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कानपुर: किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट में एक और गिरफ्तारी, मेरठ निवासी आरोपी से 9 लाख बरामद

रिपोर्ट – शुभम शर्मा 

कानपुर: किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट मामले में पुलिस को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। थाना रावतपुर क्षेत्र में निजी अस्पतालों में अवैध किडनी खरीद-फरोख्त से जुड़े प्रकरण की जांच के दौरान पुलिस ने मेरठ निवासी परवेज सैफी को गिरफ्तार किया है। इससे पहले इस मामले में आठ अभियुक्तों की गिरफ्तारी हो चुकी है। ताजा गिरफ्तारी के साथ ही जांच का दायरा और विस्तृत हो गया है।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी परवेज सैफी कथित तौर पर इस अवैध नेटवर्क में लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन की भूमिका निभा रहा था। इसके अतिरिक्त, वह ऑपरेशन से पहले रेकी करने में भी शामिल था। पुलिस ने उसके कब्जे से लगभग नौ लाख रुपये बरामद किए हैं, जिन्हें जांच के लिए जब्त कर लिया गया है।

लगातार खुल रहीं अवैध ट्रांसप्लांट नेटवर्क की परतें

जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह मामला निजी अस्पतालों में कथित तौर पर अवैध किडनी प्रत्यारोपण से जुड़ा है। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कई अहम सुराग जुटाए हैं। विशेष रूप से, वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग से महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं।

इसी क्रम में, एक ऑडियो क्लिप में ट्रांसप्लांट के बाद एक महिला की मृत्यु का उल्लेख सामने आया है। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि विस्तृत मेडिकल और कानूनी जांच के बाद ही की जाएगी। फिलहाल, सभी तथ्यों का सावधानीपूर्वक परीक्षण किया जा रहा है।

आरोपी की भूमिका और नेटवर्क की जांच

पुलिस सूत्रों के अनुसार, परवेज सैफी डॉक्टर अफजाल के साथ समन्वय कर संभावित डोनर और रिसिपिएंट की आवाजाही तथा अन्य व्यवस्थाओं को संभालता था। वह कथित तौर पर अस्पताल पहुंचाने, ठहराने और गोपनीय संपर्क स्थापित करने में सक्रिय भूमिका निभाता था।

इसके अलावा, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी किन-किन व्यक्तियों के संपर्क में था और आर्थिक लेनदेन का स्वरूप क्या था। बरामद रकम की स्रोत और उपयोगिता की भी जांच की जा रही है।

पूर्व में हो चुकी हैं आठ गिरफ्तारियां

इस मामले में अब तक कुल नौ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पहले गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई थीं। विशेष रूप से, शिवम नामक आरोपी से पूछताछ में मिले तथ्यों ने जांच को नई दिशा दी है।

पुलिस का कहना है कि प्रत्येक आरोपी की भूमिका अलग-अलग स्तर पर रही है। इसलिए, जांच टीम सभी कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।

डोनर और रिसिपिएंट संबंधों की पड़ताल

कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट की जांच का एक अहम पहलू डोनर और रिसिपिएंट के बीच संबंधों की वैधता की जांच है। पुलिस यह पता लगा रही है कि क्या कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या दस्तावेजों में किसी प्रकार की हेराफेरी की गई थी।

इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और संबंधित प्राधिकरणों से भी जानकारी जुटाई जा रही है। यदि दस्तावेजों में अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित धाराओं में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

तकनीकी साक्ष्य बने आधार

जांच में तकनीकी साक्ष्य अहम भूमिका निभा रहे हैं। पुलिस ने मोबाइल फोन, डिजिटल डिवाइस और संचार माध्यमों की फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है। इन साक्ष्यों से नेटवर्क के अन्य सदस्यों और संभावित लाभार्थियों की पहचान होने की संभावना है।

इसके साथ ही, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह सुनिश्चित कर रही हैं कि किसी भी स्तर पर अवैध आर्थिक गतिविधि को नजरअंदाज न किया जाए।

पुलिस अधिकारियों का बयान

पुलिस उपायुक्त पश्चिम एस.एम. कासिम आबिदी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि जांच निष्पक्ष और तथ्यात्मक आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि अब तक की कार्रवाई में कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं और आगे भी विधिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई जारी रहेगी।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और यदि अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है, तो उन्हें भी कानूनी दायरे में लाया जाएगा।

स्वास्थ्य संस्थानों की भूमिका पर भी नजर

इस मामले ने निजी स्वास्थ्य संस्थानों की निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्न खड़े किए हैं। हालांकि, पुलिस ने किसी विशेष अस्पताल का नाम सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन संबंधित संस्थानों की भूमिका की जांच की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अंग प्रत्यारोपण जैसे संवेदनशील मामलों में पारदर्शिता और सख्त नियामक व्यवस्था बेहद आवश्यक है। इसलिए, इस प्रकरण के बाद निगरानी तंत्र को और सुदृढ़ किए जाने की संभावना है।

कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट मामले में परवेज सैफी की गिरफ्तारी जांच की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। हालांकि, अभी कई पहलुओं की जांच बाकी है। पुलिस तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में जुटी है।

आने वाले दिनों में जांच के और भी तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले में पारदर्शिता और विधिक प्रक्रिया का पूर्ण पालन किया जाएगा, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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