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कर्नाटक: PM मोदी ने लिए 9 संकल्प: जल संरक्षण से स्वदेशी और योग तक, नागरिकों से किया आह्वान

रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा 

कर्नाटक: जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से नौ महत्वपूर्ण संकल्प लेने का आग्रह किया। अपने संबोधन में उन्होंने भारत की प्राचीन सभ्यता, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा, प्राकृतिक खेती, स्वस्थ जीवनशैली और सेवा भावना जैसे विषयों पर विस्तार से विचार साझा किए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हजारों वर्षों से चलती आ रही एक जीवंत सभ्यता है, जिसकी पहचान प्रकृति के साथ संतुलन और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी से जुड़ी रही है। उन्होंने इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए नागरिकों से सक्रिय भागीदारी की अपील की।

पहला संकल्प: जल संरक्षण और बेहतर प्रबंधन

अपने पहले आग्रह में प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि पानी केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। इसलिए हर नागरिक को पानी बचाने और उसके बेहतर प्रबंधन का संकल्प लेना चाहिए।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वर्षा जल संचयन, तालाबों और जलाशयों का संरक्षण तथा घरेलू स्तर पर पानी की बचत जैसे छोटे-छोटे कदम बड़े बदलाव ला सकते हैं। यदि समाज मिलकर प्रयास करे, तो जल संकट जैसी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है।

दूसरा संकल्प: पेड़ और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी

प्रधानमंत्री का दूसरा आग्रह पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा था। उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि करोड़ों लोगों ने अपनी माताओं के सम्मान में पौधे लगाए हैं।

उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे भी अपनी मां के नाम पर एक पेड़ लगाएं और धरती माता की रक्षा का संकल्प लें। इसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को भावनात्मक और सामाजिक आंदोलन का रूप दिया जा सकता है।

तीसरा संकल्प: स्वच्छता को जीवन का हिस्सा बनाना

प्रधानमंत्री ने तीसरे संकल्प में स्वच्छता को लेकर जिम्मेदारी की बात कही। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थल हो, सार्वजनिक स्थान हो, गांव हो या शहर—हर जगह स्वच्छता बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि स्वच्छता केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक संस्कार होना चाहिए। सामूहिक प्रयास से ही स्वच्छ और स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है।

चौथा संकल्प: स्वदेशी और आत्मनिर्भरता

अपने चौथे आग्रह में प्रधानमंत्री ने स्वदेशी उत्पादों को अपनाने और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि यदि हम भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देंगे, तो इससे भारतीय उद्योगों और मैन्युफैक्चरर को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब हर नागरिक स्थानीय उत्पादों और उद्यमों का समर्थन करेगा। इससे रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

पांचवां संकल्प: देश को जानें और घरेलू पर्यटन बढ़ाएं

प्रधानमंत्री ने अपने पांचवें आग्रह में देश की सुंदरता को देखने और समझने की बात कही। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे भारत के विभिन्न हिस्सों की यात्रा करें और घरेलू पर्यटन को बढ़ावा दें।

उन्होंने कहा कि भारत की विविधता, संस्कृति और प्राकृतिक धरोहर को करीब से जानना राष्ट्रीय एकता को भी मजबूत करता है। इसके साथ ही पर्यटन क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलता है।

छठा संकल्प: प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें किसान

प्रधानमंत्री ने किसानों से प्राकृतिक खेती की ओर अग्रसर होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक और जैविक तरीकों को अपनाने से भूमि की उर्वरता और पर्यावरण दोनों को लाभ होगा।

इसके अतिरिक्त, प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत कम हो सकती है और किसानों की आय में भी सुधार संभव है।

सातवां संकल्प: स्वस्थ खानपान की आदतें

प्रधानमंत्री ने स्वस्थ जीवनशैली पर भी बल दिया। उन्होंने भोजन में तेल की मात्रा 10 प्रतिशत कम करने का सुझाव देते हुए कहा कि छोटे बदलाव दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ दे सकते हैं।

उन्होंने नागरिकों से संतुलित आहार अपनाने और परिवार के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील की।

आठवां संकल्प: योग, खेल और फिटनेस

प्रधानमंत्री ने योग, खेल और फिटनेस को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए नियमित व्यायाम और योग अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने युवाओं को खेल गतिविधियों में भाग लेने और फिट इंडिया जैसे अभियानों से जुड़ने का आह्वान किया।

नौवां संकल्प: सेवा भावना को बढ़ावा

अपने अंतिम आग्रह में प्रधानमंत्री ने सेवा भावना को समाज की ताकत बताया। उन्होंने कहा कि जरूरतमंदों की सहायता, सामाजिक कार्यों में भागीदारी और सामुदायिक सहयोग से देश और अधिक सशक्त बन सकता है।

उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपने आसपास के लोगों की मदद करें और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाएं।

समग्र रूप से, “PM मोदी के 9 संकल्प” का यह आह्वान नागरिकों की सक्रिय भागीदारी पर आधारित है। जल संरक्षण से लेकर स्वदेशी अपनाने, प्राकृतिक खेती से लेकर फिटनेस और सेवा भावना तक—इन सभी संकल्पों का उद्देश्य एक जागरूक, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत का निर्माण है।

प्रधानमंत्री का यह संदेश स्पष्ट करता है कि देश के विकास में सरकार के साथ-साथ हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। यदि इन नौ संकल्पों को जीवन में उतारा जाए, तो भारत की सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय प्रगति को नई दिशा मिल सकती है।

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