पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी: ‘नाम पूछकर मार दी थी गोली’, शहीद शुभम की पत्नी ऐशान्या का छलका दर्द

कानपुर/पहलगाम: 22 अप्रैल का वह काला दिन, जब खुशियों से भरा एक वैवाहिक जीवन चंद गोलियों की गूँज में हमेशा के लिए खामोश हो गया। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले को आज एक साल पूरा हो गया है। इस हमले में अपनी आँखों के सामने पति को खोने वाली कानपुर की ऐशान्या आज भी उस खौफनाक मंजर को याद कर सिहर उठती हैं।
शादी के दो महीने बाद ही उजड़ गया सुहाग
कानपुर के 30 वर्षीय शुभम द्विवेदी और ऐशान्या की शादी को महज दो महीने ही हुए थे। दोनों अपनी नई जिंदगी की शुरुआत की यादें संजोने कश्मीर की वादियों में गए थे। लेकिन 22 अप्रैल की उस मनहूस शाम ने सब कुछ बदल दिया। ऐशान्या बताती हैं कि आतंकियों ने शुभम का नाम और मजहब पूछा और फिर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं।

“शादी की सालगिरह हो या कोई त्योहार, अब सब कुछ बेमानी लगता है। 17 अप्रैल को जब हम घूमने निकले थे, तब हम कितने खुश थे… तस्वीरें आज भी उस खुशी की गवाही देती हैं, लेकिन 22 अप्रैल ने मेरा सब कुछ छीन लिया।” – ऐशान्या
परिवार बना ढाल, पिता की आँखों में आज भी नमी
इस मुश्किल घड़ी में शुभम के माता-पिता और ऐशान्या के परिवार ने उन्हें टूटने से बचाया। शुभम के पिता संजय द्विवेदी ने अपने दफ्तर में बेटे की तस्वीर लगाई है, जिसे देखकर ही वह अपने दिन की शुरुआत करते हैं। बेटे की याद में हर महीने गाँव में भोज आयोजित किया जाता है। परिवार का सिर्फ एक ही दुख है कि घर का चिराग बुझ गया, लेकिन गर्व है कि शुभम ने इस कायराना हमले का सामना किया।
‘जब तक आतंकवाद जिंदा, इंसाफ अधूरा’
ऐशान्या का मानना है कि असली इंसाफ तब होगा जब देश से आतंकवाद की जड़ें पूरी तरह खत्म हो जाएंगी। उन्होंने सरकार से मांग की है कि:
- इस हमले में जान गंवाने वाले नागरिकों को ‘शहीद’ का दर्जा दिया जाए।
- आतंकवाद के खिलाफ ऐसी निर्णायक कार्रवाई हो कि कोई और ‘ऐशान्या’ अपना सुहाग न खोए।



