वाराणसी: शिक्षा में भ्रष्टाचार के खिलाफ ABVP का प्रदर्शन, प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर सख्त कार्रवाई की मांग

रिपोर्ट – धर्मेंद्र पांडेय
वाराणसी: शिक्षा के बाजारीकरण और प्राइवेट स्कूलों की कथित मनमानी के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को वाराणसी में जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया। इसके साथ ही परिषद के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम एक ज्ञापन सौंपकर प्रदेश सरकार से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान छात्र-छात्राओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश में शिक्षा का क्षेत्र तेजी से व्यावसायिक स्वरूप लेता जा रहा है। उनका कहना था कि शिक्षा, जो मूलतः समाज सेवा का माध्यम होनी चाहिए, वह कई स्थानों पर व्यापार का रूप ले चुकी है। इस कारण आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को उनके अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है।
25 प्रतिशत आरक्षण के क्रियान्वयन पर उठे सवाल
परिषद के कार्यकर्ताओं ने विशेष रूप से प्राइवेट स्कूलों में गरीब और वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के लिए निर्धारित 25 प्रतिशत आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि इस प्रावधान का लाभ वास्तविक पात्र बच्चों तक नहीं पहुंच पा रहा है।

छात्र नेताओं के अनुसार, प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी, दस्तावेजी जटिलताएं और कथित बिचौलियों की भूमिका के कारण जरूरतमंद परिवारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कई अभिभावक जानकारी के अभाव में या प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जटिलता के कारण अपने बच्चों का दाखिला नहीं करा पाते।
एडमिशन प्रक्रिया में पारदर्शिता की रखी मांग
ABVP पदाधिकारियों ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की कि सभी निजी विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने यह भी कहा कि दाखिले की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और सार्वजनिक निगरानी के दायरे में लाई जानी चाहिए, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न रहे।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि प्रवेश सूची, चयन मानदंड और सीटों की स्थिति सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध हो, तो अभिभावकों को स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। इससे अनावश्यक भ्रम और शिकायतों में भी कमी आएगी।
मनमानी फीस वसूली पर जताई नाराजगी
प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि कई विद्यालयों में अभिभावकों से मनमानी फीस वसूली की जा रही है। हालांकि, उन्होंने किसी विशेष विद्यालय का नाम नहीं लिया, लेकिन यह जरूर कहा कि फीस संरचना को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश और नियमित निगरानी की आवश्यकता है।

उनका तर्क था कि शिक्षा का उद्देश्य समाज में समान अवसर प्रदान करना है। इसलिए यदि फीस संरचना अत्यधिक होगी, तो कमजोर वर्ग के छात्र गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित रह जाएंगे। इस संदर्भ में परिषद ने सरकार से अनुरोध किया कि वह फीस निर्धारण और वृद्धि के लिए प्रभावी नियंत्रण तंत्र विकसित करे।
बिचौलियों और कथित सिंडिकेट पर कार्रवाई की उठाई मांग
ABVP कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर प्रवेश प्रक्रिया के दौरान बिचौलियों की सक्रियता देखी जाती है। उन्होंने मांग की कि ऐसे तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

परिषद का कहना था कि यदि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाती है, तो न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, बल्कि छात्रों और अभिभावकों का विश्वास भी मजबूत होगा। इसके अलावा, उन्होंने प्रशासन से नियमित निरीक्षण और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने की अपील की।
अंत में प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
धरना-प्रदर्शन के बाद परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि राज्य स्तर पर एक उच्च स्तरीय समिति गठित कर निजी विद्यालयों में आरक्षण, फीस संरचना और प्रवेश प्रक्रिया की समीक्षा की जाए।

इसके साथ ही, परिषद ने यह भी सुझाव दिया कि शिकायतों के निस्तारण के लिए जिला स्तर पर एक विशेष प्रकोष्ठ बनाया जाए, जहां अभिभावक अपनी समस्याएं दर्ज करा सकें और समयबद्ध समाधान प्राप्त कर सकें।
आंदोलन को व्यापक बनाने की दी चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान छात्र नेताओं ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी संस्था विशेष को लक्ष्य बनाना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार सुनिश्चित करना है।

उनका कहना था कि सकारात्मक संवाद और नीतिगत सुधार के माध्यम से ही स्थायी समाधान संभव है। इसलिए वे सरकार से अपेक्षा करते हैं कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए ठोस कदम उठाए।
शिक्षा सुधार पर व्यापक बहस की आवश्यकता
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता, समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उपलब्धता सुनिश्चित करना समय की मांग है। शिक्षा केवल व्यक्तिगत उन्नति का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास की आधारशिला भी है।

ऐसे में, यदि आरक्षण प्रावधानों का सही क्रियान्वयन, फीस नियंत्रण और प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती है, तो इससे शिक्षा प्रणाली में विश्वास और स्थिरता बढ़ेगी।

वाराणसी में शिक्षा में भ्रष्टाचार के खिलाफ ABVP प्रदर्शन ने एक बार फिर निजी विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया और फीस संरचना को लेकर चल रही बहस को केंद्र में ला दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और राज्य सरकार इस ज्ञापन पर क्या कदम उठाती है।

हालांकि, यह स्पष्ट है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता की दिशा में ठोस पहल की आवश्यकता है, ताकि प्रत्येक बच्चे को उसके अधिकार के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।



