श्रावस्ती: बाढ़ तैयारी पर सख्त दिखीं डीएम अन्नपूर्णा गर्ग, 15 जून तक सभी बचाव कार्य पूरे करने के दिए निर्देश

रिपोर्ट – सूर्य प्रकाश शुक्ला
श्रावस्ती: दशकों से बाढ़ की समस्या से जूझ रहे उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में इस वर्ष संभावित आपदा से निपटने के लिए प्रशासन ने समय रहते तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में जिलाधिकारी अन्नपूर्णा गर्ग की अध्यक्षता में बाढ़ दिशा-निर्देशन कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट और सख्त निर्देश जारी किए गए।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि बाढ़ केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि समन्वित तैयारी की परीक्षा भी है। इसलिए सभी विभाग आपसी तालमेल के साथ कार्य करें। उन्होंने 30 अप्रैल तक प्रत्येक विभाग को विस्तृत बाढ़ प्रबंधन योजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही 15 जून तक सभी बाढ़ रोधी कार्यों को पूर्ण करने का अंतिम लक्ष्य निर्धारित किया गया।
संभावित बाढ़ को लेकर हुई गहन समीक्षा
बैठक में संभावित बाढ़ की स्थिति, प्रभावित गांवों की संख्या, राहत संसाधनों की उपलब्धता तथा आपातकालीन व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस बार किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इसके अलावा उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे बाढ़ संभावित गांवों का भ्रमण करें और स्थानीय लोगों से सीधे संवाद स्थापित करें। इससे जमीनी समस्याओं की सही जानकारी मिल सकेगी और राहत कार्यों में पारदर्शिता भी बनी रहेगी।
बांधों और स्पर की मरम्मत युद्धस्तर पर होगी
बाढ़ से बचाव में तटबंधों और स्पर की भूमिका अहम होती है। इसलिए जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग को निर्देश दिया कि सभी बांधों और स्पर की मरम्मत कार्य युद्धस्तर पर पूरा किया जाए। जहां भी कटान की आशंका हो, वहां तत्काल प्रभाव से सुरक्षा कार्य किए जाएं।

साथ ही विद्युत विभाग को बाढ़ संभावित क्षेत्रों में खंभों और तारों की मजबूती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि आपदा के समय बिजली आपूर्ति बाधित न हो और दुर्घटनाओं की संभावना कम रहे।
राहत शिविर और जीवन रक्षक संसाधनों की है तैयारी
संभावित आपदा को देखते हुए प्रशासन ने राहत शिविरों की व्यवस्था पर विशेष जोर दिया है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी शरणालयों में स्वच्छ पेयजल, साफ-सफाई और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

इसके अतिरिक्त नाव, गोताखोर, लाइफ जैकेट और अन्य जीवन रक्षक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए। आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए प्रत्येक तहसील स्तर पर कंट्रोल रूम सक्रिय रखने के निर्देश भी दिए गए।
स्वास्थ्य विभाग को भी दिए विशेष तैयारी के निर्देश
बाढ़ के बाद संक्रामक बीमारियों और सर्पदंश की घटनाएं बढ़ने की आशंका रहती है। इसे ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग को पर्याप्त दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।

साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। आवश्यकतानुसार अतिरिक्त मेडिकल टीम तैनात करने की भी योजना बनाई गई है।
पशुपालन और कृषि विभाग को जिम्मेदारी
ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन और खेती दोनों पर बाढ़ का व्यापक प्रभाव पड़ता है। इसलिए पशुपालन विभाग को पशुओं के लिए चारा, टीकाकरण और अस्थायी शरण की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।

वहीं कृषि विभाग को फसल बीमा योजना के तहत अधिक से अधिक किसानों का बीमा कराने पर जोर देने के निर्देश दिए गए, ताकि आपदा की स्थिति में किसानों को आर्थिक राहत मिल सके।
डेटा संग्रह और संचार व्यवस्था पर जोर
प्रभावित गांवों के लोगों की मोबाइल नंबर सहित सूची तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इससे आपातकालीन स्थिति में तुरंत सूचना पहुंचाई जा सकेगी।

जिलाधिकारी ने कहा कि समय पर सूचना और समन्वय ही आपदा प्रबंधन की कुंजी है। इसलिए सभी विभाग नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें और किसी भी बाधा की जानकारी तत्काल जिला प्रशासन को दें।
प्रशासन की सक्रियता से बढ़ी उम्मीदें
लगातार बाढ़ की मार झेल रहे श्रावस्ती जिले में इस बार प्रशासन की सक्रियता से लोगों में उम्मीद जगी है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी तैयारियां पूरी हो जाती हैं, तो संभावित नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

अंततः जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बाढ़ प्रबंधन केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। प्रशासन की प्राथमिकता जनजीवन की सुरक्षा है और इसमें किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

इस प्रकार, श्रावस्ती में बाढ़ से निपटने की तैयारियों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। अब यह देखना होगा कि संबंधित विभाग तय समयसीमा के भीतर अपनी जिम्मेदारियां किस प्रकार निभाते हैं।



