कानपुर: RSS ने की प्रेस वार्ता, प्रान्त संघ चालक ने बताया अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा और शताब्दी वर्ष की योजना

रिपोर्ट – शुभम शर्मा
कानपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने कानपुर में एक विशेष प्रेस वार्ता आयोजित की, जिसमें प्रान्त संघ चालक भवानी भीख ने संघ की हालिया गतिविधियों और आगामी योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संघ की प्रतिवर्ष होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक इस बार हरियाणा के पट्टीकल्याणा (समालखा) में 13, 14 और 15 मार्च को संपन्न हुई।
भवानी भीख ने बताया कि इस प्रतिनिधि सभा में देशभर से लगभग 1487 प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य संघ एवं उसके समवैचारिक संगठनों द्वारा पिछले सत्र में संपन्न किए गए कार्यों और आगामी वर्ष की कार्य योजना को साझा करना था।
उन्होंने बताया कि संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर दो प्रमुख प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। पहला, संगठन विस्तार और दूसरा, समाज की सज्जन शक्ति को सद्भाव एवं समरसता के लिए संगठित करना। इस दृष्टि से गृह संपर्क अभियान चलाया जा रहा है।
गृह संपर्क अभियान और व्यापक प्रभाव
भवानी भीख ने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत अभी तक देश के कुछ प्रमुख प्रांतों में लगभग 10 करोड़ घरों और 3 लाख 90 हजार गांवों तक संपर्क स्थापित किया जा चुका है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि केवल केरल राज्य में ही 55 हजार से अधिक मुस्लिम परिवारों और 54 हजार से अधिक ईसाई परिवारों तक संपर्क किया गया।
इस अभियान का उद्देश्य केवल संख्या में वृद्धि करना नहीं है, बल्कि समाज में सद्भावना, भाईचारा और आपसी समझ*को बढ़ावा देना है। संघ के इस दृष्टिकोण से विभिन्न समुदायों के बीच संवाद और सहयोग की भावना विकसित हो रही है।
हिंदू सम्मेलनों का महत्व
भवानी भीख ने बताया कि देशभर में अब तक 36,000 से अधिक स्थानों पर हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जा चुका है। इनमें से कई सम्मेलनों का आयोजन दुर्गम और पिछड़े क्षेत्रों में भी किया गया। उदाहरण के लिए, अरुणाचल प्रदेश के एक दुर्गम क्षेत्र में आयोजित हिंदू सम्मेलन का उल्लेखनीय प्रभाव रहा, जहां स्थानीय लोगों ने पहली बार इस प्रकार की आत्मीयता और सामूहिक एकजुटता का अनुभव किया।
इस प्रकार के सम्मेलनों का उद्देश्य केवल धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं है, बल्कि समाज में सामूहिक चेतना, सांस्कृतिक जागरूकता और एकता को बढ़ावा देना है।
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की भूमिका
RSS की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का आयोजन संगठन के सभी प्रमुख निर्णयों और योजनाओं को साझा करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। इस सभा में संघ के प्रतिनिधियों को पिछले वर्ष की गतिविधियों की समीक्षा करने का अवसर मिलता है। इसके साथ ही आगामी वर्ष के लिए रणनीतियों और योजनाओं को अंतिम रूप दिया जाता है।
भवानी भीख ने बताया कि इस बार की बैठक में संघ ने विशेष रूप से शताब्दी वर्ष की गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित किया। यह वर्ष संघ के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, और इस अवसर पर पूरे देश में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
संघ की दृष्टि और सामाजिक योगदान – पढ़ें
भवानी भीख ने कहा कि संघ की दृष्टि केवल संगठन विस्तार तक सीमित नहीं है। उनका उद्देश्य समाज में सद्भाव, सहिष्णुता और मानविक मूल्यों को मजबूत करना भी है। इसके लिए संघ विभिन्न प्रांतों में शिक्षा, स्वास्थ्य, और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम भी चला रहा है।
उदाहरण के तौर पर, गृह संपर्क अभियान और हिंदू सम्मेलन के माध्यम से समाज के सभी वर्गों के लोगों तक संवाद पहुँचाया जा रहा है। यह न केवल संगठन की पहुंच बढ़ाने का माध्यम है, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास भी है।
प्रमुख आंकड़े और उपलब्धियां
* प्रतिनिधि सभा में देशभर से 1487 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
* गृह संपर्क अभियान के तहत 10 करोड़ घरों और 3 लाख 90 हजार गांवों तक पहुंच।
* केवल केरल में 55 हजार मुस्लिम घरों और 54 हजार ईसाई परिवारों से संपर्क।
* देशभर में अब तक 36,000 से अधिक हिंदू सम्मेलन आयोजित।
इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि RSS न केवल संगठनात्मक रूप से सक्रिय है, बल्कि समाज में सामूहिक चेतना और सांस्कृतिक जागरूकता फैलाने के लिए भी काम कर रहा है।
महत्वपूर्ण रहा कदम
कानपुर में आयोजित इस प्रेस वार्ता ने स्पष्ट किया कि RSS अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा और शताब्दी वर्ष की योजना देश भर में संगठन और समाज के बीच सकारात्मक संपर्क स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। गृह संपर्क अभियान, हिंदू सम्मेलन और अन्य कार्यक्रम समाज में सद्भाव, सहयोग और सामूहिक चेतना को बढ़ावा देने में सहायक साबित हो रहे हैं।
भवानी भीख ने कहा कि संघ का उद्देश्य केवल संगठन विस्तार नहीं है, बल्कि देशभर के नागरिकों में सांस्कृतिक जागरूकता और सामाजिक सद्भाव फैलाना भी है। इस दृष्टि से आने वाले वर्षों में संगठन और समाज के बीच और भी मजबूत संवाद स्थापित होगा।



