
रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा
उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों के भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय जल्द सामने आ सकता है। 26 मई को राज्य के हजारों ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में पंचायत चुनाव समय पर कराना संभव न होने की स्थिति में राज्य सरकार प्रशासक समिति के माध्यम से ग्राम पंचायतों का संचालन जारी रखने पर विचार कर रही है।

दरअसल, पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन में विलंब और नई मतदाता सूची के तैयार न होने के कारण समयबद्ध पंचायत चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। इसी परिप्रेक्ष्य में सरकार वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर प्रशासक समिति मॉडल पर विचार कर रही है।
क्यों मुश्किल है समय पर पंचायत चुनाव?
पंचायत चुनाव की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है। सबसे पहले आरक्षण निर्धारण, फिर मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन और उसके बाद चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की जाती है। हालांकि, वर्तमान परिस्थितियों में पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन अभी तक नहीं हो पाया है। इसके अतिरिक्त, मतदाता सूची का पुनरीक्षण भी पूरा नहीं हुआ है।

इन दोनों प्रक्रियाओं के अधूरे रहने से चुनाव आयोग के लिए पंचायत चुनाव का कार्यक्रम घोषित करना व्यावहारिक रूप से कठिन माना जा रहा है। ऐसे में सरकार संवैधानिक प्रावधानों के तहत वैकल्पिक प्रशासनिक व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा सकती है।
प्रशासक नियुक्त करने का मौजूदा नियम क्या कहता है?
उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम के तहत यदि ग्राम प्रधान का कार्यकाल समाप्त हो जाता है और नए चुनाव नहीं हो पाते हैं, तो संबंधित विकास खंड के सहायक विकास अधिकारी (एडीओ) पंचायत को प्रशासक नियुक्त किया जा सकता है।

हालांकि, इस बार सरकार केवल एडीओ पंचायत को जिम्मेदारी देने के बजाय एक प्रशासक समिति गठित करने पर विचार कर रही है। यह समिति ग्राम पंचायत के संचालन और विकास कार्यों की निरंतरता सुनिश्चित करेगी।
पहली बार प्रशासक समिति को जिम्मेदारी देने पर विचार
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार पहली बार बड़े पैमाने पर प्रशासक समिति मॉडल लागू करने की दिशा में गंभीरता से विचार कर रही है। इस समिति में संबंधित ग्राम प्रधान और पंचायत सदस्यों को भी शामिल किया जा सकता है।

इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ग्राम प्रधान को ही समिति का अध्यक्ष बनाए जाने की संभावना है। इससे प्रशासनिक निरंतरता बनी रहेगी और स्थानीय स्तर पर कार्यों की गति प्रभावित नहीं होगी।
ग्राम पंचायतों के संचालन पर क्या होगा असर?
यदि सरकार प्रशासक समिति के माध्यम से पंचायतों का संचालन जारी रखने का निर्णय लेती है, तो विकास योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों पर तत्काल कोई बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।

मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, ग्राम सड़क योजना और अन्य राज्य व केंद्र प्रायोजित योजनाओं का क्रियान्वयन समिति के माध्यम से जारी रह सकता है। हालांकि, चुनाव न होने की स्थिति में लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी उठ सकता है। इसलिए सरकार संतुलित और विधिक रूप से मजबूत व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है।
पिछड़ा वर्ग आयोग और आरक्षण का मुद्दा
पंचायत चुनाव में आरक्षण का निर्धारण अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है। पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के बिना आरक्षण की नई सूची जारी करना संभव नहीं है।

पिछले वर्षों में न्यायालय के निर्देशों के बाद पंचायत और निकाय चुनावों में आरक्षण प्रक्रिया को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। ऐसे में सरकार किसी भी प्रकार की कानूनी चुनौती से बचने के लिए सभी औपचारिकताओं को पूरा करना चाहती है।
मतदाता सूची तैयार न होना भी बड़ी बाधा
चुनाव आयोग के अनुसार, अद्यतन मतदाता सूची के बिना चुनाव कराना संभव नहीं है। वर्तमान में कई जिलों में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया जारी है।

इसके अतिरिक्त, नए मतदाताओं के नाम जोड़ने और मृत अथवा स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया भी समय लेती है। इसलिए 26 मई से पहले पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी करना व्यवहारिक रूप से कठिन माना जा रहा है।
प्रशासनिक और राजनीतिक संतुलन की चुनौती
ग्राम पंचायतें ग्रामीण विकास की मूल इकाई मानी जाती हैं। ऐसे में कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासनिक शून्यता न बने, यह सरकार की प्राथमिकता है।

दूसरी ओर, लोकतांत्रिक प्रक्रिया को भी समय पर संपन्न कराना आवश्यक है। इसलिए सरकार ऐसी व्यवस्था पर विचार कर रही है, जो अस्थायी भी हो और विधिक रूप से सुरक्षित भी। प्रशासक समिति मॉडल इसी संतुलन को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।
क्या हो सकता है आगे का रोडमैप?
संभावना है कि 26 मई से पहले राज्य सरकार आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दे। इस अधिसूचना में प्रशासक समिति की संरचना, अधिकार और कार्यकाल स्पष्ट रूप से निर्धारित किए जाएंगे।

इसके बाद, जब पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन और मतदाता सूची की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, तब पंचायत चुनाव की नई तिथि घोषित की जा सकती है।
ग्रामीण विकास योजनाओं की निरंतरता पर जोर
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राम पंचायतों में विकास कार्य बाधित न हों। विशेष रूप से जल संरक्षण, सड़क निर्माण, स्वच्छता, स्वास्थ्य केंद्रों के रखरखाव और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का संचालन नियमित रूप से चलता रहे।

प्रशासक समिति मॉडल के माध्यम से इन कार्यों की निगरानी और वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया जारी रखने की योजना बनाई जा रही है।

उत्तर प्रदेश में 26 मई को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। वर्तमान परिस्थितियों में पंचायत चुनाव समय पर कराना कठिन दिख रहा है। ऐसे में राज्य सरकार प्रशासक समिति के माध्यम से पंचायतों का संचालन जारी रखने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

यदि यह निर्णय लागू होता है, तो यह राज्य के पंचायत प्रशासन में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जाएगा। हालांकि, अंतिम निर्णय सरकार की आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल, ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने और विकास कार्यों को प्रभावित होने से बचाने के लिए सरकार सक्रिय रूप से विकल्पों पर विचार कर रही है।



