वाराणसी: फर्जी कॉल सेंटर का हुआ भंडाफोड़: नौकरी के नाम पर 250 युवकों से की ठगी, 6 हिरासत में

रिपोर्ट – धर्मेंद्र पांडेय
वाराणसी: नौकरी की तलाश में भटक रहे बेरोजगार युवकों को सुनहरे भविष्य का सपना दिखाकर ठगी करने वाले एक बड़े फर्जी कॉल सेंटर और मल्टीलेवल मार्केटिंग सिंडीकेट का सारनाथ पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मौके से छह लोगों को हिरासत में लिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह अब तक करीब 250 युवकों को अपना शिकार बना चुका है।

यह कार्रवाई डीसीपी वरुणा प्रमोद कुमार के निर्देशन में एसीपी सारनाथ विदुष सक्सेना और थाना प्रभारी पंकज त्रिपाठी की टीम द्वारा की गई। पुलिस को पिछले कई दिनों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ लोग नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से मोटी रकम वसूल रहे हैं। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मामले की गोपनीय जांच शुरू की।
शिकायतों से शुरू हुई जांच
दरअसल, कई युवकों ने पुलिस से संपर्क कर बताया कि उनसे नौकरी के रजिस्ट्रेशन और प्लेसमेंट के नाम पर 25 से 30 हजार रुपये तक लिए गए, लेकिन उन्हें न तो कोई नियुक्ति पत्र मिला और न ही किसी कंपनी में जॉइनिंग। शुरुआत में आरोपियों ने भरोसा जीतने के लिए आकर्षक पैकेज, नामी कंपनियों में नियुक्ति और जल्द जॉइनिंग का आश्वासन दिया।

हालांकि, जब तय समय पर नौकरी नहीं मिली तो युवकों को संदेह हुआ। इसके बाद कुछ पीड़ितों ने एक-दूसरे से संपर्क किया और मामला पुलिस तक पहुंचा। पुलिस ने जब तथ्यों की पुष्टि की, तो यह स्पष्ट हुआ कि यह एक सुनियोजित ठगी का नेटवर्क है।
जानिए फर्जी कॉल सेंटर और एमएलएम का जाल
जांच में सामने आया कि आरोपी एक फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर रहे थे। इसके अलावा, उन्होंने मल्टीलेवल मार्केटिंग कंपनी के नाम पर भी एक ढांचा तैयार कर रखा था। इसी के माध्यम से वे बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण, इंटरव्यू और प्लेसमेंट का झांसा देते थे।

पहले चरण में युवकों से रजिस्ट्रेशन शुल्क लिया जाता था। इसके बाद उन्हें तथाकथित “ऑफिस” बुलाकर औपचारिक प्रक्रिया का दिखावा किया जाता था। कुछ मामलों में तो युवकों को प्रशिक्षण सत्र भी कराए गए, जिससे उन्हें यह विश्वास हो सके कि कंपनी वास्तविक है।

लेकिन वास्तव में यह पूरा सेटअप केवल पैसे वसूलने के लिए तैयार किया गया था। जैसे ही पर्याप्त रकम इकट्ठा हो जाती, युवकों को टालमटोल जवाब देकर संपर्क कम कर दिया जाता था।
अब तक का खुलासा – 250 से अधिक युवक बने शिकार
पुलिस के अनुसार, अब तक की जांच में लगभग 250 युवकों के इस गिरोह का शिकार होने की बात सामने आई है। इनमें अधिकांश युवक पश्चिम उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न जिलों से जुड़े बताए जा रहे हैं।

आरोपी सोशल मीडिया, ऑनलाइन विज्ञापनों और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से युवाओं तक पहुंचते थे। बड़े पैकेज और प्रतिष्ठित कंपनियों में नौकरी का दावा कर उन्हें वाराणसी बुलाया जाता था। चूंकि कई युवक आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से थे, इसलिए वे बेहतर भविष्य की उम्मीद में अपनी बचत या उधार लेकर रकम जमा कर देते थे।
पुलिस ने की संयुक्त कार्रवाई
जैसे ही पर्याप्त सबूत जुट गए, सारनाथ पुलिस और साइबर सेल की टीम ने संयुक्त छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान मौके से छह लोगों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने कंप्यूटर, मोबाइल फोन, दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि हिरासत में लिए गए आरोपियों से पूछताछ जारी है। साथ ही, गिरोह से जुड़े अन्य संभावित सदस्यों की तलाश भी की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस नेटवर्क के तार अन्य शहरों या राज्यों से जुड़े हुए हैं।
अभी साइबर जांच से खुलेंगे और राज
चूंकि ठगी का एक हिस्सा ऑनलाइन माध्यम से किया गया है, इसलिए साइबर टीम डिजिटल साक्ष्यों की बारीकी से जांच कर रही है। कॉल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन और सोशल मीडिया गतिविधियों को खंगाला जा रहा है।

प्राथमिक अनुमान है कि ठगी की रकम लाखों रुपये में हो सकती है। हालांकि, सटीक आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। पुलिस का कहना है कि यदि और पीड़ित सामने आते हैं, तो मामले में धाराएं बढ़ाई जा सकती हैं।
पढ़िए युवाओं के लिए पुलिस की अपील
इस घटना के बाद पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि वे नौकरी के नाम पर किसी भी संस्था या व्यक्ति को पैसे देने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें। विशेष रूप से, यदि कोई कंपनी रजिस्ट्रेशन या प्लेसमेंट के नाम पर बड़ी राशि की मांग करे, तो सतर्क रहें।

पुलिस ने यह भी सलाह दी है कि केवल अधिकृत और विश्वसनीय माध्यमों से ही नौकरी के अवसरों की जानकारी लें। इसके अलावा, किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को दें।
बेरोजगारी का फायदा उठाने वाला है यह गिरोह
कानून विशेषज्ञों का मानना है कि बेरोजगारी की समस्या का फायदा उठाकर ऐसे गिरोह सक्रिय हो जाते हैं। वे युवाओं की आकांक्षाओं और आर्थिक मजबूरियों का लाभ उठाते हैं। इसलिए जागरूकता ही इस प्रकार की ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

हाल के वर्षों में ऑनलाइन जॉब फ्रॉड के मामलों में वृद्धि देखी गई है। ऐसे में प्रशासन और आम नागरिकों दोनों की जिम्मेदारी है कि सतर्क रहें और दूसरों को भी जागरूक करें।
जानिए आगे की कार्रवाई जारी
फिलहाल, पुलिस की जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि पीड़ितों को न्याय मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि नौकरी की तलाश में युवाओं को सतर्क रहने की आवश्यकता है। सही जानकारी और सावधानी से ही ऐसे फर्जी कॉल सेंटर और ठगी के जाल से बचा जा सकता है।



