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मुरादाबाद: आयतुल्लाह खामनेई की याद में शिया समुदाय ने निकाला कैंडल मार्च, व्यक्त की संवेदनाएं

रिपोर्ट – शाहरुख़ हुसैन 

मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में नवाबपुरा स्थित गुड़िया बाग इलाके की सड़कों पर एक गमगीन और भावपूर्ण माहौल देखने को मिला, जब शिया समुदाय के लोगों ने ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामनेई की याद में कैंडल मार्च निकाला। यह मार्च स्थानीय शिया समुदाय की श्रद्धांजलि और संवेदनाओं का प्रतीक बन गया।

शिया समुदाय के लोग मानते हैं कि आयतुल्लाह खामनेई का निधन केवल ईरान के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे आलम-ए-इस्लाम के लिए एक क्षति है। इसलिए उन्होंने अपने रूहानी रहबर को श्रद्धांजलि देने के लिए हाथों में मोमबत्तियाँ और उनकी तस्वीरें लेकर सड़कों पर कदम रखा।

जानिए कैंडल मार्च का उद्देश्य

कैंडल मार्च का मुख्य उद्देश्य केवल खामनेई को याद करना ही नहीं था, बल्कि उनके योगदान को याद करना और विश्व शांति में उनके प्रयासों को सम्मानित करना भी था। मार्च में सैकड़ों युवा, बुजुर्ग और बच्चे शामिल हुए।

मार्च के दौरान माहौल पूरी तरह गमगीन और शांतिपूर्ण था। लोग अपने नेता के प्रति आस्था और सम्मान व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने उनकी रूह की शांति के लिए दुआएं कीं और उनके विचारों और संदेशों को याद किया।

एक सहभागी ने कहा, “आज हम यहाँ अपने रूहानी रहबर को खिराज-ए-अकीदत (श्रद्धांजलि) पेश करने के लिए जमा हुए हैं। उनके जाने से जो खालीपन आया है, उसे भरना मुमकिन नहीं है। हम उनके आदर्श और शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाएंगे।”

शिया समुदाय का योगदान और सामाजिक दृष्टिकोण

मुरादाबाद, जिसे पीतल नगरी के नाम से भी जाना जाता है, धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ शिया समुदाय के लोग हमेशा अपने धार्मिक और सामाजिक कर्तव्यों के प्रति सजग रहे हैं।

शिया समुदाय के अनुसार, इस तरह के आयोजनों का उद्देश्य सामाजिक और धार्मिक एकता को बढ़ावा देना है। यह न केवल उनके आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि समुदाय के युवा और बुजुर्गों को सामूहिक चेतना और जिम्मेदारी की भावना भी प्रदान करता है।

इस तरह से निकाला गया कैंडल मार्च

मार्च के दौरान हर सहभागी ने मोमबत्तियाँ थामीं और खामनेई की तस्वीरें उठाईं। यह एक दृश्य और भावनात्मक अनुभव था। गगन को रोशन करने वाली मोमबत्तियाँ और सड़कों पर एकत्रित लोग इस मार्च को और भी सांकेतिक और प्रेरक बना रहे थे।

मार्च का मूल संदेश शांति, श्रद्धा और मानवता था। लोगों ने यह भी जताया कि उनके नेतृत्व और विचारों से उन्हें संदेश मिलता रहा कि धर्म और मानवता को साथ लेकर चलना चाहिए।

जानिए क्या है स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

गुड़िया बाग इलाके के स्थानीय निवासी भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने मार्च की व्यवस्था, अनुशासन और शांतिपूर्ण प्रकृति की सराहना की। स्थानीय लोगों का कहना था कि इस तरह के आयोजन सामाजिक और धार्मिक सौहार्द को बढ़ावा देते हैं।

एक वरिष्ठ नागरिक ने कहा, “हमारे लिए यह आयोजन केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि एक संघटनात्मक और सामूहिक अनुभव है। यह हमें याद दिलाता है कि आस्था और श्रद्धा समाज में सकारात्मक संदेश फैलाती हैं।”

विश्व स्तर पर पड़ रहा प्रभाव

विशेषज्ञ मानते हैं कि आयतुल्लाह खामनेई का निधन और उसके बाद का कैंडल मार्च विश्व स्तर पर शिया समुदाय की एकता और धार्मिक चेतना को दर्शाता है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से लोग शांति, एकता और धार्मिक सहिष्णुता का संदेश फैलाते हैं।

केवल श्रद्धांजलि देना नहीं था कैंडल मार्च 

मुरादाबाद के नवाबपुरा में निकाला गया यह कैंडल मार्च केवल श्रद्धांजलि का आयोजन नहीं था, बल्कि यह एक सांकेतिक और आध्यात्मिक संदेश भी था। यह मार्च शांति, श्रद्धा और सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया। शिया समुदाय ने इस कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया कि आस्था और श्रद्धा के मूल सिद्धांतों को जीवन में अपनाना और दूसरों तक फैलाना आवश्यक है।

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