बहराइच: बुद्ध कथा की अनुमति न मिलने पर भड़की आजाद समाज पार्टी, प्रशासन पर लगाया यह आरोप

रिपोर्ट – महेश चंद्र गुप्ता
बहराइच: जिले में बुद्ध कथा के आयोजन की अनुमति न मिलने के कारण आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं और स्थानीय ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष चंद्रदीप सिंह भीष्म के नेतृत्व में हुआ। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि बुद्ध कथा जैसे धार्मिक आयोजन के लिए अनुमति देना प्रशासन का कर्तव्य है, लेकिन बार-बार टाला जाना न केवल उनके अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि इससे समाज में भेदभाव भी उत्पन्न हो रहा है।

जानिए क्यों हुआ प्रदर्शन?
आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वे पिछले एक महीने से बुद्ध कथा के आयोजन के लिए प्रशासन से अनुमति प्राप्त करने के लिए प्रयासरत थे, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन और टालमटोल का सामना करना पड़ा। पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष चंद्रदीप सिंह भीष्म ने आरोप लगाया कि “एसएचओ (थाना प्रभारी) ने तो यहां तक कहा कि बुद्ध कथा के आयोजन की अनुमति देने का कोई औचित्य नहीं है और फिर अनुमति पत्र को फाड़ दिया।”

उन्होंने कहा कि “प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री एक तरफ देश को ‘बुद्ध की धरती’ बताते हैं, लेकिन वहीं दूसरी ओर प्रशासन बुद्ध कथा जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन को अनुमति नहीं दे रहा है। यह भेदभावपूर्ण रवैया है।”
यह है प्रदर्शनकारियों की मांगें
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक प्रशासन बुद्ध कथा के आयोजन की अनुमति नहीं देता, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार नारेबाजी की और हाथों में बाबा साहब डॉ. अंबेडकर और भगवान बुद्ध के चित्र लेकर अपनी मांगों को प्रमुखता से रखा।

भारी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों ने “बुद्ध कथा की अनुमति दो”, “हमारी आवाज सुनो”, “भेदभाव नहीं सहेंगे” जैसे नारे लगाए। उनका यह कहना था कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की जातीं तो उनका संगठन आगे भी इसी तरह का प्रदर्शन करेगा।
इस तरह से रही प्रदर्शन की प्रक्रिया और तात्कालिक परिणाम
प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में भारी भीड़ एकत्रित हो गई, जो प्रशासन की कार्रवाई के प्रति गहरी नाराजगी व्यक्त कर रही थी। चंद्रदीप सिंह भीष्म ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक बुद्ध कथा के आयोजन की अनुमति नहीं दी जाती। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, जिससे कार्यकर्ताओं में और भी गुस्सा बढ़ा।

भीष्म ने कहा, “हम शांतिपूर्वक तरीके से अपनी आवाज उठाने आए हैं, लेकिन यदि हमारी मांगों को अनसुना किया गया तो हम उग्र आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।”
पढ़िए प्रशासन का रुख और प्रतिक्रिया
प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की है, लेकिन मामला अब तक हल नहीं हो पाया है। कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके।

प्रशासन का कहना था कि वे बुद्ध कथा के आयोजन के लिए जरूरी प्रक्रियाओं और नियमों का पालन कर रहे हैं, लेकिन वे किसी भी धार्मिक आयोजन को लेकर भेदभाव नहीं कर रहे हैं।
आजाद समाज पार्टी का ये है आरोप
आजाद समाज पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रशासन का यह रवैया उनकी पार्टी और उनके समर्थकों के प्रति भेदभावपूर्ण है। पार्टी ने यह भी कहा कि प्रशासन ने पहले इस आयोजन के लिए अनुमति देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब वह इसे लेकर किन्हीं कारणों से पीछे हट रहा है।

भीष्म ने कहा, “हम चाहते हैं कि प्रशासन धार्मिक आयोजन को बढ़ावा दे और हमें कोई भेदभाव का सामना न करना पड़े। जब प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री यह कहते हैं कि हम बुद्ध की धरती पर रहते हैं, तो फिर क्यों इस प्रकार की घटनाएं सामने आ रही हैं?”
समाज में दिखा तनाव का माहौल
इस प्रकार के प्रदर्शन और आरोप-प्रत्यारोप के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया है। स्थानीय समुदाय और पार्टी के कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस घटना से समाज में धार्मिक आधार पर भेदभाव की भावना उत्पन्न हो सकती है, जो कि एक स्वस्थ समाज के लिए हानिकारक है।

समाज के कुछ वर्गों का यह भी कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते इस मामले का समाधान नहीं करता है, तो यह मामला और भी गंभीर हो सकता है।
कुल मिलाकर वर्तमान स्थिति है शांत
प्रशासन को यह समझने की जरूरत है कि धार्मिक आयोजनों को लेकर कोई भी भेदभाव नहीं होना चाहिए, खासकर जब वह आयोजन समाज के एक बड़े वर्ग के लिए महत्वपूर्ण हो। प्रशासन के पास यह अवसर है कि वह इस मुद्दे का समाधान शीघ्रता से करें और समाज में किसी भी प्रकार के तनाव को बढ़ने से पहले हल करे।

आजाद समाज पार्टी का यह प्रदर्शन दर्शाता है कि यदि प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों को सही तरीके से नहीं निभाता, तो जनता को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
समाज का प्रदर्शन देता है यह संदेश
इस समय बहराइच जिले के कलेक्ट्रेट परिसर में हुआ प्रदर्शन एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि समाज के किसी भी वर्ग को भेदभाव का सामना नहीं करना चाहिए, विशेषकर धार्मिक आयोजनों में। यह घटना प्रशासन और सरकारी अधिकारियों के लिए एक चेतावनी हो सकती है कि उन्हें अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने की जरूरत है, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और समाज में साम्प्रदायिक सौहार्द बना रहे।



