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हरदोई: दबंगों का टुटा बड़ा कहर, महिलाओं को जमकर पीटा, पुलिस की खामोशी पर सवाल – जानें पूरा मामला

रिपोर्ट – गुलफाम खान 

हरदोई: उत्तर प्रदेश में जहां महिला सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं आज एक शर्मनाक घटना ने हरदोई में महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में कुछ दबंग पुरुष और महिलाएं मिलकर अन्य महिलाओं को लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटते हुए नजर आ रहे हैं। जबकि पीड़ित महिलाएं खुद को बचाने के लिए मदद की गुहार लगा रही हैं। इस घटना ने पुलिस और प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल उठाए हैं। क्या महिलाओं की सुरक्षा केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगी, या पुलिस और प्रशासन इसका ठोस समाधान निकालेंगे?

जानिए घटना का पूरा विवरण

यह घटना अतरौली थाना क्षेत्र के सिंहपुर गांव की है। सुबह के समय सुखरानी अर्कवंशी नामक महिला अपनी पुश्तैनी जमीन पर जानवर बांधने गई थीं। उसी दौरान, आरोप है कि रामलली पत्नी राजेन्द्र और उनके साथियों ने सुखरानी का रास्ता रोक लिया और खूंटा उखाड़ लिया। इस पर जब सुखरानी ने विरोध किया, तो रामलली, राजेन्द्र पुत्र बाबूलाल, गोलू पुत्र लालजीत, शत्रोहन पुत्र राजेन्द्र, जानू पुत्र बृजलाल और सुनीता पत्नी लालजीत ने मिलकर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। इस हमले में सुखरानी के अलावा उनकी बहन गीता, और अन्य महिलाएं उषा और साक्षी भी गंभीर रूप से घायल हो गईं।

पीड़ित महिलाओं का कहना है कि यह हमला जमीन कब्जाने की पुरानी रंजिश का नतीजा था। महिलाओं का कहना था कि हमलावरों ने उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी और पूरी तरह से उनके ऊपर हमला बोल दिया।

वीडियो में दिख रही दहशत

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो इस पूरे घटनाक्रम को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। वीडियो में दिखता है कि दबंग लोग महिलाओं के साथ क्रूरता से मारपीट कर रहे हैं, जबकि पीड़ित महिलाएं मदद के लिए चिल्ला रही हैं। वीडियो में यह भी साफ दिखता है कि कैसे कुछ लोग अपने घर के बाहर बैठकर हमले की इस वारदात को देख रहे हैं, लेकिन कोई भी महिला की मदद करने के लिए आगे नहीं आता।

स्थानीय पुलिस की निष्क्रियता पर उठ रहे सवाल 

घटना के बाद, घायल महिलाएं सीधे थाने पहुंची और मामले की रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की। लेकिन, स्थानीय पुलिस ने तुरंत कोई कार्रवाई नहीं की। आरोप है कि पुलिस ने यह कहकर मामला टाल दिया कि उन्हें मामले की जांच करनी पड़ेगी। इसके बाद, परेशान और निराश होकर पीड़ित महिलाओं ने पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा और आईजी से शिकायत की। उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ही पुलिस हरकत में आई और आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आश्वासन दिया। इस मामले ने पुलिस की निष्क्रियता और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

मिशन शक्ति अभियान पर पड़ा बड़ा प्रभाव

राज्य सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर ‘मिशन शक्ति’ अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करना और उन्हें अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। इसके बावजूद, इस प्रकार की घटनाओं के सामने आने से यह सवाल उठता है कि क्या मिशन शक्ति अभियान और महिला सुरक्षा कानून सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे? यदि पुलिस तुरंत कार्रवाई करती और पीड़ित महिलाओं की मदद करती, तो शायद यह शर्मनाक घटना टल सकती थी।

महिला सुरक्षा पर उठे सवाल

महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन और समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर काम करना होगा। इस घटना ने पुलिस प्रशासन के कामकाजी रवैये और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। क्या हम तब तक इंतजार करेंगे जब तक इस प्रकार की घटनाएं और बढ़ जाएं? क्या महिलाओं को अपनी सुरक्षा के लिए हमेशा पुलिस प्रशासन का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा? इन सवालों का जवाब पुलिस और प्रशासन को देना होगा।

पढ़िए क्षेत्रीय अधिकारियों का बयान

पीड़ित महिलाओं ने शिकायत में बताया कि उनके साथ लगातार उत्पीड़न किया गया और यह हमला उनकी पुश्तैनी जमीन पर कब्जा करने के उद्देश्य से किया गया था। पुलिस अधीक्षक ने मामले की जांच शुरू करने का आश्वासन दिया और आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने की बात कही। हालांकि, अब यह देखना होगा कि क्या पुलिस कार्रवाई में तत्परता दिखाती है और इस घटना के जिम्मेदारों को सजा दिलवाती है।

निष्कर्ष: क्या यह घटना महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर चिंता का कारण बनेगी?

हरदोई में हुई इस घटना ने एक बार फिर से महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जहां एक ओर सरकार महिला सुरक्षा को लेकर योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता ने इस मामले में सवाल उठाए हैं। यदि प्रशासन और पुलिस इस घटना के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठातीं, तो यह और भी गंभीर परिणाम उत्पन्न कर सकता है। अब यह पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वे महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए तत्परता दिखाएं और इन घटनाओं के दोषियों को कड़ी सजा दिलवाएं।

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