धर्म व ज्योतिष

आज है नवरात्रि की अष्टमी: जरूर करें मां महागौरी की पूजा, पढ़ें कथा और पूजन की विधि मिलेगा लाभ

रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा 

आज नवरात्रि का आठवां दिन यानी अष्टमी है, जिसे माँ दुर्गा के आठवें रूप महागौरी को समर्पित किया गया है। हिन्दू धर्म में अष्टमी का दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस दिन माँ महागौरी की उपासना से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और भक्तों के पाप नष्ट हो जाते हैं।

यह है माँ महागौरी की विशेषता और स्वरूप

माँ महागौरी, माँ दुर्गा के आठवें स्वरूप के रूप में जानी जाती हैं। उनका स्वरूप अत्यंत शुद्ध, शान्त और पवित्र है। उनके वर्ण का वर्णन शास्त्रों में गौर अर्थात सफेद रंग के रूप में किया गया है। उनके वस्त्र और आभूषण भी श्वेत हैं, जो उनके पवित्र और दिव्य रूप को प्रकट करते हैं।

माँ महागौरी की चार भुजाएं हैं। उनके ऊपर वाले दाहिने हाथ में अभय मुद्रा, नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल, ऊपर वाले बाएँ हाथ में डमरू और नीचे वाले बाएँ हाथ में वरमुद्रा है। उनके वाहन के रूप में वृषभ प्रतिष्ठित है। इस स्वरूप में माँ अत्यंत शांत और करुणामयी दिखाई देती हैं।

पढ़िए महागौरी की कथा

शास्त्रों के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठिन तपस्या की। इस दौरान देवी के शरीर का रंग तपस्या के प्रभाव से काला पड़ गया। परन्तु जब भगवान शिव ने पार्वती जी को देखा, तो उनकी छटा और ओजपूर्ण सौंदर्य देखकर वे अत्यंत प्रसन्न हुए।

भगवान शिव ने माता पार्वती के शरीर को गंगा जल से धोकर उन्हें गौर वर्ण प्रदान किया। तब से उन्हें महागौरी कहा जाता है। इस रूप में देवी करुणामयी, स्नेहमयी और शान्त दिखाई देती हैं।

देवी महागौरी की आराधना से न केवल भक्तों के पूर्वसंचित पाप नष्ट होते हैं, बल्कि भविष्य में दुःख, संताप और विपत्ति भी उनसे दूर रहती है। साधक इस उपासना से सभी प्रकार के पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी बनते हैं।

यह होता है अष्टमी पर महागौरी पूजा का महत्व

1. सर्वार्थ सिद्धि – माँ महागौरी की पूजा से जीवन के सभी कठिन कार्य सरल हो जाते हैं।
2. पापों का नाश – उपासना से भूतकाल के पाप नष्ट हो जाते हैं और भविष्य में भी पापों का आघात नहीं होता।
3. शांति और सुख – भक्तों के मन और जीवन में शांति, संतोष और सुख का प्रवाह होता है।
4. धन और समृद्धि – माँ की कृपा से आर्थिक और सामाजिक जीवन में समृद्धि आती है।

जरूर पढ़ें महागौरी पूजा की विधि

अष्टमी के दिन विशेष रूप से साफ-सफाई, शुद्धि और मन की शांति पर ध्यान देना चाहिए। पूजा में निम्नलिखित चीज़ें शामिल होती हैं:

* सफेद वस्त्र और फूल, विशेषकर कुंद और चंद्र जैसे फूल
* दूध, दही, शहद और तिल का प्रयोग
* माता महागौरी का मंत्र “सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोस्तुते” का जाप

पूजा के दौरान भक्तों को ध्यान रखना चाहिए कि उनकी भक्ति पूर्ण और समर्पित हो। इससे पूजा का प्रभाव और आशीर्वाद अधिक प्रबल होता है।

जानिए अष्टमी का सामाजिक और धार्मिक महत्व

अष्टमी न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी यह दिन विशेष है। पूरे भारत में नवरात्रि के दौरान माँ महागौरी की भव्य झांकियाँ और पूजा आयोजित की जाती हैं। यह पर्व न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा, करुणा और शांति का संदेश भी देता है।

आज के दिन माँ महागौरी की पूजा करने से जीवन में सभी बाधाओं का अंत होता है। भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और संतोष आता है। माता महागौरी की कथा हमें यह सिखाती है कि कठिन तपस्या और समर्पण से ही जीवन में श्रेष्ठ फल प्राप्त होते हैं।

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