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कानपुर: सीडीओ ने बच्चों संग मिड डे मील खाकर परखी पढ़ाई, निपुण भारत मिशन की प्रगति का किया निरीक्षण

रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा 

कानपुर: स्कूल निरीक्षण के दौरान मंगलवार को मुख्य विकास अधिकारी Abhinav J Jain का अलग और प्रेरणादायक अंदाज देखने को मिला। उच्च प्राथमिक विद्यालय शंकरपुर पहुंचे सीडीओ बच्चों के बीच जाकर बैठ गए और उनके साथ मिड डे मील ग्रहण किया। इस दौरान उन्होंने न केवल भोजन की गुणवत्ता परखी, बल्कि बच्चों से संवाद कर उनकी पढ़ाई और विद्यालयी वातावरण की भी जानकारी ली।

यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि प्रशासनिक निरीक्षण अक्सर औपचारिकता तक सीमित रह जाते हैं। हालांकि, इस बार सीडीओ ने सीधे बच्चों के साथ बैठकर वास्तविक स्थिति समझने का प्रयास किया।

बच्चों के साथ किया संवाद, भोजन की गुणवत्ता की भी की जांच

विद्यालय में पहुंचते ही मुख्य विकास अधिकारी ने बच्चों से बातचीत शुरू की। थाली हाथ में लेकर उन्होंने सहज अंदाज में पूछा, “दाल कैसी बनी है? क्या रोज ऐसा ही खाना मिलता है?” अचानक अपने बीच अधिकारी को देखकर बच्चे पहले तो चौंके, लेकिन बाद में खुलकर बातचीत करने लगे।

कुछ बच्चों ने पढ़ाई के बारे में सकारात्मक अनुभव साझा किए, वहीं कई ने भोजन की गुणवत्ता की सराहना की। इस संवाद से यह स्पष्ट हुआ कि प्रशासन बच्चों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए जमीनी स्तर पर प्रयास कर रहा है।

निपुण भारत मिशन के तहत किया गया निरीक्षण

निरीक्षण केवल मिड डे मील तक सीमित नहीं रहा। मुख्य विकास अधिकारी ने निपुण भारत मिशन के अंतर्गत उच्च प्राथमिक विद्यालय लोधवा खेड़ा, प्राथमिक विद्यालय कटरी शंकरपुर और उच्च प्राथमिक विद्यालय शंकरपुर का भी दौरा किया।

उन्होंने कक्षाओं में जाकर बच्चों से किताब पढ़वाई, ब्लैकबोर्ड पर सवाल हल कराए और उनकी भाषा व गणितीय क्षमता का आकलन किया। इससे यह सुनिश्चित किया गया कि शैक्षिक गुणवत्ता केवल कागजों में ही नहीं, बल्कि वास्तविक रूप में भी प्रभावी है।

अभिलेखों और उपस्थिति की हुई समीक्षा

निरीक्षण के दौरान छात्र उपस्थिति पंजिका, शिक्षकों की उपस्थिति रजिस्टर तथा बच्चों की कापियों का भी अवलोकन किया गया। मुख्य विकास अधिकारी ने शिक्षकों को निर्देश दिए कि प्रत्येक बच्चे की प्रगति पर नियमित नजर रखी जाए।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि कापियों की जांच समय पर होना आवश्यक है, क्योंकि इससे छात्रों की सीखने की प्रक्रिया को दिशा मिलती है। यदि किसी छात्र को अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता है, तो उसे समय रहते उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

स्वच्छता और आधारभूत सुविधाओं पर दिया जोर

प्राथमिक विद्यालय कटरी शंकरपुर में साफ-सफाई की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया। विद्यालय परिसर, कक्षाओं और शौचालयों की स्वच्छता का निरीक्षण करते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि स्वच्छ वातावरण बच्चों के समग्र विकास के लिए अनिवार्य है।

उन्होंने यह भी कहा कि विद्यालय का सकारात्मक और स्वच्छ माहौल बच्चों के आत्मविश्वास और सीखने की क्षमता को बढ़ाता है। इसलिए नियमित साफ-सफाई और रखरखाव सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

डिजिटल शिक्षा और गतिविधि आधारित शिक्षण

निरीक्षण के दौरान विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, प्रोजेक्टर और अन्य डिजिटल माध्यमों के उपयोग की भी समीक्षा की गई। मुख्य विकास अधिकारी ने गतिविधि आधारित शिक्षण और टीएलएम (Teaching Learning Material) के प्रयोग की सराहना की।

उन्होंने शिक्षकों को निर्देश दिया कि डिजिटल संसाधनों का अधिकतम उपयोग करते हुए बच्चों को रोचक और प्रभावी तरीके से पढ़ाया जाए। इससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और बच्चों की रुचि भी बढ़ेगी।

प्रशासन और शिक्षा विभाग का समन्वय

निरीक्षण के समय बीएसए सुरजीत कुमार सिंह सहित विभिन्न अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने मिलकर विद्यालयों की व्यवस्थाओं की समीक्षा की और आवश्यक सुधारात्मक कदमों पर चर्चा की।

यह समन्वय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रशासन और शिक्षा विभाग का सहयोग आवश्यक है।

जानिए मिड डे मील की भूमिका

मिड डे मील योजना का उद्देश्य बच्चों को पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराना है, ताकि उनकी उपस्थिति और सीखने की क्षमता में सुधार हो सके। मुख्य विकास अधिकारी द्वारा बच्चों के साथ बैठकर भोजन करना इस योजना की पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और पोषण स्तर की जांच से यह संदेश भी गया कि प्रशासन बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे रहा है।

कुल मिलाकर, कानपुर में मुख्य विकास अधिकारी का यह निरीक्षण औपचारिकता से आगे बढ़कर सहभागिता और संवेदनशीलता का उदाहरण बना। बच्चों के बीच बैठकर मिड डे मील खाना और सीधे उनकी पढ़ाई परखना प्रशासन की सक्रियता को दर्शाता है।

यदि इसी प्रकार नियमित निरीक्षण और संवाद की परंपरा जारी रहती है, तो विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता और आधारभूत सुविधाओं में निरंतर सुधार संभव है। निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए प्रशासनिक सतर्कता और शिक्षकों की प्रतिबद्धता दोनों आवश्यक हैं।

इस पहल से यह संकेत मिलता है कि शिक्षा और पोषण दोनों को समान महत्व दिया जा रहा है, जो बच्चों के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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