कानपुर: जनगणना 2027 की तैयारी के बीच दिव्यांग कार्मिकों का जज्बा बना मिसाल – जानिए क्यों?

रिपोर्ट – विवेक कृष्ण दीक्षित
कानपुर: नगर में जनगणना 2027 की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। प्रशासनिक स्तर पर जहां प्रशिक्षण, क्षेत्र आवंटन और कार्मिकों की तैनाती की प्रक्रिया चल रही है, वहीं दूसरी ओर जिलाधिकारी कार्यालय में ड्यूटी से छूट के लिए भी बड़ी संख्या में आवेदन पहुंच रहे हैं। हालांकि, इसी माहौल में कुछ ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जिन्होंने कर्तव्यनिष्ठा और सेवा भावना की नई मिसाल पेश की है।

दरअसल, कई कार्मिक व्यक्तिगत कारणों या अन्य दलीलों के आधार पर ड्यूटी कटवाने का अनुरोध कर रहे हैं। इसके विपरीत, कुछ दिव्यांग कार्मिकों ने अपनी शारीरिक चुनौतियों के बावजूद जनगणना जैसे राष्ट्रीय दायित्व को निभाने की प्रतिबद्धता दिखाई है।
विजय बहादुर: जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटे
पं. जवाहर लाल नेहरू इंटर कॉलेज, जामू में तैनात सहायक अध्यापक विजय बहादुर 80 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता की श्रेणी में आते हैं। वे एक पैर से पोलियो प्रभावित हैं। जनगणना 2027 के तहत उनकी ड्यूटी जोन-1 में प्रगणक के रूप में लगाई गई है।

नियमों के अनुसार वे ड्यूटी से छूट पाने के पात्र हैं और उन्होंने औपचारिक रूप से आवेदन भी प्रस्तुत किया। हालांकि, उनका दृष्टिकोण अन्य आवेदनों से अलग रहा। वर्ष 2011 की जनगणना में भी अपनी भूमिका निभा चुके विजय बहादुर इस बार भी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं।

उनका मानना है कि जनगणना देश की विकास योजनाओं की आधारशिला है। आंकड़ों के आधार पर ही शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की नीति तैयार होती है। इसलिए, हर कार्मिक का योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने अन्य कर्मचारियों से भी आह्वान किया कि वे व्यक्तिगत कारणों से ऊपर उठकर इस राष्ट्रीय कार्य में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
जयप्रकाश शर्मा: कृत्रिम पैर के बावजूद सेवा को प्राथमिकता
इसी क्रम में हरजिंदर नगर इंटर कॉलेज में तैनात सहायक अध्यापक जयप्रकाश शर्मा का जज्बा भी उल्लेखनीय है। वे कृत्रिम पैर के सहारे चलते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने जनगणना ड्यूटी को प्राथमिकता दी।

जयप्रकाश शर्मा का कहना है कि शारीरिक सीमाएं कर्तव्य पालन में बाधा नहीं बननी चाहिए। यदि प्रशासनिक सहयोग मिले तो हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुरूप योगदान दे सकता है। उनका यह दृष्टिकोण अन्य कार्मिकों के लिए प्रेरणास्रोत बन रहा है।
मधु सिंह: समाधान की राह चुनी
प्राथमिक विद्यालय सदिकामऊ, शिवराजपुर में कार्यरत शिक्षा मित्र मधु सिंह का मामला भी प्रेरक है। वे दाहिने पैर से दिव्यांग हैं। उन्होंने ड्यूटी हटाने के बजाय उसे सुगम बनाने का विकल्प चुना।

मधु सिंह ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया कि उनकी ड्यूटी निवास के निकटवर्ती क्षेत्र में लगा दी जाए, ताकि वे बिना अतिरिक्त कठिनाई के कार्य कर सकें। प्रशासन ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उनकी ड्यूटी को जोन-1 से हटाकर उनके घर के पास निर्धारित कर दिया। इस प्रकार, उन्होंने जिम्मेदारी निभाने की इच्छा को प्राथमिकता दी और प्रशासन ने सहयोग देकर व्यवस्था को संतुलित रखा।
ड्यूटी कटवाने के बढ़ते आवेदन
जनगणना जैसे बड़े अभियान में हजारों कार्मिकों की तैनाती होती है। हालांकि, इस बार जिलाधिकारी कार्यालय में ड्यूटी कटवाने के लिए बड़ी संख्या में आवेदन पहुंच रहे हैं। कोई स्वास्थ्य कारण बता रहा है, तो कोई पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला दे रहा है।

ऐसे में दिव्यांग कार्मिकों का सकारात्मक रुख एक स्पष्ट संदेश देता है कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, कर्तव्य से विमुख होना समाधान नहीं है। बल्कि, संवाद और समन्वय के माध्यम से व्यावहारिक रास्ता निकाला जा सकता है।
प्रशासन की भूमिका और दृष्टिकोण
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने इन कार्मिकों के जज्बे की सराहना की है। उन्होंने कहा कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में इनकी प्रतिबद्धता अन्य लोगों के लिए प्रेरणादायक है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जहां आवश्यक होगा, वहां प्रशासन मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कार्मिकों को सहयोग देगा। लेकिन साथ ही, जिम्मेदारी निभाने की भावना ही व्यवस्था को मजबूत बनाती है।
जनगणना का महत्व
जनगणना केवल जनसंख्या की गिनती भर नहीं है, बल्कि यह देश की सामाजिक-आर्थिक संरचना का व्यापक आकलन है। इसके आंकड़ों के आधार पर सरकार विभिन्न योजनाएं बनाती है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े निर्णय इसी डेटा पर निर्भर करते हैं।

इसलिए, जनगणना 2027 में दिव्यांग कार्मिकों की भूमिका केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि राष्ट्रीय निर्माण में सहभागिता का प्रतीक भी है।
समाज के लिए प्रेरक संदेश
रोजाना आ रहे आवेदनों के बीच विजय बहादुर, जयप्रकाश शर्मा और मधु सिंह जैसे उदाहरण यह दर्शाते हैं कि सकारात्मक सोच और कर्तव्य भावना किसी भी चुनौती से बड़ी होती है। जहां कुछ लोग कारण ढूंढ रहे हैं, वहीं कुछ लोग जिम्मेदारी निभाने के लिए आगे आ रहे हैं। यह अंतर ही समाज को दिशा देता है।

अंततः, जनगणना 2027 में दिव्यांग कार्मिकों की भूमिका यह सिद्ध करती है कि सेवा भावना और प्रतिबद्धता ही किसी भी व्यवस्था की वास्तविक ताकत होती है। कानपुर नगर में सामने आए ये उदाहरण न केवल प्रशासन के लिए बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणादायक हैं।



