वायरलशहर व राज्य

कानपुर: न्याय के मंदिर में मर्यादा तार-तार – कचहरी में रंगोत्सव के नाम पर इस तरह से हुआ अश्लील डांस

रिपोर्ट – शुभम शर्मा 

कानपुर: कानपुर कचहरी में हाल ही में आयोजित होली मिलन कार्यक्रम ने शहर की न्यायिक मर्यादा को शर्मसार कर दिया। कचहरी परिसर में ‘रंगोत्सव’ के नाम पर आयोजित इस कार्यक्रम में अश्लील डांस और अनुचित हरकतें की गईं, जो कानूनी और सामाजिक दृष्टि से पूरी तरह से अस्वीकार्य थीं। कार्यक्रम में मौजूद वकीलों और अन्य कर्मचारियों ने इसे महज एक मस्ती के रूप में लिया, जबकि यह घटना कानपुर की कचहरी की प्रतिष्ठा को गहरे धुंधला कर गई।

कचहरी परिसर में अश्लील नृत्य और विवाद

कचहरी के परिसर में आयोजित होली मिलन कार्यक्रम का उद्देश्य जहां रंगों और भाईचारे का संदेश देना था, वहीं इस आयोजन ने अनुशासन और मर्यादा की सभी सीमाओं को पार कर दिया। कार्यक्रम में शामिल कई वकीलों और अन्य कर्मचारियों ने कथित तौर पर अश्लील नृत्य किया, जो कचहरी परिसर में कानून और व्यवस्था की तस्वीर को धूमिल करने वाला था। इस दौरान उपस्थित लोगों ने कार्यक्रम को महज मनोरंजन का हिस्सा मानते हुए इसे हलके-फुलके तौर पर लिया, लेकिन यह घटना कई सवालों को जन्म देती है।

बार एसोसिएशन पर उठे सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर इस तरह की अश्लीलता को कचहरी परिसर में आयोजित होने वाले किसी कार्यक्रम का हिस्सा बनने की अनुमति किसने दी? कचहरी में न्याय की प्रक्रिया और गंभीर कानूनी मामलों पर विचार होता है, जहां कोई भी अश्लीलता और अनुशासनहीनता की जगह नहीं होनी चाहिए। ऐसे में कचहरी परिसर में इस प्रकार के विवादास्पद कार्यक्रमों के आयोजन से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल बार एसोसिएशन पर उठता है। क्या बार एसोसिएशन इस आयोजन की मंजूरी देने के लिए जिम्मेदार था, या फिर यह पूरी घटना प्रशासन की अनदेखी के कारण हुई?

न्याय के मंदिर का हुआ अपमान

कचहरी परिसर, जिसे ‘न्याय का मंदिर’ कहा जाता है, आज खुद को असंवेदनशील और अनुशासनहीन घटनाओं का गवाह बना हुआ है। इस घटना ने कानपुर की न्यायिक प्रतिष्ठा को गहरे धब्बे से भर दिया है। जिस परिसर में कानून और न्याय की स्थापना होनी चाहिए, वहां इस तरह की घटनाओं का घटित होना एक गंभीर चिंता का विषय है। क्या यह हमारी न्यायिक प्रणाली की कमजोरी नहीं है कि हम कानून की कड़ी धारा को तोड़ते हुए व्यक्तिगत और सामाजिक मर्यादाओं की अनदेखी करते हैं?

प्रशासन और पुलिस की चुप्पी क्यों?

इस कार्यक्रम के दौरान कचहरी परिसर में हुई अश्लीलता पर न तो प्रशासन ने और न ही पुलिस ने तत्काल कोई कार्रवाई की। कार्यक्रम के दौरान किसी भी तरह की अनुशासनहीनता के खिलाफ तुरंत कदम उठाने के बजाय प्रशासन और पुलिस दोनों ही मौन रहे। यह प्रशासनिक लापरवाही और पुलिस की बेबसी को दर्शाता है, जिन्होंने इस मुद्दे पर संज्ञान लेने की कोई कोशिश नहीं की।

कानपुर की साख पर लगा धब्बा

इस घटना ने कानपुर की साख पर गहरा धब्बा डाला है। जहां एक ओर कानपुर को अपनी न्यायिक प्रणाली और कानूनी अनुशासन पर गर्व होना चाहिए, वहीं इस तरह की घटनाएं उसकी छवि को नुकसान पहुंचाती हैं। कचहरी परिसर में इस तरह की अनुशासनहीनता ने ना केवल कानूनी क्षेत्र में कार्यरत लोगों की मर्यादा को चुनौती दी, बल्कि समाज में भी गलत संदेश दिया।

रंगोत्सव का उद्देश्य और समाज की जिम्मेदारी

होली का त्यौहार हमेशा से रंगों, खुशियों और भाईचारे का प्रतीक रहा है। यह अवसर होता है जब समाज के सभी वर्ग एक-दूसरे से मिलकर त्यौहार का आनंद लेते हैं। लेकिन कचहरी परिसर में होली के नाम पर इस तरह की अश्लीलता को देखना, समाज की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता पर सवाल उठाता है। क्या यह सही है कि हम एक पवित्र और आनंदित अवसर को नकारात्मकता और अनुशासनहीनता का रूप दें?

UP Now

Upnownews.com एक स्वतंत्र न्यूज़ चैनल है, जो आपको सबसे तेज और सटीक खबरें प्रदान करता है। हमारा लक्ष्य है कि हम दुनिया भर की महत्वपूर्ण और प्रासंगिक खबरें आप तक पहुँचाएँ। राजनीति, मनोरंजन, खेल, बिज़नेस, टेक्नोलॉजी, और अन्य विषयों पर हमारी निष्पक्ष और प्रमाणिक रिपोर्टिंग हमें सबसे अलग बनाती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button