कानपुर: पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 3200 करोड़ के फर्जीवाड़े का खुलासा, मास्टरमाइंड पप्पू छुरी गिरफ्तार

रिपोर्ट – शुभम शर्मा
कानपुर: कमिश्नर पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। कमिश्नरेट पुलिस ने 3200 करोड़ रुपये के कथित फर्जीवाड़े और हवाला नेटवर्क का खुलासा करते हुए गिरोह के सरगना महफूज अली उर्फ पप्पू छुरी को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई चकेरी पुलिस, साइबर सेल और सर्विलांस टीम के संयुक्त ऑपरेशन के तहत की गई है। फिलहाल पूरे नेटवर्क की गहन जांच जारी है।

जानिए कैसे हुआ खुलासा?
पुलिस जांच के अनुसार यह पूरा मामला जाजमऊ क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। आरोपी महफूज अली को उसी इलाके से गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वह कम पढ़े-लिखे मजदूरों के पैन कार्ड और अन्य दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी कंपनियां बनाता था।

इसके बाद इन कंपनियों और बैंक खातों के जरिए बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन को अंजाम दिया जाता था। पुलिस का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क स्क्रैप और स्लॉटर कारोबार से जुड़ी रकम को अवैध तरीके से कैश में बदलने का काम करता था।
68 बैंक खातों का चौंकाने वाला हुआ खुलासा
जांच में यह भी सामने आया है कि महफूज अली ने अपने परिवार के नाम पर करीब 68 बैंक खाते खुलवा रखे थे। इन्हीं खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये का लेन-देन किया गया।

पुलिस के अनुसार, सिर्फ “अफीसा इंटरप्राइजेज” नामक एक फर्म के जरिए लगभग 146 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ है। यह रकम विभिन्न व्यावसायिक लेन-देन के नाम पर घुमाई जाती थी और बाद में कमीशन लेकर नकद में वापस पहुंचाई जाती थी।

इसके साथ ही यह भी पाया गया कि यह पूरी व्यवस्था एक संगठित वित्तीय नेटवर्क की तरह काम कर रही थी, जिसमें कई लोग अलग-अलग भूमिकाओं में शामिल थे।
फर्जी जीएसटी फर्मों का भी हुआ खुलासा
जांच के दौरान पुलिस को एक और महत्वपूर्ण कड़ी हाथ लगी है। इसमें फिरोज खान नामक एक वकील की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। आरोप है कि वह फर्जी जीएसटी फर्में तैयार कराने में मदद करता था और पूरे नेटवर्क को कानूनी आवरण देने का प्रयास करता था।

पुलिस का मानना है कि इस नेटवर्क में और भी कई लोग शामिल हो सकते हैं, जिनकी पहचान की जा रही है। फिलहाल सभी वित्तीय दस्तावेजों और बैंक ट्रांजेक्शन की बारीकी से जांच की जा रही है।
पढ़िए क्या है आरोपी का आपराधिक इतिहास
पुलिस के मुताबिक, महफूज अली उर्फ पप्पू छुरी के खिलाफ पहले से ही 6 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें आर्थिक अपराध और धोखाधड़ी से जुड़े मामले शामिल हैं।

इसके बावजूद वह लंबे समय से इस नेटवर्क को संचालित कर रहा था। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे गिरोह की जड़ तक पहुंचा जा सके।
पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
इस मामले में चकेरी पुलिस, साइबर सेल और सर्विलांस टीम ने मिलकर रणनीति बनाई और तकनीकी निगरानी के आधार पर आरोपी तक पहुंच बनाई।

पुलिस आयुक्त के अनुसार, यह एक संगठित आर्थिक अपराध का बड़ा मामला है, जिसमें डिजिटल ट्रांजेक्शन और फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी और पूरे नेटवर्क को जल्द उजागर किया जाएगा।
पुलिस आयुक्त का बयान
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि यह मामला संगठित वित्तीय अपराध से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि पुलिस टीम लगातार जांच कर रही है और जिन लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि साइबर और आर्थिक अपराधों पर पुलिस की निगरानी लगातार मजबूत की जा रही है ताकि ऐसे नेटवर्क को समय रहते रोका जा सके।
आगे की जांच जारी
फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने के लिए बैंक खातों, कंपनियों के रिकॉर्ड और डिजिटल लेन-देन की जांच कर रही है। इसके अलावा, संदिग्ध लोगों की सूची तैयार की जा रही है और जल्द ही और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।

कानपुर में 3200 करोड़ रुपये के कथित फर्जीवाड़े का यह मामला आर्थिक अपराध की एक बड़ी मिसाल के रूप में सामने आया है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से जहां एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है, वहीं यह भी स्पष्ट हुआ है कि डिजिटल और फर्जी कंपनियों के माध्यम से कैसे बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियां की जा रही थीं।



