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ईरान संकट के बीच LPG आपूर्ति पर असर की आशंका, सरकार ने PNG उपयोग बढ़ाने के दिए निर्देश

रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा

लखनऊ: अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में जारी ईरान से जुड़े तनाव के बीच देश में एलपीजी (LPG) आपूर्ति को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। हालांकि फिलहाल किसी प्रकार की तत्काल कमी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी केंद्र सरकार ने एहतियातन कदम उठाते हुए पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के उपयोग को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में जिन क्षेत्रों में पीएनजी नेटवर्क उपलब्ध है, वहां उपभोक्ताओं को एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

केंद्र सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा 24 मार्च को जारी अधिसूचना के बाद राज्य स्तर पर भी विभाग सक्रिय हो गए हैं। उत्तर प्रदेश में खाद्य एवं रसद विभाग ने इस संबंध में नई सूचना जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि जिन शहरी इलाकों में पीएनजी नेटवर्क पहले से उपलब्ध है, वहां दोहरी गैस व्यवस्था (LPG और PNG दोनों) अब संभव नहीं होगी।

पीएनजी को प्राथमिकता देने की बनाई गई है रणनीति

सरकार का कहना है कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए ऊर्जा संसाधनों का संतुलित और सुव्यवस्थित उपयोग आवश्यक है। ऐसे में जिन उपभोक्ताओं को घर पर पाइप्ड नेचुरल गैस की सुविधा मिल रही है, उन्हें एलपीजी सिलेंडर पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है।

दरअसल, पीएनजी की आपूर्ति पाइप लाइन के माध्यम से सीधे घरों तक होती है, जिससे सिलेंडर वितरण और भंडारण की जटिलताएं कम हो जाती हैं। इसके अतिरिक्त, सरकार का दावा है कि देश में घरेलू पीएनजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और इसकी 24×7 आपूर्ति जारी है। इसलिए उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की घबराहट की जरूरत नहीं है।

तीन महीने की है समयसीमा, उसके बाद बंद होगी एलपीजी सप्लाई

नई व्यवस्था के तहत जिन उपभोक्ताओं के पास पहले से पीएनजी कनेक्शन है, उन्हें तीन महीने के भीतर अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा। अन्यथा निर्धारित समय सीमा के बाद उनके एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति स्वतः बंद की जा सकती है।

सीजीडी (City Gas Distribution) कंपनियां संबंधित उपभोक्ताओं को नोटिस भेज रही हैं और उन्हें नियमों की जानकारी दे रही हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह कदम पूरी तरह प्रशासनिक और संसाधन प्रबंधन से जुड़ा है, न कि किसी तात्कालिक संकट की स्थिति से।

जानिए मुख्य सचिव के सख्त निर्देश

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि अधिसूचना का पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही यह भी कहा गया है कि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए।

इसके अतिरिक्त, जिला स्तरीय अधिकारियों को निगरानी और जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि लोगों को नियमों की सही जानकारी मिल सके और भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।

यूपी में तेजी से बिछ रही पाइप लाइन

राज्य सरकार के अनुसार उत्तर प्रदेश में शहरी क्षेत्रों में तेजी से पीएनजी पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 2000 नए पीएनजी कनेक्शन जारी किए जा रहे हैं।

इस कदम से न केवल एलपीजी पर निर्भरता कम होगी, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह लाभकारी साबित होगा। पीएनजी को अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन माना जाता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आती है।

पढ़िए उपभोक्ताओं के लिए क्या हैं विकल्प?

जानकारों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में पीएनजी उपलब्ध है, वहां उपभोक्ताओं के लिए यह अधिक सुविधाजनक विकल्प है। इसमें सिलेंडर बुकिंग, डिलीवरी या स्टोरेज की चिंता नहीं रहती। हालांकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में जहां अभी पीएनजी नेटवर्क नहीं पहुंचा है, वहां एलपीजी आपूर्ति पूर्ववत जारी रहेगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय केवल उन्हीं इलाकों पर लागू होगा जहां पीएनजी नेटवर्क सक्रिय है। इसलिए जिन उपभोक्ताओं के क्षेत्र में यह सुविधा नहीं है, उन्हें किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

घबराने की जरूरत नहीं

विभागीय अधिकारियों ने यह भी दोहराया है कि देश में गैस आपूर्ति को लेकर कोई तत्काल आपात स्थिति नहीं है। बल्कि यह एक दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत ऊर्जा संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है।

इसके अलावा, उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए संबंधित गैस एजेंसी या सीजीडी कंपनी से संपर्क किया जा सकता है।

समग्र रूप से देखा जाए तो ईरान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के मद्देनजर सरकार ने एहतियाती कदम उठाए हैं। पीएनजी उपयोग को बढ़ावा देने की यह पहल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

हालांकि बदलाव से कुछ उपभोक्ताओं को प्रारंभिक असुविधा हो सकती है, फिर भी दीर्घकाल में यह व्यवस्था अधिक सुविधाजनक और व्यवस्थित साबित हो सकती है। सरकार और विभागों का कहना है कि सभी कदम उपभोक्ताओं के हित और राष्ट्रीय संसाधनों के संतुलित उपयोग को ध्यान में रखकर उठाए जा रहे हैं।

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