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विश्व स्किजोफ्रेनिया दिवस पर एलएलआर अस्पताल में दिखी जागरूकता – मानसिक स्वास्थ्य पर दिया गया विशेष जोर

रिपोर्ट – विवेक कृष्ण दीक्षित 

विश्व स्किज़ोफ्रेनिया दिवस के अवसर पर कानपुर के एलएलआर हॉस्पिटल के मानसिक रोग विभाग में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य स्किजोफ्रेनिया जैसे गंभीर मानसिक रोग के प्रति लोगों को जागरूक करना और समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना था।

इस अवसर पर डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर चर्चा की तथा लोगों से मानसिक रोगों को लेकर संवेदनशील और सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। कार्यक्रम में मरीजों, उनके परिजनों और मेडिकल छात्रों को भी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।

स्किजोफ्रेनिया को लेकर समाज में जागरूकता जरूरी

कार्यक्रम के दौरान मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. धनंजय चौधरी ने कहा कि स्किजोफ्रेनिया एक गंभीर लेकिन उपचार योग्य मानसिक बीमारी है। यदि समय रहते इसकी पहचान हो जाए और मरीज को नियमित उपचार मिले, तो वह सामान्य जीवन जी सकता है।

उन्होंने बताया कि समाज में आज भी मानसिक रोगों को लेकर कई गलत धारणाएं मौजूद हैं। कई लोग मानसिक बीमारियों को अंधविश्वास या तंत्र विद्या से जोड़कर देखते हैं, जबकि यह पूरी तरह चिकित्सकीय स्थिति होती है, जिसका इलाज संभव है।

जानिए क्या है स्किज़ोफ्रेनिया?

स्किजोफ्रेनिया एक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारी है, जिसमें व्यक्ति की सोच, व्यवहार और भावनाओं पर प्रभाव पड़ता है। इस बीमारी से प्रभावित व्यक्ति को वास्तविकता और कल्पना के बीच अंतर समझने में कठिनाई हो सकती है।

मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार इस बीमारी में मरीज को कई प्रकार के लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे—

* भ्रम या गलत धारणाएं
* ऐसी आवाजें सुनाई देना जो वास्तव में मौजूद न हों
* व्यवहार में अचानक बदलाव
* सामाजिक दूरी बनाना
* ध्यान और सोचने की क्षमता में कमी

हालांकि सही इलाज और परिवार के सहयोग से मरीज की स्थिति में सुधार संभव है।

समय पर इलाज से सामान्य जीवन संभव

प्रो. धनंजय चौधरी ने कहा कि स्किजोफ्रेनिया का इलाज पूरी तरह संभव है, लेकिन इसके लिए समय पर पहचान और निरंतर उपचार बेहद जरूरी है।

उन्होंने बताया कि कई मरीज सही उपचार के बाद सामान्य जीवन जी रहे हैं और अपने सामाजिक तथा पेशेवर दायित्व निभा रहे हैं। इसलिए मानसिक रोगों को छिपाने के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सकों से सलाह लेना आवश्यक है।

इसके अलावा उन्होंने लोगों से अपील की कि मानसिक रोग से पीड़ित व्यक्तियों के साथ भेदभाव न करें और उन्हें सहयोग तथा भावनात्मक समर्थन दें।

लगभग एक प्रतिशत लोगों में पाया जाता है रोग

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने जानकारी दी कि स्किजोफ्रेनिया लगभग एक प्रतिशत लोगों में देखा जाता है। हालांकि यह संख्या कम लग सकती है, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में यह एक महत्वपूर्ण चुनौती मानी जाती है।

डॉक्टरों का कहना है कि तनाव, आनुवंशिक कारण और सामाजिक परिस्थितियां भी इस बीमारी के जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं।

हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार हर मरीज की स्थिति अलग होती है और इलाज भी उसी आधार पर तय किया जाता है।

मानसिक रोगों को लेकर बदल रही सोच

पिछले कुछ वर्षों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है। पहले जहां मानसिक रोगों पर खुलकर चर्चा नहीं होती थी, वहीं अब लोग इलाज और काउंसलिंग की ओर अधिक ध्यान देने लगे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता कार्यक्रम और स्वास्थ्य शिक्षा समाज की सोच बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

इसके बावजूद ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में अभी भी मानसिक रोगों को लेकर कई भ्रांतियां मौजूद हैं, जिन्हें दूर करने की आवश्यकता है।

परिवार और समाज की भूमिका महत्वपूर्ण

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार स्किजोफ्रेनिया से जूझ रहे मरीजों के लिए परिवार और समाज का सहयोग बेहद जरूरी होता है।

यदि मरीज को सहयोगपूर्ण वातावरण मिले, तो उपचार का प्रभाव बेहतर होता है। इसके विपरीत उपेक्षा और भेदभाव मरीज की स्थिति को और गंभीर बना सकते हैं।

विशेषज्ञों ने कहा कि मानसिक रोगों को सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं की तरह समझना चाहिए और मरीजों को सम्मान और सहानुभूति के साथ देखना चाहिए।

मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ रहा सरकारी फोकस

देशभर में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए सरकार और स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में मानसिक स्वास्थ्य विभागों को मजबूत बनाया जा रहा है।

इसके अलावा जागरूकता अभियान, हेल्पलाइन सेवाएं और काउंसलिंग सुविधाएं भी बढ़ाई जा रही हैं ताकि अधिक से अधिक लोग समय पर मदद प्राप्त कर सकें।

युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक जीवनशैली, बढ़ता तनाव और सामाजिक दबाव युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं।

इसलिए स्कूलों, कॉलेजों और कार्यस्थलों पर मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों की आवश्यकता बढ़ गई है। समय पर काउंसलिंग और समर्थन से कई समस्याओं को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सकता है।

जागरूकता कार्यक्रम में दिए गए महत्वपूर्ण संदेश

कार्यक्रम के दौरान डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने लोगों को कई महत्वपूर्ण संदेश दिए—

* मानसिक रोगों को छिपाएं नहीं
* समय पर विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह लें
* मरीजों के साथ भेदभाव न करें
* नियमित उपचार जारी रखें
* मानसिक स्वास्थ्य को भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना महत्व दें

इन संदेशों का उद्देश्य लोगों में सकारात्मक सोच विकसित करना था।

विश्व स्किजोफ्रेनिया दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि स्किजोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारियां उपचार योग्य हैं और सही समय पर इलाज मिलने से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।

ऐसे कार्यक्रम समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने और मानसिक रोगों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूक रहना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ सहायता लेना बेहद जरूरी है।

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