शहर व राज्य

मुरादाबाद: सूफी हमीद मियां रहमतुल्लाह अलैह का मनाया गया 50 वां सालाना उर्स, अदा की गई श्रद्धांजलि

रिपोर्ट – शाहरुख़ हुसैन 

मुरादाबाद: जनपद मुरादाबाद के बिलारी क्षेत्र में स्थित पुरानी तहसील के पीछे सूफी संत हमीद मियां रहमतुल्लाह अलैह का 50 वां सालाना उर्स श्रद्धा और अकीदत के साथ मनाया गया। इस साल यह उर्स अर्ध शताब्दी (गोल्डन जुबली) के अवसर पर आयोजित किया गया, जिसके कारण विशेष उत्साह देखा गया। बड़ी संख्या में जायरीन और अकीदतमंदों ने इस कार्यक्रम में शिरकत की, और सूफी संत की दरगाह पर अपने दिल की दुआएं अर्पित कीं।

उर्स की शुरुआत

इस विशेष अवसर पर उर्स की शुरुआत पारंपरिक रूप से कुरान खानी और परचम कुशाई से की गई। कार्यक्रम का आयोजन सुबह से ही शुरू हुआ, जब मुरीदों और अकीदतमंदों का तांता दरगाह पर लगने लगा। कुरान खानी के बाद परचम कुशाई की रस्म अदा की गई, जिसमें मुख्य रूप से सूफी हमीद मियां की दरगाह पर श्रद्धा व्यक्त की गई। इस अवसर पर मुल्क में अमन, शांति, भाईचारे और खुशहाली के लिए विशेष दुआ की गई।

दरगाह पर यह माहौल बहुत ही अध्यात्मिक और भावनात्मक था, जिसमें सभी जायरीन ने अपने दिल की इच्छाओं और मन्नतों को स्वीकार करने के लिए दुआ की। अकीदतमंदों का मानना है कि सूफी हमीद मियां के दर से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग विभिन्न स्थानों से यहां अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए आए थे।

जायरीन की संख्या में दिखी बढ़ोतरी

उर्स के इस खास मौके पर मुरादाबाद के अलावा आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में जायरीन ने शिरकत की। सभी जायरीन ने दरगाह पर फूलों की चादर चढ़ाई और सूफी हमीद मियां की दर पर आस्था व्यक्त की। उर्स के दौरान काफी संख्या में लोग मन्नतें मांगते हुए दरगाह पहुंचे, और उन्हें विश्वास था कि उनकी मनोकामनाएं पूरी होंगी।

महफिले-समां और कुल शरीफ

उर्स के दौरान एक अद्भुत नजारा देखने को मिला, जब शानदार नात-ओ-मनकबत का सिलसिला चला। इस दौरान स्थानीय और बाहरी शायरों ने सूफी संतों की शान में अपने कलाम पेश किए। नात-ओ-मनकबत के दौरान माहौल पूरी तरह से भक्ति में डूबा हुआ था। इस कार्यक्रम में शायरों ने अपनी प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम के अंत में ‘कुल’ की रस्म अदा की गई। इस मौके पर सभी उपस्थित जायरीन और अकीदतमंदों में तबर्रुक बांटा गया। इसके बाद लंगर की व्यवस्था की गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। लंगर वितरण से यह कार्यक्रम और भी विशेष हो गया, क्योंकि यह सूफी परंपरा का एक अभिन्न हिस्सा है।

उर्स का महत्व और सूफी परंपरा

सूफी हमीद मियां रहमतुल्लाह अलैह का उर्स केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह एक समाजिक और सांस्कृतिक महोत्सव भी है। इस दिन अकीदतमंद सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं करते, बल्कि एक दूसरे के साथ भाईचारे का संदेश भी फैलाते हैं। उर्स के आयोजन से यह संदेश जाता है कि सूफी संतों का जीवन और उनके उपदेश समाज में प्रेम, अमन और एकता के संदेश देते हैं।

सूफी संतों की दरगाहों पर श्रद्धालु न केवल अपनी इच्छाओं को पूरी करने के लिए जाते हैं, बल्कि वे आत्मिक शांति और संतोष की प्राप्ति के लिए भी आते हैं। दरगाह पर आयोजित किए जाने वाले इन कार्यक्रमों का उद्देश्य सिर्फ भक्ति को बढ़ावा देना नहीं होता, बल्कि यह समाज में सामूहिकता और एकता की भावना को भी मजबूत करना है।

मुरादाबाद के बिलारी क्षेत्र स्थित सूफी हमीद मियां रहमतुल्लाह अलैह के 50वें उर्स ने एक बार फिर यह साबित किया कि सूफी परंपराएं केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। इस कार्यक्रम ने अकीदतमंदों को एकजुट किया और उन्होंने मिलकर अपने समाज के लिए शांति और भाईचारे की कामना की। सूफी संतों का संदेश हमेशा प्रेम, दया, और मानवता का होता है, जो हमें आपस में एक दूसरे से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है।

UP Now

Upnownews.com एक स्वतंत्र न्यूज़ चैनल है, जो आपको सबसे तेज और सटीक खबरें प्रदान करता है। हमारा लक्ष्य है कि हम दुनिया भर की महत्वपूर्ण और प्रासंगिक खबरें आप तक पहुँचाएँ। राजनीति, मनोरंजन, खेल, बिज़नेस, टेक्नोलॉजी, और अन्य विषयों पर हमारी निष्पक्ष और प्रमाणिक रिपोर्टिंग हमें सबसे अलग बनाती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button