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संसद में गूंजी कानपुर के स्वाभिमान और अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी की आवाज – भारत रत्न देने की उठी मांग

रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा 

भारत के स्वतंत्रता संग्राम और पत्रकारिता जगत में अपने अद्वितीय योगदान के लिए प्रसिद्ध महान क्रांतिकारी और निर्भीक पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी को आखिरकार संसद में भारत रत्न देने की मांग उठाई गई है। यह ऐतिहासिक आवाज कानपुर के माननीय सांसद श्री रमेश अवस्थी द्वारा उठाई गई, जो कानपुरवासियों की लंबे समय से चली आ रही उम्मीदों को सशक्त रूप में प्रस्तुत करती है।

कानपुर के इस महान क्रांतिकारी की यादें न केवल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में बल्कि समाज के सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने में भी अमिट हैं। अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी ने पत्रकारिता को राष्ट्र सेवा का माध्यम बनाकर अपनी निस्वार्थ सेवा का परिचय दिया। उनके योगदान को सही सम्मान देने के लिए यह आवाज संसद में गूंजी, जो न केवल कानपुर के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है।

गणेश शंकर विद्यार्थी थे एक अमर पत्रकार और क्रांतिकारी

गणेश शंकर विद्यार्थी का जन्म कानपुर में हुआ था, और उनका नाम भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया और पत्रकारिता को देश सेवा के प्रमुख माध्यम के रूप में स्थापित किया। उनका यह मार्गदर्शन स्वतंत्रता संग्राम के योद्धाओं और पत्रकारों के लिए प्रेरणास्रोत बना।

विद्यापीठ की स्थापना, अपने पत्र ‘प्रताप’ के माध्यम से आम लोगों तक सच्चाई और न्याय की आवाज़ पहुंचाना, तथा सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देना उनकी महानता की पहचान है। उन्होंने उस समय के अंग्रेजी शासन के खिलाफ निरंतर संघर्ष किया, जिससे न केवल कानपुर बल्कि सम्पूर्ण भारत के लोग प्रेरित हुए।

सांसद रमेश अवस्थी ने संसद में उठाई मांग

कानपुर के सांसद श्री रमेश अवस्थी ने गणेश शंकर विद्यार्थी जी को भारत रत्न देने की संसद में यह मांग उठाई। यह मांग केवल कानपुर वासियों की नहीं, बल्कि पूरे देश की जनता की तरफ से उठाई गई है। श्री अवस्थी ने कहा कि यह समय है कि हम अपने महान स्वतंत्रता सेनानियों और पत्रकारों को उचित सम्मान दें और गणेश शंकर विद्यार्थी जी की योगदान को याद रखें।

सांसद रमेश अवस्थी जी ने यह भी कहा कि विद्यार्थी जी की स्मृतियों को संरक्षित करने के लिए एक भव्य स्मारक का निर्माण किया जाएगा। साथ ही, कानपुर के ऐतिहासिक प्रताप प्रेस की विरासत को भी संरक्षित किया जाएगा। यह दोनों कार्य इस महान व्यक्तित्व को सही सम्मान प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होंगे।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस कार्य को सांसद निधि से बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आने वाली पीढ़ियां भी उस महान व्यक्तित्व और उनके बलिदान को जान सकें। उनके योगदान को एक स्थायी रूप में आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इन शब्दों से हुई कानपुर के स्वाभिमान की गूंज

यह आवाज़ केवल एक मांग नहीं है, बल्कि यह कानपुर के स्वाभिमान और उसके गौरवशाली इतिहास का सम्मान है। गणेश शंकर विद्यार्थी जी का योगदान न केवल कानपुर के लिए, बल्कि देश के लिए अनमोल है। उनके संघर्ष और बलिदान ने हमें एक मजबूत राष्ट्र की दिशा में अग्रसर होने की प्रेरणा दी है।

विद्यार्थी जी की यह महान विरासत कानपुर के प्रत्येक नागरिक के दिल में बसी हुई है। यह कदम न केवल कानपुर वासियों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह सम्पूर्ण देश की भावनाओं का प्रतिनिधित्व भी करता है। आने वाली पीढ़ियां जब इस महान व्यक्तित्व के बारे में जानेंगी, तो यह उन्हें अपनी मातृभूमि के प्रति निष्ठा और संघर्ष का एहसास दिलाएगा।

एक स्थायी धरोहर के रूप में स्मारक का निर्माण – सांसद 

सांसद रमेश अवस्थी जी द्वारा उठाए गए इस कदम से गणेश शंकर विद्यार्थी जी की स्मृति को संरक्षित रखने के लिए एक भव्य स्मारक का निर्माण किया जाएगा। यह स्मारक उन असंख्य शहीदों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की याद दिलाएगा जिन्होंने अपनी जान की आहुति दी, ताकि हम स्वतंत्र और समृद्ध राष्ट्र में जीवन जी सकें।

स्मारक केवल विद्यार्थि जी के योगदान का प्रतीक नहीं होगा, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को यह बताने का जरिया बनेगा कि पत्रकारिता, स्वतंत्रता संग्राम और समाज सेवा के माध्यम से एक व्यक्ति किस तरह से राष्ट्र की सेवा कर सकता है।

भारतीय समाज में सांप्रदायिक सौहार्द को दिया था बढ़ावा

गणेश शंकर विद्यार्थी जी का योगदान केवल पत्रकारिता तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने भारतीय समाज में सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने का भी महान कार्य किया। उनकी यह आवाज आज भी हमारे दिलों में गूंजती है, और उनकी यादें भारतीय पत्रकारिता और स्वतंत्रता संग्राम के अनमोल धरोहर के रूप में जीवित रहेंगी।

सांसद रमेश अवस्थी जी द्वारा उठाई गई यह मांग न केवल गणेश शंकर विद्यार्थी जी के योगदान को सही सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह कानपुर के स्वाभिमान और गौरवशाली इतिहास का भी सम्मान है। आशा है कि यह पहल शीघ्र मूर्त रूप लेगी और कानपुरवासी गर्व से अपने महान अतीत को आगामी पीढ़ियों के सामने प्रस्तुत कर सकेंगे।

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