
रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा
लंदन हाई कोर्ट ने भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी की प्रत्यर्पण (Extradition) प्रक्रिया के खिलाफ याचिका को खारिज कर दिया है। 25 मार्च 2026 को सुनाए गए इस फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिका में कोई ऐसे असाधारण परिस्थितियों नहीं हैं, जिनके आधार पर मामले को दोबारा खोला जा सके। यह निर्णय लंदन स्थित हाई कोर्ट ऑफ़ जस्टिस, किंग्स बेंच डिवीजन ने सुनाया।
नीरव मोदी पर पंजाब नेशनल बैंक से करीब 6498.20 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के आरोप हैं। भारतीय जांच एजेंसी सीबीआई वर्ष 2018 से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रही है।

जानिए क्या थी याचिका और कोर्ट का निर्णय
नीरव मोदी ने अपनी याचिका में भारत में संभावित दुर्व्यवहार का हवाला देते हुए यह दावा किया कि भारत सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने ‘भंडारी जजमेंट’ का उदाहरण देते हुए कोर्ट से मामले को पुनः खोलने की गुहार लगाई।
हालांकि, कोर्ट ने सभी तर्कों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि नीरव मोदी द्वारा प्रस्तुत किए गए तथ्यों में कोई नई या असाधारण परिस्थिति नहीं है, जो पहले से चल रही प्रत्यर्पण प्रक्रिया को रोक सके।
भारत की कानूनी टीम और क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS)

इस मामले में क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS) के वकीलों ने मजबूती से पैरवी की। इसके साथ ही सीबीआई की विशेष टीम भी ब्रिटेन में सुनवाई के लिए मौजूद रही।
सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारी सुनवाई में भाग लेने के लिए लंदन पहुंचे और अदालत के समक्ष नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की आवश्यकता को रेखांकित किया। इस प्रक्रिया में भारतीय जांच एजेंसी की सक्रिय भूमिका और कानूनी तर्क निर्णायक साबित हुए।
जानिए कब हुई थी नीरव मोदी की गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण प्रक्रिया
नीरव मोदी को मार्च 2019 में ब्रिटेन में गिरफ्तार किया गया था और तब से वह वहीं की जेल में बंद हैं। ब्रिटेन की अदालतों ने पहले भी उनके प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी और उनकी अपीलों को खारिज कर चुकी हैं।

हालांकि, प्रत्यर्पण प्रक्रिया में एक अस्थायी कानूनी अड़चन के कारण देरी हुई थी, जिसे अगस्त 2025 में हटा दिया गया था। अब हाई कोर्ट का यह निर्णय प्रत्यक्ष रूप से भारत सरकार और सीबीआई के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।
भारत के लिए सफलता और प्रत्यर्पण की संभावना
इस फैसले के साथ भारत सरकार और सीबीआई के लंबे समय से चल रहे प्रयासों को बल मिला है। अब नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पित होने की प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना है। भारत के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे भारतीय न्याय प्रणाली की सफलता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उदाहरण बताया है।

नीरव मोदी मामला: आर्थिक अपराध का हाई-प्रोफाइल केस
नीरव मोदी पर लगे आरोप केवल बैंक धोखाधड़ी तक सीमित नहीं हैं। यह मामला भारतीय आर्थिक प्रणाली और बैंकिंग सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। इस तरह के हाई-प्रोफाइल मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक होता है। ब्रिटेन और भारत के बीच प्रत्यर्पण समझौते और कानूनी सहयोग ने इस प्रक्रिया को सुनिश्चित किया है।
यह होगी भविष्य की कानूनी प्रक्रिया
अब हाई कोर्ट के इस निर्णय के बाद नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अगले चरण में बढ़ेगी। भारत सरकार और सीबीआई द्वारा तैयार की गई कानूनी रणनीति के तहत नीरव मोदी को जल्द ही भारत लाया जा सकता है।

कानून विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के बाद नीरव मोदी की बड़ी कानूनी चुनौतियाँ समाप्त हो जाएंगी और प्रत्यर्पण प्रक्रिया पूरी तरह से स्पष्ट हो जाएगी। नीरव मोदी की याचिका खारिज होने से यह संदेश जाता है कि अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था और सहयोग आर्थिक अपराधों के मामलों में निर्णायक भूमिका निभाता है।
इस मामले में भारत सरकार और सीबीआई की सक्रिय भूमिका ने यह सुनिश्चित किया कि अपराधियों को न्याय से दूर नहीं रखा जा सके। अब नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पित होने की प्रक्रिया पूरी तरह से कानूनी रूप से सुनिश्चित हो गई है।



