
रिपोर्ट – शाहरुख़ हुसैन
राजनीति: पाँच राज्यों में विधानसभा चुनावों के बिगुल बजते ही सियासी पारा एक बार फिर से सातवें आसमान पर पहुँच चुका है। इन चुनावों के बीच, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री, मुख्तार अब्बास नकवी ने रामपुर में एक ऐसा बयान दिया है, जो न केवल राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है, बल्कि विपक्षी दलों को भी बैकफुट पर डाल सकता है।

नकवी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि देश में बीजेपी की बार-बार बन रही सरकारें इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि जनता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर अटूट विश्वास है। उनके अनुसार, बीजेपी के सत्ता में लगातार लौटने के कारण, यह साबित हो गया है कि जनता ने मोदी सरकार की कार्यप्रणाली को स्वीकार किया है।
विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार
लेकिन, नकवी का बयान तब और भी ज्यादा ध्यान आकर्षित करने वाला बन गया, जब उन्होंने विपक्षी दलों की रणनीति पर करारा प्रहार किया। नकवी ने सीधे तौर पर विपक्षी दलों की ‘चुनावी सक्रियता’ पर तंज कसा और कहा कि चुनावों के नजदीक आते ही, कुछ राजनीतिक दल और उनके नेता मुसलमानों को ‘कथित जिललेह-इलाही’ बनने की होड़ में लग जाते हैं।

यह बयान उन राजनीतिक दलों और नेताओं पर था, जो चुनाव के दौरान मुस्लिम वोट बैंक को साधने की कोशिश करते हैं और वोटों के ध्रुवीकरण के लिए उनकी भावनाओं से खेलते हैं। नकवी ने यह भी कहा कि बीजेपी बिना किसी भेदभाव के विकास में विश्वास करती है और इसका उद्देश्य केवल और केवल सभी वर्गों का विकास करना है।
‘जिललेह-इलाही’ का तंज
नकवी ने अपने बयान में विशेष रूप से उन दलों को निशाना बनाते हुए कहा, “जैसे ही चुनाव की आहट होती है, कुछ सियासी पार्टियां और उनके नेता मुसलमानों का ‘कथित जिललेह-इलाही’ बनने की होड़ में लग जाते हैं। यह सिर्फ वोटों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश है, जबकि बीजेपी का उद्देश्य केवल और केवल विकास है।”

उनका यह ‘जिललेह-इलाही’ वाला कटाक्ष सीधे तौर पर उन क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों पर था, जो चुनाव के समय मुसलमानों को अपना ‘खास वोट बैंक’ मानते हुए उनकी भावनाओं से खेलते हैं।
जनता के फैसले पर विश्वास
नकवी ने कहा कि अब जनता इन चुनावी पैंतरों को अच्छी तरह से समझ चुकी है और आगामी चुनावों में उनका फैसला विकास के नाम पर ही होगा। उन्होंने यह भी बताया कि बीजेपी का हर कार्य और निर्णय केवल और केवल समाज के सभी वर्गों के समान विकास के लिए किया जाता है।

विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
अब देखना यह होगा कि मुख्तार अब्बास नकवी के इस तीखे बयान पर विपक्षी दल क्या पलटवार करते हैं। जहाँ एक ओर बीजेपी इस बयान को अपनी चुनावी रणनीति का हिस्सा मानते हुए अपनी बढ़ती हुई साख को उजागर कर सकती है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल भी इसे वोट बैंक की राजनीति के रूप में दिखाने की कोशिश करेंगे।
सियासी बयानबाजी और चुनावी माहौल
मुख्तार अब्बास नकवी का यह बयान न केवल बीजेपी की चुनावी रणनीति को मजबूती देने के लिए है, बल्कि यह विपक्षी दलों को भी अपनी स्थिति और रणनीति पर पुनः विचार करने के लिए मजबूर कर सकता है। इस दौरान, चुनावी माहौल में सियासी बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी रहेगा, जो आगामी चुनावों को और भी दिलचस्प बना देगा।

जहाँ एक ओर बीजेपी के नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला किया है, वहीं यह भी साफ है कि आगामी चुनावों में सियासी माहौल और भी गरमाने वाला है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस बयान के बाद विपक्षी दल अपने चुनावी रणनीति में बदलाव करेंगे या अपनी पुरानी परिपाटी के अनुसार मुसलमानों को एक वोट बैंक के रूप में देखेंगे।



