होंने यह भी कहा कि इजराइल की तारीफ भारतीय मुसलमानों और इस्लामिक देशों की भावनाओं का अपमान है।”

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्रकरण पर सख्त टिप्पणी

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद पर डॉ. एसटी हसन ने कहा कि इस मामले में कानून को अपना काम करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। लेकिन उन्होंने यह भी अंदेशा जताया कि इस मामले में कुछ गहरी साजिश हो सकती है, जिसकी जांच की जानी चाहिए।

लखनऊ विश्वविद्यालय में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल

डॉ. एसटी हसन ने लखनऊ विश्वविद्यालय में हिंदू-मुस्लिम छात्रों के बीच दिखाए गए भाईचारे की सराहना की। उन्होंने कहा, “लखनऊ विश्वविद्यालय में मुस्लिम छात्रों के नमाज पढ़ते समय हिंदू छात्रों द्वारा बनाए गए सुरक्षा घेरे को पूरे देश के लिए एक नजीर के रूप में लिया जाना चाहिए।”

उन्होंने यह भी कहा कि जब विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मस्जिद सील किए जाने के बाद छात्रों ने जो एकजुटता दिखाई, वही हमारे बुजुर्गों का सिखाया हुआ ‘मूल हिंदुस्तान’ है। इसके विपरीत, उन्होंने उन लोगों की आलोचना की जो इस प्रकार की घटनाओं को तोड़-मरोड़ कर नफरत फैलाने की राजनीति कर रहे हैं।

सांप्रदायिक सौहार्द और सामाजिक समरसता की आवश्यकता

डॉ. एसटी हसन ने इस अवसर पर एक बार फिर सांप्रदायिक सौहार्द और सामाजिक समरसता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज में भाईचारा बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है और यह तभी संभव है जब हम सभी अपने धार्मिक और सांस्कृतिक भेदभावों को नकारें।

उन्होंने उन नेताओं की भी आलोचना की जो नफरत फैलाने के लिए धर्म और समुदायों का इस्तेमाल करते हैं और अपनी राजनीति को चमकाने के लिए समाज में दरार डालने का प्रयास करते हैं।

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