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लखनऊ: भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती से संकट गहराया, वीवीआईपी इलाकों में भी बाधित रही सप्लाई

रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा 

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ इन दिनों भीषण गर्मी और लगातार हो रही बिजली कटौती के दोहरे संकट का सामना कर रही है। तापमान में वृद्धि के साथ बिजली की मांग भी तेजी से बढ़ी है, लेकिन आपूर्ति व्यवस्था इस बढ़ी हुई मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं दिख रही। परिणामस्वरूप, शहर के कई प्रमुख इलाकों में रोजाना सुबह और शाम के समय बिजली कटौती की समस्या सामने आ रही है।

पिछले दो सप्ताह से राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में एक-एक घंटे की कटौती ने आम नागरिकों की दिनचर्या को प्रभावित कर दिया है। खास बात यह है कि इस बार केवल सामान्य कॉलोनियां ही नहीं, बल्कि वीवीआईपी क्षेत्र भी बिजली संकट से अछूते नहीं रहे। हजरतगंज, पार्क रोड, जयप्रकाश नगर, बालू अड्डा और डालीबाग जैसे प्रमुख इलाकों में भी बिजली आपूर्ति बाधित रही।

सुबह होते ही अंधेरे में डूब रही राजधानी

स्थानीय निवासियों के अनुसार, सुबह के समय जब लोग अपने दैनिक कार्यों की शुरुआत करते हैं, उसी समय बिजली गुल हो जाती है। इससे बच्चों की पढ़ाई, कार्यालय जाने की तैयारी और घरेलू कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, शाम के समय कार्यालय से लौटने वाले लोगों को भी बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि बिजली विभाग का कहना है कि बढ़ी हुई मांग के कारण लोड प्रबंधन की आवश्यकता पड़ रही है, लेकिन नागरिकों का आरोप है कि कटौती की पूर्व सूचना नहीं दी जाती। इस कारण असुविधा और अधिक बढ़ जाती है।

वीवीआईपी इलाकों में भी संकट

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री आवास से लगभग एक किलोमीटर के दायरे तक भी बिजली आपूर्ति प्रभावित रही। इसके अतिरिक्त, रक्षा मंत्री और लखनऊ से सांसद Rajnath Singh के संसदीय क्षेत्र में भी बिजली व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आई हैं।

वीवीआईपी इलाकों में बिजली कटौती होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि प्रमुख क्षेत्रों में यह स्थिति है, तो अन्य इलाकों की हालत का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

जवाहर भवन और डालीबाग पावर हाउस पर सवाल

जानकारी के अनुसार, जवाहर भवन और डालीबाग पावर हाउस से जुड़ी सप्लाई व्यवस्था में तकनीकी दिक्कतें सामने आई हैं। हालांकि विभाग की ओर से इन समस्याओं को अस्थायी बताया जा रहा है, लेकिन लगातार दो सप्ताह तक बनी स्थिति ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर जेई और एसडीओ पर भी सप्लाई व्यवस्था संभालने में लापरवाही के आरोप लगे हैं। लोगों का कहना है कि शिकायत करने के बावजूद त्वरित समाधान नहीं मिल पा रहा है।

ऊर्जा मंत्री और विभागीय अधिकारियों पर उठे सवाल

बिजली संकट को लेकर ऊर्जा मंत्री एके शर्मा पर भी सवाल उठने लगे हैं। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी की है। हालांकि सरकार की ओर से यह कहा गया है कि बढ़ती गर्मी के कारण बिजली की मांग में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है और जल्द ही स्थिति सामान्य कर ली जाएगी।

वहीं, उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के आदेशों के पालन को लेकर भी सवाल उठे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जमीनी स्तर पर निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा।

आमजन की दिनचर्या पर असर

लगातार हो रही बिजली कटौती का सबसे अधिक प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ा है। भीषण गर्मी में पंखे और कूलर बंद होने से बुजुर्गों और बच्चों को विशेष परेशानी हो रही है। इसके अतिरिक्त, छोटे व्यापारियों और दुकानदारों का कहना है कि बिजली न होने से उनका कारोबार भी प्रभावित हो रहा है।

घर से काम करने वाले पेशेवरों और विद्यार्थियों को भी इंटरनेट और उपकरणों के संचालन में बाधा का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए नागरिकों की मांग है कि या तो कटौती की पूर्व सूचना दी जाए अथवा वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

पढ़िए विभाग का पक्ष

बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गर्मी के कारण प्रदेशभर में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। लखनऊ में भी मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन की स्थिति बनी है। हालांकि, विभाग का दावा है कि अतिरिक्त ट्रांसफार्मर और तकनीकी टीमों को सक्रिय किया गया है ताकि फॉल्ट को शीघ्र ठीक किया जा सके।

साथ ही, यह भी बताया गया है कि लोड संतुलन के लिए अस्थायी कटौती की जा रही है, जिससे पूरे शहर में समान रूप से आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

समाधान की रही अपेक्षा

वर्तमान स्थिति को देखते हुए नागरिकों को जल्द राहत की उम्मीद है। प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह तकनीकी समस्याओं का शीघ्र समाधान करे और पारदर्शिता के साथ आपूर्ति प्रबंधन सुनिश्चित करे।

यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो गर्मी बढ़ने के साथ समस्या और गंभीर हो सकती है। इसलिए आवश्यक है कि विभागीय स्तर पर समन्वय बढ़ाया जाए और नागरिकों को समयबद्ध जानकारी दी जाए।

लखनऊ में बिजली कटौती का संकट केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि व्यवस्थागत चुनौती के रूप में सामने आया है। हालांकि विभाग ने सुधार के प्रयासों का आश्वासन दिया है, लेकिन वास्तविक राहत तभी मिलेगी जब जमीनी स्तर पर आपूर्ति सुचारु रूप से बहाल होगी। फिलहाल, राजधानी के नागरिक भीषण गर्मी के बीच स्थिर बिजली आपूर्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

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