कानपुर: न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम और पे स्लिप नियमों पर सख्ती, श्रम आयुक्त ने दिए संयुक्त कार्रवाई के निर्देश

रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा
कानपुर: नगर और कानपुर देहात की औद्योगिक इकाइयों में हाल के दिनों में सामने आए श्रमिक असंतोष के मामलों को गंभीरता से लेते हुए बुधवार को उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय, कानपुर के सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के श्रम आयुक्त मार्केण्डय शाही ने की। इस अवसर पर जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह, पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल, दोनों जनपदों के उद्योगपति तथा श्रमिक प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

बैठक का मुख्य उद्देश्य श्रमिकों से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट संवाद स्थापित करना और श्रम कानूनों के प्रभावी अनुपालन को सुनिश्चित करना था। विशेष रूप से न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम भुगतान और वेतन पर्ची (पे स्लिप) उपलब्ध कराने जैसे बुनियादी प्रावधानों पर चर्चा की गई।
जानिए श्रमिक असंतोष के प्रमुख कारण
बैठक के दौरान श्रम आयुक्त ने स्पष्ट रूप से कहा कि श्रमिक असंतोष के पीछे कई ठोस कारण सामने आए हैं। इनमें निर्धारित न्यूनतम वेतन का भुगतान न किया जाना, ओवरटाइम का समुचित भुगतान न होना, साप्ताहिक अवकाश में कटौती तथा वेतन पर्ची उपलब्ध न कराना प्रमुख हैं।

उन्होंने बताया कि शासन द्वारा 17 अप्रैल 2026 को जारी शासनादेश के अनुसार निर्धारित न्यूनतम वेतन का भुगतान करना अनिवार्य है। हालांकि, कई औद्योगिक इकाइयों में विशेष रूप से संविदाकारों के माध्यम से कार्यरत श्रमिकों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सभी श्रमिकों को मिलेगा समान अधिकार
श्रम आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्येक श्रमिक—चाहे वह सीधे सेवायोजक के मस्टर रोल पर कार्यरत हो, संविदाकार के अधीन हो अथवा किसी अन्य व्यवस्था में कार्य कर रहा हो—उसे निर्धारित न्यूनतम वेतन मिलना ही चाहिए।

इसके अतिरिक्त उन्होंने कहा कि यदि किसी श्रमिक से सप्ताह में 48 घंटे से अधिक कार्य लिया जाता है, तो अतिरिक्त प्रत्येक घंटे के लिए निर्धारित दर से दोगुना ओवरटाइम भुगतान करना अनिवार्य है। साथ ही, प्रत्येक श्रमिक को वेतन पर्ची देना भी कानूनी बाध्यता है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।
संयुक्त निरीक्षण और सख्त कार्रवाई का जारी किया गया आदेश
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि श्रम कानूनों के अनुपालन में किसी प्रकार की लापरवाही पाई जाती है, तो श्रम विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा औचक निरीक्षण किया जाएगा। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

इस संदर्भ में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि न्यूनतम वेतन देना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि श्रम अधिनियमों के तहत अनिवार्य दायित्व है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि नियमित समीक्षा और प्रवर्तन की प्रक्रिया को और सुदृढ़ किया जाएगा।
उद्योगों को प्रोत्साहन, लेकिन संतुलन जरूरी
बैठक के दौरान यह जानकारी भी साझा की गई कि उत्तर प्रदेश सरकार उद्योगों और उद्यमों को लगातार प्रोत्साहन दे रही है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 32,559 कारखानों में से 17,956 कारखाने वर्ष 2017 के बाद स्थापित हुए हैं।

हालांकि, इसके बावजूद श्रमिकों के वेतन में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है। परिवर्तनीय महंगाई भत्ते के अतिरिक्त मजदूरी संरचना में पर्याप्त सुधार नहीं देखने को मिला, जबकि महंगाई दर में निरंतर वृद्धि हो रही है। ऐसे में श्रमिकों और उद्यमियों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है।
कानून व्यवस्था पर प्रशासन का रहा रुख
पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सभी उद्यमियों को सुरक्षा प्रदान की जा रही है। हालांकि, श्रमिकों के नाम पर अराजकता या अशांति फैलाने वाले तत्वों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में श्रम अधिनियमों के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।

इस प्रकार प्रशासन ने एक ओर श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा का आश्वासन दिया, वहीं दूसरी ओर कानून व्यवस्था बनाए रखने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

नई न्यूनतम वेतन दरें घोषित – पढ़िए
बैठक में कानपुर नगर और कानपुर देहात के लिए लागू नई न्यूनतम वेतन दरों की जानकारी भी साझा की गई।
कानपुर नगर के लिए न्यूनतम वेतन दरें:
- अकुशल श्रमिक: 13,006 रुपये प्रतिमाह
- अर्द्धकुशल श्रमिक: 14,306 रुपये प्रतिमाह
- कुशल श्रमिक: 16,025 रुपये प्रतिमाह
कानपुर देहात के लिए न्यूनतम वेतन दरें:
- अकुशल श्रमिक: 12,356 रुपये प्रतिमाह
- अर्द्धकुशल श्रमिक: 13,590 रुपये प्रतिमाह
- कुशल श्रमिक: 15,224 रुपये प्रतिमाह
इन दरों का पालन सभी औद्योगिक इकाइयों के लिए अनिवार्य होगा।

श्रमिक और उद्यमी: एक-दूसरे के पूरक – जिलाधिकारी
जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि श्रमिक और उद्यमी एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि श्रमिकों को उचित वेतन और सम्मानजनक कार्य वातावरण मिलेगा, तो उद्योगों की उत्पादकता भी बढ़ेगी। वहीं, उद्यमियों की प्रगति से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

इसलिए आवश्यक है कि दोनों पक्ष आपसी संवाद और विश्वास के आधार पर आगे बढ़ें। प्रशासन इस दिशा में समन्वयकारी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।

समग्र रूप से देखा जाए तो कानपुर में आयोजित यह बैठक श्रमिक हितों की सुरक्षा और औद्योगिक शांति बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम भुगतान और पे स्लिप जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने से न केवल श्रमिकों का विश्वास बढ़ेगा, बल्कि औद्योगिक विकास को भी स्थिरता मिलेगी।

आगे चलकर संयुक्त निरीक्षण और नियमित समीक्षा से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कानपुर नगर और कानपुर देहात की औद्योगिक इकाइयों में श्रम कानूनों का पूर्णतः पालन हो। इस प्रकार प्रशासन, उद्योग और श्रमिक—तीनों के समन्वित प्रयास से संतुलित और सतत औद्योगिक विकास का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।



