लखनऊ: KGMU में फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार: संदिग्ध गतिविधियों और दस्तावेजों की शुरू हुई जांच

रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा
लखनऊ: राजधानी स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में एक व्यक्ति को फर्जी तरीके से डॉक्टर की वेशभूषा में संदिग्ध गतिविधियां करते हुए पकड़ा गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में आरोपी को हिरासत में लिया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि संबंधित व्यक्ति के पास वैध चिकित्सा डिग्री नहीं है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है।

जानिए कैसे सामने आया मामला
जानकारी के अनुसार, आरोपी हस्साम अहमद नामक युवक डॉक्टर की वेशभूषा में परिसर के भीतर घूमता पाया गया। वह कथित रूप से मेडिकल छात्रों और अन्य लोगों से संपर्क में था। विश्वविद्यालय प्रशासन को उसकी गतिविधियों पर संदेह हुआ, जिसके बाद उसकी पहचान और दस्तावेजों की जांच की गई। जांच में कई दस्तावेज संदिग्ध पाए गए।

“गिरफ्तार फर्जी डॉक्टर”
इसके बाद प्रशासन ने तत्काल स्थानीय पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आरोपी को हिरासत में लिया और पूछताछ शुरू की। प्रारंभिक पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने की बात कही जा रही है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही की जाएगी।
शैक्षणिक योग्यता और दस्तावेजों की शुरू हुई जांच
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी की शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी सवाल उठे हैं। बताया जा रहा है कि उसके पास मान्यता प्राप्त चिकित्सा डिग्री का प्रमाण उपलब्ध नहीं था। इसके अलावा, उसके पास मौजूद पहचान पत्र और अन्य कागजात की सत्यता की जांच की जा रही है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परिसर में प्रवेश और चिकित्सा गतिविधियों के लिए सख्त नियम हैं। यदि कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
छात्रों से संपर्क और संभावित उद्देश्य
जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि आरोपी का छात्रों से संपर्क किस उद्देश्य से था। कुछ छात्रों ने बताया कि वह स्वयं को चिकित्सकीय कार्य से जुड़ा बताता था। हालांकि, किसी भी प्रकार के आरोप की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है।

पुलिस ने यह भी कहा है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही कुछ जानकारियों की सत्यता की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि अपुष्ट सूचनाओं को साझा करने से बचें और जांच पूरी होने तक आधिकारिक बयान का इंतजार करें।
पढ़िए विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया
KGMU प्रशासन ने बयान जारी कर कहा कि परिसर की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलते ही आंतरिक सतर्कता तंत्र सक्रिय किया गया। प्रशासन ने यह भी बताया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पहचान सत्यापन प्रक्रिया को और मजबूत किया जाएगा।

इसके साथ ही, विश्वविद्यालय ने छात्रों और कर्मचारियों से अपील की है कि यदि उन्हें किसी भी व्यक्ति की गतिविधि संदिग्ध लगे तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें।
यह है पुलिस की आगे की कार्रवाई
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। उसके मोबाइल फोन, दस्तावेज और अन्य सामग्री को जब्त कर जांच की जा रही है। डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वह किससे संपर्क में था और उसकी गतिविधियों का वास्तविक उद्देश्य क्या था।

अधिकारियों ने कहा कि यदि जांच में किसी संगठित गतिविधि या अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जांच प्रारंभिक चरण में है और सभी पहलुओं की गंभीरता से पड़ताल की जा रही है।
सभी को अफवाहों से बचने की अपील
इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रशासन और पुलिस ने नागरिकों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बिना पुष्टि के किसी भी प्रकार की जानकारी प्रसारित करना सामाजिक सौहार्द के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें।

KGMU फर्जी डॉक्टर मामला फिलहाल जांच के अधीन है। विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस मिलकर पूरे प्रकरण की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। प्रारंभिक जांच में दस्तावेजों और पहचान को लेकर अनियमितताएं सामने आई हैं, लेकिन विस्तृत रिपोर्ट के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

इस घटना ने शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा और पहचान सत्यापन व्यवस्था की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित किया है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।



