
रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा
इंडियन ऑयल ने गैस सिलेंडरों की कीमतों में बड़े स्तर पर बढ़ोत्तरी की घोषणा की है। इस फैसले से खासकर कमर्शियल उपयोग वाले सिलेंडरों और फिर से जारी किए जाने वाले छोटे 5 किलो वाले सिलेंडरों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हालांकि घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों की कीमत अपरिवर्तित रखी गई है, लेकिन बढ़ती लागत से अंततः उपभोक्ताओं और व्यापारिक संस्थानों पर असर पड़ेगा।

कमर्शियल गैस सिलेंडर हुआ महंगा
सबसे बड़ा इजाफा 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर पर हुआ है। पहले यह सिलेंडर दिल्ली में 2078.50 रुपये में उपलब्ध होता था, लेकिन अब इसकी कीमत में 993 रुपये का इज़ाफा कर दिया गया है। परिणामस्वरूप, इसका नया मूल्य 3071.50 रुपये पहुंच चुका है।

कमर्शियल सिलेंडरों का उपयोग होटल, रेस्टोरेंट और अन्य खाद्य सेवा उद्योगों में बड़े पैमाने पर होता है। इसलिए इस मूल्य वृद्धि का सीधा असर खाद्य सेवा क्षेत्र के संचालन खर्च पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वृद्धि के प्रभाव से कई छोटे व्यवसायों को अपनी सेवाओं की लागत बढ़ानी पड़ सकती है।
5 किलो वाला सिलेंडर भी हुआ महंगा
कामगार वर्ग और छोटे व्यावसायिक उपयोग के लिए उपलब्ध 5 किलो वाले ‘छोटू’ सिलेंडर की कीमत में भी वृद्धि की गई है। पहले यह सिलेंडर 591 रुपये में उपलब्ध था, लेकिन अब इसके लिए 242 रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना होगा। नई कीमत के अनुसार यह सिलेंडर 833 रुपये में मिलेगा।

इस छोटे सिलेंडर का उपयोग उन लोगों द्वारा किया जाता है जो रोजमर्रा के छोटे खाना पकाने या व्यवसायिक उपयोग के लिए भारी सिलेंडर नहीं खरीदते। हालांकि घरेलू 14.2 किलो वाले LPG सिलेंडरों की कीमत में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है, फिर भी 5 किलो वाले सिलेंडर की महंगाई सामान्य उपभोक्ता पर असर डाल सकती है।
बढ़ती गैस की कीमत का पड़ रहा व्यापक प्रभाव
गैस सिलेंडरों की कीमतों में वृद्धि के कई परिप्रेक्ष्य हैं। यदि घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों की कीमत में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है, तो कमर्शियल और छोटे सिलेंडरों की बढ़ती कीमतें पूरे बाजार में व्यय को बढ़ा सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि कमर्शियल सिलेंडरों की महंगाई का असर सेवाक्षेत्र और आतिथ्य उद्योगों पर सबसे अधिक दिखाई देगा। इसके अलावा, 5 किलो वाले सिलेंडर की कीमत में इज़ाफा भी आम आदमी के खर्च पर प्रभाव डालेगा, खासकर उन परिवारों पर जिन्हें घरेलू सिलेंडर की तुलना में छोटे सिलेंडर का उपयोग करना पड़ता है।
जानिए क्या है सरकार और इंडस्ट्री का नजरिया
आर्थिक विशेषज्ञ बताते हैं कि ऊर्जा उत्पादों की कीमतों में बदलाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों, परिवहन लागत और आवश्यक सरकारी कर नीतियों जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है। इसी कारण से समय-समय पर गैस और अन्य ईंधन की कीमतों में संशोधन किया जाता है।

हालांकि, उद्योग निकायों से यह भी अपेक्षा की जाती है कि बढ़ी हुई लागत का भार उपभोक्ता पर कम से कम संभव तरीके से डाला जाए। साथ ही, व्यापारिक संगठनों का सुझाव है कि सरकार आवश्यकतानुसार राहत उपायों पर भी विचार कर सकती है, ताकि छोटे व्यवसायों और आम परिवारों को बढ़ती कीमतों से राहत मिल सके।
आम उपभोक्ता पर पड़ रहा बड़ा प्रभाव
गैस सिलेंडरों की बढ़ती कीमत का असर केवल व्यवसायों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे आम घरों में खाना पकाने, छोटे व्यावसायिक उपयोग और सेवाक्षेत्र में भी लागत में वृद्धि का अनुमान लगाया जा रहा है।

फिर भी, घरेलू LPG सिलेंडरों की कीमत में किसी प्रकार की बढ़ोत्तरी नहीं हुई है, जो उपभोक्ताओं के लिए एक राहत की खबर है। हालांकि 5 किलो वाले सिलेंडरों की महंगाई आम आदमी के खर्चे को प्रभावित करेगी, खासकर उन परिवारों में जहां छोटे सिलेंडर का नियमित उपयोग होता है।

इस प्रकार, इंडियन ऑयल द्वारा गैस सिलेंडरों की कीमतों में किए गए बदलाव से स्पष्ट है कि ऊर्जा उत्पादों की लागत में उतार-चढ़ाव का असर सीधे तौर पर व्यापार, सेवाक्षेत्र और आम उपभोक्ताओं के जीवन पर पड़ता है।

जहां एक ओर घरेलू सिलेंडर की कीमत स्थिर रखी गई है, वहीं कमर्शियल और छोटे सिलेंडरों की बढ़ती कीमत उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

आखिरकार, ऐसे निर्णयों का पूरा प्रभाव देने वाले उद्योगों और सरकार की नीतिगत प्रतिक्रियाओं के संयोजन पर ही निर्भर करेगा। उपभोक्ताओं के पास विकल्पों की जानकारी और सस्ते ऊर्जा समाधान खोजने की क्षमता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



