कानपुर: पक्का प्रेस में किरायेदारों से जबरन वसूली के आरोप, कमिश्नरेट में सौंपा गया ज्ञापन

रिपोर्ट – शुभम शर्मा
कानपुर: शहर के कोपरगंज स्थित पक्का प्रेस परिसर में किरायेदारों और भवन स्वामी पक्ष के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है। किरायेदारों ने किराए के नाम पर कथित जबरन वसूली, गोदामों पर कब्जे के प्रयास और धमकी दिए जाने के आरोप लगाते हुए पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय में ज्ञापन सौंपा है। इस मामले ने न केवल व्यापारिक समुदाय में चिंता बढ़ाई है, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी सक्रियता की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

कमिश्नरेट में पहुंचा मामला
पक्का प्रेस टेनेंट्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने पुलिस आयुक्त को संबोधित ज्ञापन में आरोप लगाया कि भवन स्वामी के कथित वारिस श्री अद्वैतपत सिंघानिया अपने सहयोगियों के साथ किरायेदारों पर दबाव बना रहे हैं। एसोसिएशन का कहना है कि किरायेदारों को धमकाकर अवैध रूप से धन की मांग की जा रही है तथा कुछ गोदामों का ताला बदलने की कोशिश की गई।

हालांकि, भवन स्वामी पक्ष की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी जा रही है।
गृहकर बकाया और सीलिंग की पृष्ठभूमि
एसोसिएशन के अनुसार, पक्का प्रेस परिसर पर नगर निगम का लगभग 2.20 करोड़ रुपये का गृहकर बकाया था। इसके चलते करीब 90 दुकानें और गोदाम सील कर दिए गए थे। इस स्थिति से व्यापार ठप होने की आशंका के मद्देनजर किरायेदारों ने सामूहिक रूप से पहल की और एक वर्ष का अग्रिम किराया जमा कर सील हटवाई।

इसके बाद नगर निगम ने नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा 179 के तहत किराया कुर्क करते हुए वर्ष 2027 तक का अग्रिम किराया बकाया गृहकर में समायोजित करने का निर्देश दिया। किरायेदारों का दावा है कि उन्होंने प्रशासन के निर्देशों का पालन किया और निर्धारित राशि जमा कर दी।
समायोजन को लेकर हुआ था विवाद
किरायेदारों का आरोप है कि जमा की गई राशि को नियमित किराए में समायोजित नहीं किया जा रहा है। साथ ही, उन पर अलग से किराया देने का दबाव बनाया जा रहा है। एसोसिएशन का कहना है कि इससे दोहरी आर्थिक मार पड़ रही है और छोटे व्यापारियों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है।

इसके अतिरिक्त, एसोसिएशन ने दावा किया कि कुछ किरायेदारों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराने की चेतावनी भी दी जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
8 मई की घटना का किया उल्लेख
ज्ञापन में 8 मई 2026 की एक घटना का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। एसोसिएशन के अनुसार, दोपहर लगभग 12 बजे कुछ लोग गोदाम संख्या 48 पर पहुंचे और वहां मौजूद किरायेदार श्री वरुण तकियार के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया। आरोप है कि ताला बदलने का प्रयास भी किया गया।

इस घटना की सूचना 9 मई को थाना अनवरगंज में दी गई। हालांकि, किरायेदारों का कहना है कि अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं पुलिस सूत्रों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पढ़िए एसोसिएशन की मांगें
पक्का प्रेस टेनेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री पी.डी. अग्रवाल ने पुलिस आयुक्त से तीन प्रमुख मांगें की हैं—
- कथित रूप से शामिल व्यक्तियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
- किरायेदारों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- सक्षम न्यायालय के आदेश के बिना किसी भी किरायेदार को जबरन बेदखल न किया जाए।
एसोसिएशन का कहना है कि वे कानून का सम्मान करते हैं और न्यायालय के निर्णय को स्वीकार करेंगे, लेकिन दबाव की राजनीति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

व्यापारियों ने जताई चिंता
इस पूरे घटनाक्रम के बाद परिसर में काम करने वाले व्यापारियों और कर्मचारियों के बीच चिंता का माहौल है। कई दुकानदारों का कहना है कि यदि विवाद जल्द सुलझा नहीं, तो व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। दूसरी ओर, कुछ लोगों का मानना है कि प्रशासनिक हस्तक्षेप से स्थिति सामान्य हो सकती है।

दरअसल, पक्का प्रेस परिसर लंबे समय से शहर के व्यावसायिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। इसलिए यहां उत्पन्न विवाद का असर व्यापक स्तर पर महसूस किया जा रहा है।
जानिए कानूनी प्रक्रिया की अहमियत
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शी और समयबद्ध जांच आवश्यक है। यदि किसी पक्ष को शिकायत है, तो उसे न्यायालय या सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से समाधान तलाशना चाहिए। साथ ही, प्रशासन की जिम्मेदारी है कि दोनों पक्षों को सुनकर निष्पक्ष निर्णय सुनिश्चित करे।

कानूनी जानकारों के अनुसार, नगर निगम द्वारा की गई कुर्की और अग्रिम किराया जमा करने की प्रक्रिया का दस्तावेजी सत्यापन महत्वपूर्ण होगा। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि समायोजन को लेकर वास्तविक स्थिति क्या है।
यह है प्रशासन की भूमिका
पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय ने ज्ञापन प्राप्त कर मामले की जांच का आश्वासन दिया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित धाराओं में कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि आरोप निराधार साबित होते हैं, तो भी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और भ्रम की स्थिति समाप्त होगी।

कानपुर के पक्का प्रेस परिसर में उत्पन्न यह विवाद प्रशासन, किरायेदारों और भवन स्वामी पक्ष—तीनों के लिए एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है। जहां एक ओर किरायेदार सुरक्षा और आर्थिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कानूनी प्रक्रिया का पालन भी उतना ही आवश्यक है।



