
रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा
कोलकाता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार शाम उत्तर कोलकाता स्थित करीब 300 वर्ष पुराने ठनठनिया काली मंदिर में पूजा-अर्चना की। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के मतदान से पहले उनके इस दौरे को राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में इसे आध्यात्मिक यात्रा बताते हुए देशवासियों की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की।

रोड शो से पहले प्रधानमंत्री मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने मां सिद्धेश्वरी और भगवान शिव के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने स्वयं आरती भी की। मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे, जो प्रधानमंत्री की एक झलक पाने के लिए एकत्र हुए थे। पूरा क्षेत्र शंखध्वनि और धार्मिक उद्घोषों से गूंज उठा।
मंदिर से जुड़ी ऐतिहासिक विरासत
ठनठनिया काली मंदिर का इतिहास लगभग तीन शताब्दी पुराना है। वर्ष 1703 में तांत्रिक उदय नारायण ब्रह्मचारी ने श्मशान भूमि पर इस मंदिर की स्थापना कराई थी। उस समय यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ था। कहा जाता है कि जब लोग जंगल के रास्ते से गुजरते थे, तो मंदिर की घंटी की ‘ठन-ठन’ ध्वनि सुनाई देती थी। इसी कारण इसका नाम ‘ठनठनिया’ पड़ा।

बाद में वर्ष 1806 में व्यापारी शंकर घोष ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। साथ ही उन्होंने ‘पुष्पेश्वर शिव मंदिर’ का निर्माण भी करवाया। आज भी उनके वंशज इस मंदिर में पूजा-अर्चना की परंपरा को निभा रहे हैं। मंदिर में देवी काली की पूजा ‘मां सिद्धेश्वरी’ के रूप में की जाती है, जो बंगाली धार्मिक आस्था और संस्कृति का महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती हैं।
पीएम मोदी का पूजा कार्यक्रम और संदेश
मंदिर पहुंचने पर प्रधानमंत्री ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा की। विशेष बात यह रही कि उन्होंने मंदिर के पास स्थित एक दुकान से 300 रुपये के विभिन्न फूल और 200 रुपये की मिठाई खरीदी। इसके बाद उन्होंने मां काली की आरती की और देशवासियों की खुशहाली की प्रार्थना की।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पूजा का वीडियो साझा करते हुए लिखा, – “जय मां काली! जय मां दुर्गा! इस प्राचीन मंदिर का बंगाली संस्कृति, विशेषकर कोलकाता से गहरा संबंध है। इसका श्री रामकृष्ण परमहंस से भी विशेष जुड़ाव रहा है। मैंने भारत के लोगों की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और भलाई के लिए प्रार्थना की।”

इस संदेश में प्रधानमंत्री ने मंदिर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने इसे बंगाल की आस्था और पहचान से जुड़ा बताया।
चुनावी दौरे के बीच धार्मिक पड़ाव
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के मतदान से पहले प्रधानमंत्री का यह दौरा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले उन्होंने उत्तर 24 परगना जिले के ठाकुरनगर में मतुआ समुदाय के ठाकुरबाड़ी मंदिर में पूजा की। इसके बाद ठनठनिया कालीबाड़ी में दर्शन कर उन्होंने बीके पाल एवेन्यू से खन्ना क्रॉसिंग तक मेगा रोड शो किया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों पर प्रधानमंत्री की उपस्थिति स्थानीय जनता से जुड़ाव को मजबूत करने का प्रयास है। हालांकि, प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन और सोशल मीडिया संदेश में इसे पूरी तरह आध्यात्मिक यात्रा बताया।
मंदिर और श्री रामकृष्ण का संबंध
ठनठनिया काली मंदिर का संबंध महान संत श्री रामकृष्ण परमहंस से भी बताया जाता है। कहा जाता है कि वे यहां नियमित रूप से दर्शन करने आते थे। इस कारण यह मंदिर न केवल धार्मिक, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। बंगाली समाज में इस मंदिर की विशेष प्रतिष्ठा है।

दरअसल, कोलकाता की सांस्कृतिक पहचान में मां काली की उपासना का विशेष स्थान है। दुर्गा पूजा और काली पूजा जैसे उत्सव यहां की परंपरा का अभिन्न हिस्सा हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री का इस मंदिर में पूजा करना स्थानीय संस्कृति के सम्मान के रूप में भी देखा जा रहा है।
सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था
प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान तैनात रहे। इसके बावजूद आम श्रद्धालुओं की आवाजाही को पूरी तरह रोका नहीं गया। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि पूजा कार्यक्रम व्यवस्थित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो।

स्थानीय लोगों ने बताया कि प्रधानमंत्री के आगमन से क्षेत्र में उत्साह का माहौल था। हालांकि, प्रशासन ने यातायात व्यवस्था को नियंत्रित रखने के लिए वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था भी की थी।
सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व
प्रधानमंत्री का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम बंगाल में चुनावी गतिविधियां तेज हैं। इसलिए इसे राजनीतिक दृष्टि से भी देखा जा रहा है। हालांकि, प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में केवल देश की भलाई और जनता के कल्याण की कामना की बात कही।

विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक स्थलों पर नेताओं की उपस्थिति भारतीय राजनीति में नई नहीं है। बल्कि यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। फिर भी, कोलकाता जैसे सांस्कृतिक शहर में स्थित ऐतिहासिक मंदिर में प्रधानमंत्री की पूजा को प्रतीकात्मक महत्व दिया जा रहा है।

कुल मिलाकर, कोलकाता के 300 साल पुराने ठनठनिया काली मंदिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पूजा-अर्चना आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक तीनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण रही। एक ओर जहां उन्होंने मां सिद्धेश्वरी और भगवान शिव के दर्शन कर देश की सुख-समृद्धि की कामना की, वहीं दूसरी ओर यह दौरा चुनावी माहौल के बीच स्थानीय जनता से संवाद का माध्यम भी बना।

बंगाल की समृद्ध धार्मिक परंपरा और ऐतिहासिक धरोहरों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने यह संदेश दिया कि भारत की सांस्कृतिक विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। आने वाले दिनों में यह दौरा राजनीतिक परिदृश्य पर किस प्रकार प्रभाव डालेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।



