
रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा
उत्तर प्रदेश में टोल नीति को लेकर एक बड़ा बदलाव किया गया है, जिसका सीधा असर गंगा एक्सप्रेस वे पर यात्रा करने वाले यात्रियों पर पड़ेगा। मेरठ से प्रयागराज तक लगभग 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर अब दुपहिया वाहनों को भी टोल टैक्स देना अनिवार्य कर दिया गया है। पहले जहां दोपहिया वाहन कई एक्सप्रेसवे पर टोल से मुक्त रहते थे, वहीं अब नई व्यवस्था के तहत उन्हें भी निर्धारित दर से शुल्क देना होगा।

यह निर्णय गंगा एक्सप्रेसवे की संचालन और रखरखाव लागत को संतुलित करने के उद्देश्य से लिया गया है। हालांकि, इस बदलाव ने आम यात्रियों के बीच चर्चा को भी जन्म दिया है।

मेरठ से प्रयागराज तक सफर होगा महंगा
गंगा एक्सप्रेस वे पर टोल दरें वाहन की श्रेणी के अनुसार तय की गई हैं। यानी अब यात्रा का खर्च इस बात पर निर्भर करेगा कि आप किस प्रकार के वाहन से सफर कर रहे हैं।

सबसे पहले कार, जीप और वैन की बात करें तो इन्हें 2 रुपये 55 पैसे प्रति किलोमीटर की दर से टोल देना होगा। इस हिसाब से मेरठ से प्रयागराज तक की 594 किलोमीटर की दूरी तय करने पर कुल लगभग 1515 रुपये का टोल देना पड़ेगा।

हल्के वाणिज्यिक वाहन (LCV) के लिए दर 4 रुपये 05 पैसे प्रति किलोमीटर निर्धारित की गई है। यानी पूरी दूरी तय करने पर लगभग 2405 रुपये का टोल अदा करना होगा।

जानिए बस और ट्रक के लिए अधिक शुल्क
बस और दो धुरी ट्रक के लिए टोल दर 8 रुपये 20 पैसे प्रति किलोमीटर तय की गई है। इस प्रकार, 594 किलोमीटर की दूरी के लिए लगभग 4870 रुपये का टोल देना होगा।

वहीं भारी निर्माण मशीनरी और मल्टी एक्सल वाहनों के लिए दर 12 रुपये 60 पैसे प्रति किलोमीटर रखी गई है। इस श्रेणी के वाहन को मेरठ से प्रयागराज तक की यात्रा पर लगभग 7485 रुपये चुकाने होंगे।

इसके अलावा, ओवरसाइज वाहन (7 या उससे अधिक एक्सेल वाले) को 16 रुपये 10 पैसे प्रति किलोमीटर की दर से टोल देना होगा। ऐसे में पूरी दूरी तय करने पर लगभग 9565 रुपये का भुगतान करना पड़ेगा।

दुपहिया और तिपहिया वाहन भी दायरे में
नई टोल नीति के तहत सबसे बड़ा बदलाव दुपहिया, तिपहिया और ट्रैक्टर जैसे वाहनों के लिए किया गया है। अब इन वाहनों को भी 1 रुपये 28 पैसे प्रति किलोमीटर की दर से टोल देना होगा।

यदि कोई दोपहिया वाहन मेरठ से प्रयागराज तक पूरी दूरी तय करता है, तो उसे लगभग 760 रुपये का टोल देना पड़ेगा। यह बदलाव उन यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है, जो लंबी दूरी की यात्रा दोपहिया वाहन से करते हैं।

जानिए क्यों किया गया यह बदलाव?
सरकार का तर्क है कि गंगा एक्सप्रेसवे जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के रखरखाव, सुरक्षा और सुविधाओं के लिए पर्याप्त संसाधनों की आवश्यकता होती है। इसलिए सभी प्रकार के वाहनों को टोल दायरे में लाना आवश्यक समझा गया।

इसके अलावा, यह भी माना जा रहा है कि समानता के सिद्धांत के तहत सभी उपयोगकर्ताओं से शुल्क लिया जाना उचित है। हालांकि, इस निर्णय पर आम लोगों और परिवहन संगठनों की प्रतिक्रिया अलग-अलग हो सकती है।

पढ़िए यात्रियों पर क्या होगा असर?
नई टोल दरों का सीधा प्रभाव यात्रा बजट पर पड़ेगा। खासकर उन लोगों के लिए जो नियमित रूप से इस मार्ग का उपयोग करते हैं, उन्हें अपने मासिक खर्च में वृद्धि का सामना करना पड़ सकता है।

हालांकि, एक्सप्रेस वे की बेहतर सड़क गुणवत्ता, कम यात्रा समय और सुरक्षित सफर को देखते हुए कई यात्री इसे सुविधाजनक विकल्प मानते हैं। तेज और सुगम यात्रा के बदले अतिरिक्त टोल को कुछ लोग स्वीकार्य भी मान सकते हैं।

गंगा एक्सप्रेस वे का महत्व
गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट है, जो पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश को जोड़ता है। इससे व्यापार, परिवहन और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

मेरठ से प्रयागराज तक सीधी और तेज कनेक्टिविटी से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि औद्योगिक और कृषि गतिविधियों को भी लाभ मिलेगा। ऐसे में टोल नीति में बदलाव को विकास और वित्तीय संतुलन के नजरिए से भी देखा जा रहा है।

पढ़िए आगे की संभावनाएं
नई टोल नीति लागू होने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि यात्रियों की प्रतिक्रिया क्या रहती है। यदि जरूरत पड़ी तो सरकार भविष्य में कुछ श्रेणियों के लिए रियायत या पास प्रणाली पर विचार कर सकती है।

फिलहाल, स्पष्ट है कि गंगा एक्सप्रेस वे पर यात्रा करने से पहले वाहन श्रेणी के अनुसार टोल दर की जानकारी रखना आवश्यक होगा। इससे यात्रियों को अपने सफर की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी।

गंगा एक्सप्रेस वे नई टोल नीति के तहत अब सभी श्रेणी के वाहनों, including दुपहिया, को टोल देना अनिवार्य होगा। मेरठ से प्रयागराज तक की 594 किलोमीटर की दूरी तय करने पर वाहन के प्रकार के अनुसार अलग-अलग शुल्क लागू होंगे।

हालांकि यह निर्णय यात्रियों के लिए अतिरिक्त खर्च लेकर आया है, लेकिन बेहतर सड़क सुविधा और समय की बचत को देखते हुए इसे बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में एक कदम माना जा रहा है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि यात्रा से पहले टोल दरों की जानकारी अवश्य जांच लें, ताकि सफर सुगम और योजनाबद्ध तरीके से पूरा हो सके।



