बहराइच: दो बच्चों के पिता से हुआ नाबालिग किशोरी को बंपर प्यार – पाने के लिए चढ़ गई टावर पर – पुलिस ने उतारा सुरक्षित

रिपोर्ट – महेश मिश्रा
बहराइच: जिले के रुपईडीहा थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया। लहरपुरवा गांव में एक 15 वर्षीय नाबालिग किशोरी मोबाइल टावर पर चढ़ गई। हालांकि समय रहते पुलिस और ग्रामीणों की सक्रियता से उसे सुरक्षित नीचे उतार लिया गया। फिलहाल किशोरी को परिजनों की सुपुर्दगी में दे दिया गया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है।

विस्तार से जानिए क्या है पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना उस समय की है जब गांव की एक नाबालिग किशोरी अपने कथित संबंध को लेकर परिवार से नाराज हो गई। परिजनों द्वारा विवाह से इनकार किए जाने के बाद किशोरी ने भावावेश में यह कदम उठाया। बताया जा रहा है कि वह गांव के ही एक युवक से शादी की जिद पर अड़ी थी।

हालांकि परिवार का कहना है कि लड़की अभी नाबालिग है और इस तरह का निर्णय कानूनन और सामाजिक दृष्टि से उचित नहीं है। इसी बात को लेकर घर में तनाव की स्थिति बनी हुई थी। इसके बाद अचानक किशोरी गांव के पास स्थित एक मोबाइल टावर पर चढ़ गई, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
ग्रामीणों ने दी पुलिस को दी तत्काल सूचना
जैसे ही लोगों ने किशोरी को टावर पर चढ़ते देखा, उन्होंने तुरंत रुपईडीहा पुलिस को सूचना दी। देखते ही देखते मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हो गए। वहीं पुलिस भी तत्काल पहुंची और स्थिति को संभालने का प्रयास शुरू किया।

पुलिस अधिकारियों ने पहले भीड़ को नियंत्रित किया, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न फैले। इसके बाद किशोरी से लगातार बातचीत कर उसे समझाने का प्रयास किया गया। काफी देर तक समझाइश और आश्वासन के बाद अंततः किशोरी को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया।
कानूनी पहलू भी है महत्वपूर्ण
इस घटना ने एक बार फिर नाबालिगों के विवाह और उनके अधिकारों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। भारत में बाल विवाह कानूनन अपराध है और 18 वर्ष से कम आयु की लड़की का विवाह अवैध माना जाता है। ऐसे में प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मामले को संवेदनशीलता के साथ देखा जा रहा है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्राथमिक जांच में यह सामने आया है कि किशोरी भावनात्मक दबाव में थी। फिलहाल किसी के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई है। हालांकि यदि जांच में किसी प्रकार की कानूनी उल्लंघन की बात सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सामाजिक और पारिवारिक संवाद की रहती है आवश्यकता
इस तरह के मामलों में मनोरोग विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरावस्था एक संवेदनशील दौर होता है। इस उम्र में भावनात्मक निर्णय अधिक प्रभावी हो सकते हैं। इसलिए परिवार और समाज की जिम्मेदारी है कि वे संवाद के माध्यम से बच्चों को सही मार्गदर्शन दें।

यदि समय रहते बातचीत और समझाइश हो, तो ऐसी घटनाओं से बचा जा सकता है। इसके अतिरिक्त, स्कूलों और समुदाय स्तर पर काउंसलिंग की व्यवस्था भी अहम भूमिका निभा सकती है।

सोशल मीडिया डाल रहा है युवाओं पर प्रभाव
वर्तमान समय में सोशल मीडिया का प्रभाव भी युवाओं पर तेजी से बढ़ा है। कई बार फिल्मों या ऑनलाइन सामग्री से प्रभावित होकर किशोर जल्दबाजी में फैसले ले लेते हैं। हालांकि हर घटना को केवल सोशल मीडिया से जोड़ना भी उचित नहीं है, लेकिन अभिभावकों को सतर्क रहना आवश्यक है।

पढ़िए प्रशासन की अपील
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संवेदनशील मामले में अफवाहों से बचें और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें। साथ ही, अभिभावकों से भी कहा गया है कि वे बच्चों से खुलकर संवाद करें और उनकी भावनाओं को समझने का प्रयास करें।

बहराइच मोबाइल टावर नाबालिग किशोरी मामला यह दर्शाता है कि भावनात्मक परिस्थितियों में लिया गया निर्णय कितना जोखिमपूर्ण हो सकता है। हालांकि राहत की बात यह रही कि समय रहते पुलिस और ग्रामीणों की सक्रियता से एक बड़ा हादसा टल गया।



