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यूपी: स्मार्ट प्रीपेड मीटर से वसूली गई राशि पर लिया गया बड़ा फैसला, 127 करोड़ रुपये लौटाने का निर्देश

“न्यूज़ डेस्क”

उत्तर प्रदेश: राज्य के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर के माध्यम से वसूली गई अतिरिक्त राशि को लौटाने का आदेश जारी किया है। आयोग के इस आदेश के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 के बाद वसूली गई अतिरिक्त राशि को उपभोक्ताओं के खातों में वापस किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, राज्य में सिंगल फेज कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं से अधिकतम 3,216 रुपये अतिरिक्त वसूले गए थे। वहीं, थ्री फेज कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं से 7,241 रुपये तक अतिरिक्त राशि वसूली गई। इस प्रकार, 3.53 लाख से अधिक नए कनेक्शनों पर यह अतिरिक्त वसूली हुई थी।

इस निर्णय का आधार उपभोक्ताओं की याचिका थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर उनसे अधिक राशि वसूली जा रही है। आयोग ने इस याचिका की सुनवाई के बाद आदेश दिया कि उपभोक्ताओं से वसूली गई अतिरिक्त राशि को जल्द से जल्द लौटाया जाए।

आदेश किया गया स्पष्ट 

विद्युत नियामक आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि बिजली वितरण कंपनियों को उपभोक्ताओं के खातों में सीधे राशि वापस करनी होगी। इसके साथ ही आयोग ने यह भी कहा कि भविष्य में किसी प्रकार की अतिरिक्त वसूली को रोकने के लिए कंपनियों को आवश्यक कदम उठाने होंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश उपभोक्ताओं के अधिकारों और न्याय की रक्षा का महत्वपूर्ण कदम है। इसके अलावा, यह राज्य में बिजली वितरण कंपनियों की पारदर्शिता और जवाबदेही को भी बढ़ावा देता है।

स्थानीय उपभोक्ताओं ने इस आदेश का स्वागत किया है। उनका कहना है कि कई घरों में बिजली का खर्च पहले से ही बढ़ गया था, और इस प्रकार की अतिरिक्त वसूली ने आम लोगों की जेब पर और बोझ डाला। उन्होंने कहा कि आयोग के आदेश से उन्हें राहत मिलेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।

पढ़िए क्या काना है अधिकारियों का 

उपभोक्ता अधिकारों के जानकारों ने बताया कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर की वसूली में पारदर्शिता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आयोग का यह कदम उपभोक्ताओं के विश्वास को पुनः मजबूत करेगा और बिजली कंपनियों को जिम्मेदार बनाने में मदद करेगा।

इसके अलावा, अधिकारियों ने बताया कि आयोग ने बिजली वितरण कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे वसूली के रिकॉर्ड को अपलोड करें और किसी भी अतिरिक्त राशि की जानकारी उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराएं। इससे उपभोक्ताओं को अपने बिलों की सही जानकारी मिलेगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सकेगा।

इस आदेश का असर राज्य के सभी क्षेत्रों में देखने को मिलेगा। विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को राहत मिलना सुनिश्चित है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जाएगा ताकि 1 अप्रैल 2026 के बाद की वसूली को तुरंत लौटाया जा सके।

उपभोक्ताओं के हितकारी है यह फैसला 

अंततः, विद्युत नियामक आयोग का यह आदेश उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। इससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार और नियामक आयोग उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए गंभीर हैं और किसी भी अनियमित वसूली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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