
रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी राजनीतिक एवं सामाजिक योगदान को स्मरण किया। योजना भवन स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुगुणा जी भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण स्तंभ थे, जिनकी दूरदर्शिता और कार्यशैली आज भी प्रेरणा देती है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि हेमवती नंदन बहुगुणा का जीवन संघर्ष, समर्पण और राष्ट्र सेवा का प्रतीक रहा है। उनका जन्म 25 अप्रैल 1919 को तत्कालीन उत्तर प्रदेश (वर्तमान उत्तराखंड) के पौढ़ी गढ़वाल जनपद में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा अपने गांव में प्राप्त करने के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए प्रयागराज पहुंचे। वहीं से उनके राजनीतिक और सामाजिक जीवन की दिशा तय हुई।
स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका
सीएम योगी ने बताया कि वर्ष 1942 से 1946 के बीच ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में बहुगुणा जी की सक्रिय भागीदारी रही। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आह्वान पर उन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ आंदोलन में हिस्सा लिया। परिणामस्वरूप, ब्रिटिश सरकार ने उन्हें जेल भी भेजा। हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा।

दरअसल, स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उनका योगदान केवल एक कार्यकर्ता के रूप में नहीं बल्कि एक संगठक के रूप में भी उल्लेखनीय रहा। यही कारण है कि आज भी उन्हें स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में गिना जाता है।
छात्र राजनीति से मुख्यधारा तक
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान बहुगुणा जी ने एक प्रखर छात्रनेता के रूप में अपनी पहचान बनाई। छात्र राजनीति में सक्रिय रहते हुए उन्होंने सामाजिक मुद्दों को उठाया और युवाओं को जागरूक किया। इसके बाद, स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात उन्होंने मुख्यधारा की राजनीति में कदम रखा।

वर्ष 1952 में हुए पहले आम चुनाव में वे उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य चुने गए। यह उनके राजनीतिक जीवन की एक महत्वपूर्ण शुरुआत थी। इसके बाद उन्हें प्रदेश सरकार में मंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिता का परिचय दिया।
मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के रूप में योगदान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बहुगुणा जी ने उत्तर प्रदेश के मंत्री और मुख्यमंत्री के रूप में उल्लेखनीय कार्य किए। उनके कार्यकाल में विकास, प्रशासनिक सुधार और जनकल्याण की योजनाओं को प्राथमिकता दी गई।

इसके अलावा, उन्होंने केंद्र सरकार में भी विभिन्न मंत्रालयों में अपनी सेवाएं दीं। राष्ट्रीय स्तर पर उनकी भूमिका ने उन्हें एक अनुभवी और प्रभावशाली नेता के रूप में स्थापित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुगुणा जी का विजन दूरदर्शी था और उन्होंने प्रदेश के विकास की जो रूपरेखा तैयार की, उसका प्रभाव आज भी देखा जा सकता है।
वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणा
सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा कि बहुगुणा जी का जीवन वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने राजनीतिक जीवन में नैतिक मूल्यों, जनसेवा और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी। यही कारण है कि वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक जननेता के रूप में पहचाने जाते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश और देश के विकास में जिन नेताओं का योगदान रहा है, उन्हें स्मरण करना और उनके आदर्शों को अपनाना हम सभी का दायित्व है। बहुगुणा जी की जयंती हमें उनके आदर्शों को पुनः आत्मसात करने का अवसर प्रदान करती है।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक नीरज बोरा, अमरेश कुमार, विधान परिषद सदस्य लालजी प्रसाद निर्मल तथा रामचंद्र प्रधान सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी ने बहुगुणा जी को श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके योगदान को याद किया।

राजनीतिक विरासत और ऐतिहासिक महत्व
हेमवती नंदन बहुगुणा का राजनीतिक जीवन कई दशकों तक फैला रहा। उन्होंने विभिन्न राजनीतिक परिस्थितियों में अपनी भूमिका निभाई और समय-समय पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए। उनकी कार्यशैली में संतुलन और समन्वय की झलक स्पष्ट दिखाई देती थी।

विशेष रूप से, उन्होंने उत्तर प्रदेश के विकास को लेकर दीर्घकालिक योजनाओं पर जोर दिया। ग्रामीण विकास, शिक्षा और प्रशासनिक सुधार उनके एजेंडे में प्रमुख रहे। इसलिए, उनकी विरासत आज भी प्रदेश की राजनीतिक धारा में दिखाई देती है।

कुल मिलाकर, हेमवती नंदन बहुगुणा की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम केवल एक श्रद्धांजलि समारोह नहीं था, बल्कि उनके योगदान को स्मरण करने और उससे प्रेरणा लेने का अवसर भी था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा व्यक्त विचारों ने यह स्पष्ट किया कि बहुगुणा जी की राजनीतिक विरासत आज भी प्रासंगिक है।



