मुरादाबाद: करूला मेला बिना पार्किंग और एग्जिट के बना संकट, जानिए सज्ञान के बाद प्रशासन ने किया क्या?

रिपोर्ट – शाहरुख़ हुसैन
मुरादाबाद: जिले के करूला क्षेत्र में स्थित ‘धर्म कांटे’ के पास ईद के अवसर पर लगाए गए मेले ने स्थानीय निवासियों और राहगीरों के लिए गंभीर परेशानी खड़ी कर दी है। यह मेला, जो एक त्योहार और उत्सव के रूप में आयोजित किया गया था, अब सुरक्षा और व्यवस्था की कमी के कारण चिंता का विषय बन गया है।
भीड़ और सुरक्षा मानकों की दिखी अनदेखी
मेले के अंदर भारी संख्या में लोग एकत्रित हैं, लेकिन इमरजेंसी निकास (एग्जिट गेट) की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। यदि कोई अप्रत्याशित घटना या भगदड़ होती है, तो लोगों का सुरक्षित बाहर निकलना लगभग असंभव होगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मेले की भीड़ इतनी अधिक है कि बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। इसके अलावा, मेले के दौरान सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है, जिससे बड़े हादसे का खतरा बना हुआ है।
सबसे बड़ी है पार्किंग और ट्रैफिक की समस्या
आयोजकों ने मेले के लिए पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं की है। इसके परिणामस्वरूप, लोग अपनी गाड़ियां और मोटरसाइकिलें मुख्य सड़क पर ही खड़ी कर रहे हैं। इससे करूला मार्ग पर लंबा जाम लग गया है।

भारी ट्रैफिक जाम के कारण आवश्यक सेवाओं जैसे एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड की आवाजाही प्रभावित हो रही है। यदि किसी आपात स्थिति में इन सेवाओं को तुरंत पहुँचने की आवश्यकता होती है, तो यह गंभीर खतरा बन सकता है।
स्थानीय निवासियों को हो रही परेशानी
रिहायशी क्षेत्र होने के कारण स्थानीय लोगों का सामान्य जीवन भी प्रभावित हो गया है। लोग अपने घरों से बाहर निकलने और बाजार जाने में भी परेशानी महसूस कर रहे हैं। इसके अलावा, बच्चों और बुजुर्गों के लिए सड़क पार करना भी जोखिमपूर्ण हो गया है।

स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया है कि इतने आबादी वाले इलाके में बिना क्राउड मैनेजमेंट प्लान के मेले की अनुमति कैसे दी गई? क्या आयोजकों ने फायर डिपार्टमेंट और पुलिस से एनओसी (NOC) प्राप्त की थी?
प्रशासन ने संज्ञान तो लिया लेकिन अभी तक कुछ नहीं
मुरादाबाद जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को इस मामले का तुरंत संज्ञान लेने की आवश्यकता है। जानकारों का मानना है कि आयोजकों को सख्त निर्देश जारी करने चाहिए और वे तुरंत पार्किंग और एग्जिट गेट की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

इसके साथ ही भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य होना चाहिए। आयोजकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी अप्रत्याशित घटना के समय लोगों की सुरक्षा पहले प्राथमिकता हो।
यह हैं सुरक्षा के उपाय और सुझाव
स्थानीय जानकारों के अनुसार, मेले में निम्नलिखित सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए:
1. एग्जिट गेट और इमरजेंसी निकास: हर बड़े मेले में अलग-अलग एग्जिट गेट होना आवश्यक है।
2. पार्किंग की स्पष्ट व्यवस्था: पार्किंग क्षेत्र निर्धारित किया जाए ताकि सड़क जाम न हो।
3. क्राउड मैनेजमेंट: भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिस और वॉलिंटियर की तैनाती हो।
4. आपातकालीन सेवाओं की सुविधा: एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड के मार्ग सुनिश्चित हों।
5. सूचना और चेतावनी बोर्ड: लोगों को सुरक्षा निर्देशों की जानकारी देने के लिए बोर्ड लगाए जाएं।
इन उपायों को अपनाने से मेले में भाग लेने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकती है और किसी भी अप्रिय घटना की संभावना कम हो जाएगी।

आयोजकों और प्रशासन की यह रही भूमिका
स्थानीय प्रशासन और समाज को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मेले का आयोजन सुरक्षा और नियमों के पालन के साथ हो। आयोजक केवल उत्सव आयोजित करने के लिए जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी उत्तरदायी हैं।
स्थानीय निवासी भी आयोजकों के साथ मिलकर सुझाव दे सकते हैं और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रख सकते हैं। इसके अलावा, मीडिया और नागरिक समाज की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। यह सुनिश्चित कर सकता है कि मेले के दौरान नियमों का पालन हो और कोई अनहोनी न हो।

क्या मेले के अंत तक जागरूक होगा प्रशासन
करूला मेला, जो लोगों के मनोरंजन और त्योहार का हिस्सा है, अब सुरक्षा और व्यवस्था की कमी के कारण चिंता का विषय बन गया है। यदि समय रहते प्रशासन और आयोजक उचित कदम नहीं उठाते हैं, तो किसी भी अप्रत्याशित घटना का खतरा बना रहेगा।
इसलिए, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। आयोजकों को निर्देश दिए जाने चाहिए कि वे पार्किंग, एग्जिट गेट और क्राउड मैनेजमेंट की व्यवस्था सुनिश्चित करें। इससे न केवल मेले में सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए यह उत्सव आनंददायक और सुरक्षित भी बन सकेगा।



