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कानपुर: गुमशुदा युवक की हत्या कर गंगा में फेंका गया था शव – तीन आरोपी गिरफ्तार

रिपोर्ट – शुभम शर्मा 

कानपुर: चकेरी थाना क्षेत्र में गुमशुदा हुए एक युवक की हत्या के मामले का पुलिस ने सफल खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने युवक के बैंक खाते में धनराशि होने की जानकारी के आधार पर सुनियोजित साजिश रची और घटना को अंजाम दिया।

यह मामला पिछले कुछ दिनों से चर्चा में था। हालांकि पुलिस ने व्यवस्थित जांच, तकनीकी साक्ष्यों और सर्विलांस की मदद से घटना की कड़ियों को जोड़ा और आरोपियों तक पहुंच बनाई।

गुमशुदगी से हत्या तक: जानिए कैसे शुरू हुआ मामला?

जानकारी के अनुसार, 17 अप्रैल 2026 को थाना चकेरी में विष्णुचंद्र त्रिवेदी ने अपने पुत्र अंकित त्रिवेदी (37 वर्ष) की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। अंकित त्रिवेदी बाराबंकी जिले के सिधौर ब्लॉक स्थित प्राथमिक चिकित्सालय में वार्ड ब्वाय के पद पर कार्यरत थे।

परिजनों के अनुसार, 16 अप्रैल की शाम लगभग 6:20 बजे उन्हें एक फोन कॉल आया। कॉल के बाद उन्होंने मलवा (फतेहपुर) जाने की बात कही और अपनी स्विफ्ट डिजायर कार से घर से निकल गए। इसके बाद उनका मोबाइल फोन बंद हो गया और परिवार का उनसे संपर्क टूट गया। परिवार ने पहले अपने स्तर पर खोजबीन की, लेकिन जब कोई जानकारी नहीं मिली तो पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

जांच में मिले महत्वपूर्ण सुराग

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की। सबसे पहले अंकित की कार की तलाश की गई। जांच के दौरान उनकी कार फतेहपुर जिले के हथगांव थाना क्षेत्र के ग्राम पट्टीशाह के पास लावारिस हालत में मिली।

इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले, मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) का विश्लेषण किया और सर्विलांस की मदद ली। धीरे-धीरे संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान सामने आई।

इसी क्रम में पुलिस को पता चला कि अंकित के परिचित सत्यम मिश्रा ने उनके बैंक खाते में धनराशि होने की जानकारी कुछ अन्य युवकों को दी थी। यहीं से पुलिस को घटना की साजिश का सुराग मिला।

योजना बनाकर दिया गया वारदात को अंजाम

पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि अंकित को शादी में कार बुकिंग का झांसा देकर रामादेवी चौराहे के पास बुलाया गया था। वहां से रेहान, शादाब और अल्तमस कार में सवार हो गए, जबकि सत्यम मिश्रा बाइक से पीछे-पीछे चल रहा था।

इसके बाद फतेहपुर जिले के हथगांव क्षेत्र में एक सुनसान स्थान पर कार रुकवाई गई। आरोप है कि इसी दौरान अंकित का मोबाइल छीनने का प्रयास किया गया। जब उन्होंने विरोध किया, तो स्थिति बिगड़ गई और उनकी हत्या कर दी गई।

घटना के बाद आरोपियों ने शव को वाहन में रखा और बाद में नौबस्ता क्षेत्र के गंगा पुल से नदी में फेंक दिया। इसके साथ ही मोबाइल फोन भी नदी में बहा दिया गया ताकि कोई डिजिटल साक्ष्य न बचे। हालांकि कार का पेट्रोल समाप्त हो जाने के कारण उसे ग्राम शाहपट्टी में छोड़ना पड़ा। इसके बाद आरोपी ई-रिक्शा और ट्रेन से मुंबई की ओर रवाना हो गए।

इस तरह से रही पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी

लगातार तकनीकी निगरानी और स्थानीय इनपुट के आधार पर पुलिस ने 2 मई को काशीराम कॉलोनी के निकट गोल चौराहे से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में शामिल हैं:

1. रेहान (20 वर्ष), पुत्र रमजान
2. शादाब (22 वर्ष), पुत्र मो. इकबाल
3. अल्तमस अहमद (23 वर्ष), पुत्र अंसार अली

तीनों फतेहपुर जिले के ग्राम दिदौली जलालपुर के निवासी बताए गए हैं। पुलिस के अनुसार, मुख्य साजिशकर्ता सत्यम मिश्रा (निवासी उन्नाव) और घटना में सहयोग करने वाली एक महिला अफसाना की तलाश जारी है। पुलिस टीम संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

तकनीकी साक्ष्य बने निर्णायक

इस मामले में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल और सर्विलांस ने अहम भूमिका निभाई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यदि तकनीकी साक्ष्य न मिलते तो आरोपियों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो सकता था।

इसके अलावा, आरोपियों के भागने के बाद उनके यात्रा मार्ग और संपर्कों की निगरानी की गई। अंततः पुलिस को उनके कानपुर लौटने की सूचना मिली, जिसके आधार पर गिरफ्तारी संभव हो सकी।

सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मामला

यह घटना केवल एक आपराधिक वारदात नहीं है, बल्कि यह भरोसे के दुरुपयोग का उदाहरण भी है। परिचितों द्वारा दी गई जानकारी का गलत इस्तेमाल कर अपराध को अंजाम दिया गया।

कानून विशेषज्ञों का मानना है कि निजी वित्तीय जानकारी को साझा करते समय सावधानी बरतना आवश्यक है। डिजिटल युग में बैंक खाते, लेनदेन और व्यक्तिगत विवरण की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है।

जानिए आगे की कानूनी प्रक्रिया

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित की गई है।

जांच अभी जारी है और पुलिस अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि घटना में कोई और व्यक्ति शामिल तो नहीं था।

कानपुर गुमशुदा युवक हत्या मामला पुलिस की सक्रियता और तकनीकी जांच के कारण सुलझ पाया। हालांकि यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है कि व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा और सतर्कता कितनी आवश्यक है।

पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं। मामले में आगे की कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत जारी रहेगी।

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