कानपुर: सिपाही आशीष शुक्ला बने कमर्शियल टैक्स ऑफिसर, 41वीं रैंक के साथ रचा प्रेरक इतिहास

रिपोर्ट – शुभम शर्मा
कानपुर: पुलिस कमिश्नरेट में तैनात एक सिपाही ने अपनी कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर प्रयास से वह मुकाम हासिल किया है, जो आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। कानपुर के सिपाही आशीष शुक्ला ने पुलिस की नौकरी के साथ-साथ पढ़ाई जारी रखी और वर्ष 2024 की प्रतियोगी परीक्षा में 41वीं रैंक हासिल कर कॉमर्शियल टैक्स ऑफिसर के पद पर चयनित हुए हैं।

उनकी इस उपलब्धि ने न केवल पुलिस विभाग बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। सफलता की खबर मिलते ही उन्होंने अपने सहकर्मियों को मिठाई खिलाकर खुशी साझा की।
अमेठी के छोटे से कस्बे से शुरू हुआ सफर
उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के शुक्ल बाजार जैसे छोटे से कस्बे से आने वाले आशीष शुक्ला का सफर संघर्ष और संकल्प से भरा रहा है। साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से संबंध रखने वाले आशीष ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय, अमेठी से पूरी की।

उन्होंने बताया कि उनके पिता लखनऊ विश्वविद्यालय से जुड़े एक मेधावी छात्र रहे थे, लेकिन अब वे इस दुनिया में नहीं हैं। पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी और भावनात्मक चुनौतियों के बीच उनकी मां ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने का हौसला दिया। यही पारिवारिक समर्थन उनके जीवन की सबसे बड़ी ताकत बना।
2018 बैच में बने पुलिस आरक्षी
आशीष शुक्ला ने वर्ष 2018 में पुलिस भर्ती परीक्षा पास की और कानपुर पुलिस कमिश्नरेट में आरक्षी (सिपाही) के पद पर नियुक्त हुए। सामान्यतः नौकरी लगने के बाद कई लोग अपनी पढ़ाई या बड़े लक्ष्य छोड़ देते हैं, लेकिन आशीष ने ऐसा नहीं किया।

उन्होंने स्पष्ट लक्ष्य तय किया कि वे प्रशासनिक सेवा में जाना चाहते हैं। इसलिए ड्यूटी के बाद बचा हुआ समय वे पढ़ाई को समर्पित करते रहे।

हालांकि पुलिस सेवा में ड्यूटी का समय निश्चित नहीं होता, फिर भी उन्होंने समय प्रबंधन को प्राथमिकता दी। रात में अध्ययन, अवकाश के दिनों में तैयारी और निरंतर अभ्यास के जरिए उन्होंने अपने लक्ष्य को जीवित रखा।
कठिन परिश्रम और अनुशासन बना सफलता की कुंजी
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी आसान नहीं होती। विशेषकर तब, जब व्यक्ति पूर्णकालिक नौकरी भी कर रहा हो। इसके बावजूद आशीष ने निरंतरता बनाए रखी। उन्होंने बताया कि सफलता का मूल मंत्र नियमित अध्ययन, सही मार्गदर्शन और आत्मविश्वास है।

साथ ही, उन्होंने ऑनलाइन संसाधनों और सीमित लेकिन सटीक अध्ययन सामग्री का उपयोग किया। धीरे-धीरे उनकी तैयारी मजबूत होती गई। अंततः वर्ष 2024 की परीक्षा में उन्होंने 41वीं रैंक हासिल कर सभी को चौंका दिया। इस उपलब्धि के साथ उनका चयन कमर्शियल टैक्स ऑफिसर के पद पर हुआ।
पुलिस विभाग का मिला पूरा सहयोग
आशीष शुक्ला ने अपनी सफलता का श्रेय केवल अपने परिवार को ही नहीं, बल्कि कानपुर पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारियों को भी दिया। उन्होंने कहा कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने विशेष रूप से डीसीपी एस. एम. कासिम आबिदी, एडीसीपी सुमित रामटेके और अन्य अधिकारियों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उनके प्रयासों की सराहना की और सकारात्मक वातावरण प्रदान किया।

दरअसल, किसी भी कर्मचारी के लिए यह महत्वपूर्ण होता है कि उसे अपने कार्यस्थल से सहयोग और प्रोत्साहन मिले। यही सहयोग आशीष के आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक रहा।
साथियों के बीच बांटी खुशी
जैसे ही चयन की आधिकारिक सूचना मिली, आशीष शुक्ला ने अपने पुलिस साथियों के साथ यह खुशी साझा की। उन्होंने मिठाई वितरित कर सभी का आशीर्वाद और शुभकामनाएं लीं।

उनके सहकर्मियों ने भी इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया। कई पुलिसकर्मियों ने कहा कि आशीष की सफलता यह साबित करती है कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।
युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत
आज आशीष शुक्ला की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उनकी यात्रा यह दर्शाती है कि कठिन परिस्थितियां भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनतीं, बल्कि वे व्यक्ति को और मजबूत बनाती हैं।

इसके अलावा, यह उदाहरण यह भी बताता है कि सरकारी सेवा में कार्यरत रहते हुए भी उच्च प्रशासनिक पदों तक पहुंचा जा सकता है, बशर्ते लक्ष्य स्पष्ट और प्रयास निरंतर हों।
समय प्रबंधन और सकारात्मक सोच का महत्व
आशीष की सफलता का एक महत्वपूर्ण पहलू उनका समय प्रबंधन रहा। उन्होंने ड्यूटी और पढ़ाई के बीच संतुलन स्थापित किया। इसके साथ ही, उन्होंने सकारात्मक सोच बनाए रखी। प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलता का डर सामान्य है।
लेकिन उन्होंने परिणाम की चिंता किए बिना प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित किया। यही कारण है कि वे अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे।

कानपुर के सिपाही आशीष शुक्ला की यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि यह संदेश भी है कि कड़ी मेहनत, अनुशासन और पारिवारिक समर्थन से कोई भी ऊंचाई प्राप्त की जा सकती है।
अमेठी के छोटे से कस्बे से निकलकर कानपुर पुलिस में सेवा और फिर 41वीं रैंक के साथ कमर्शियल टैक्स ऑफिसर बनना एक प्रेरक यात्रा है।
निश्चित रूप से, उनकी कहानी आने वाले समय में हजारों युवाओं को अपने सपनों की ओर कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित करती रहेगी।



