
रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा
भारत निर्वाचन आयोग ने राज्यसभा की 24 सीटों पर होने वाले चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत 10 राज्यों की सीटों पर चुनाव प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। आयोग द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार 18 जून 2026 को मतदान कराया जाएगा, जबकि 20 जून तक पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न कर ली जाएगी। इस चुनाव में कई बड़े राजनीतिक चेहरों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिनमें कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge, वरिष्ठ कांग्रेस नेता Digvijaya Singh और केंद्रीय मंत्री Ravneet Singh Bittu शामिल हैं।

तैयारियां कर दी गईं हैं शुरू
राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। हालांकि यह चुनाव प्रत्यक्ष मतदान से नहीं होता, लेकिन इसके राजनीतिक और रणनीतिक मायने काफी अहम माने जाते हैं। यही वजह है कि सभी दल अपने उम्मीदवारों के चयन और संख्या बल को लेकर सक्रिय हो गए हैं।

जानिए किन राज्यों में होगा चुनाव
निर्वाचन आयोग के अनुसार जिन राज्यों की सीटों पर चुनाव होना है, उनमें मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, झारखंड और असम जैसे राज्य शामिल हैं। इन राज्यों के राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, जिसके बाद नई नियुक्तियों के लिए चुनाव कराया जाएगा।

राज्यसभा संसद का उच्च सदन है और इसमें सदस्य प्रत्यक्ष जनता द्वारा नहीं बल्कि राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा चुने जाते हैं। इसलिए इन चुनावों में विधानसभा में पार्टियों की संख्या सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जिन राज्यों में किसी पार्टी या गठबंधन के पास बहुमत अधिक होता है, वहां उसके उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जाती है।

कांग्रेस के लिए मानी जा रही प्रतिष्ठा
इस बार होने वाले चुनाव में कांग्रेस के लिए कई सीटें प्रतिष्ठा से जुड़ी मानी जा रही हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश से वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह भी रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में पार्टी के सामने अनुभवी नेताओं को दोबारा राज्यसभा भेजने की चुनौती होगी। दूसरी ओर भाजपा भी अपने संगठनात्मक और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों के चयन में सावधानी बरत रही है।

केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। पंजाब की राजनीति में उनका प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में भाजपा और सहयोगी दलों की रणनीति पर भी राजनीतिक विश्लेषकों की नजर बनी हुई है।
महत्वपूर्ण मन जाता है यह चुनाव
राज्यसभा चुनाव का महत्व केवल सांसदों के चयन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह केंद्र की राजनीति और संसद में शक्ति संतुलन को भी प्रभावित करता है। राज्यसभा में संख्या बल बढ़ने से सरकार को विधेयकों को पारित कराने में आसानी होती है। वहीं विपक्ष भी अपने प्रभाव को बनाए रखने के लिए अधिक से अधिक सीटें जीतने की कोशिश करता है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस चुनाव के जरिए कई राज्यों में बदलते राजनीतिक समीकरणों की झलक देखने को मिल सकती है। खासतौर पर उन राज्यों में जहां हाल के विधानसभा चुनावों में सत्ता परिवर्तन हुआ है, वहां राज्यसभा सीटों का गणित भी प्रभावित हो सकता है।

शुरू हो चुकी है नामांकन प्रक्रिया
निर्वाचन आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी और नाम वापसी की अंतिम तिथि तय की जाएगी। यदि आवश्यक हुआ तो 18 जून को मतदान कराया जाएगा। मतदान समाप्त होने के बाद उसी दिन मतगणना भी होगी और 20 जून तक पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग और रणनीतिक मतदान भी कई बार चर्चा का विषय बनते हैं। हालांकि राजनीतिक दल अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए लगातार बैठकें और रणनीतिक तैयारियां करते रहते हैं। इस बार भी कुछ राज्यों में मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना जताई जा रही है।

राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो यह चुनाव आगामी राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में भी अहम साबित हो सकता है। संसद के उच्च सदन में मजबूत स्थिति बनाने के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय दल भी अपने प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश करेंगे।

राज्यसभा चुनाव की घोषणा के बाद अब सभी की नजर उम्मीदवारों की सूची पर टिक गई है। आने वाले दिनों में विभिन्न राजनीतिक दल अपने प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर सकते हैं। इसके साथ ही राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।



