हमीरपुर: चकबंदी विभाग का पेशकार अल्ताफ अली रिश्वत लेते गिरफ्तार, तत्काल प्रभाव से किया गया निलंबित

रिपोर्ट – मोहम्मद अकरम
हमीरपुर: भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। चकबंदी विभाग में तैनात पेशकार अल्ताफ अली को एंटी करप्शन टीम ने 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। इसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

यह कार्रवाई एक सेवानिवृत्त फौजी की शिकायत पर की गई, जिसने जमीन के नक्शे के दुरुस्तीकरण के नाम पर कथित रूप से रिश्वत मांगे जाने की सूचना दी थी। मामले के उजागर होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है।
जमीन दुरुस्तीकरण के नाम पर मांगी गई थी रिश्वत
जानकारी के अनुसार, हरियाणा के फतेहाबाद जिले के निवासी सेवानिवृत्त सैनिक धर्मवीर सिंह ने सरीला विकासखंड क्षेत्र के कुपरा गांव में लगभग सवा 13 बीघा जमीन खरीदी थी। जमीन का नक्शा दुरुस्त कराने के लिए उन्होंने चकबंदी न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया था।

आरोप है कि इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बदले उनसे पहले डेढ़ लाख रुपये की मांग की गई। हालांकि, बाद में कथित तौर पर यह राशि 25 हजार रुपये में तय हुई। धर्मवीर सिंह का कहना है कि लगातार दबाव और देरी से परेशान होकर उन्होंने इसकी शिकायत करने का निर्णय लिया।
एंटी करप्शन टीम ने की कार्रवाई
शिकायत मिलने के बाद बांदा स्थित एंटी करप्शन कार्यालय ने मामले को गंभीरता से लिया। इसके पश्चात लगभग 20 सदस्यीय टीम ने जाल बिछाकर कार्रवाई की।

टीम ने हमीरपुर कलेक्ट्रेट परिसर में छापेमारी की और आरोपित पेशकार अल्ताफ अली को 25 हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें हमीरपुर कोतवाली लाया गया, जहां उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
न्यायालय में हुई पेशी और फिर किया गया निलंबन
गिरफ्तारी के अगले दिन एंटी करप्शन टीम आरोपी को अपने साथ बांदा ले गई, जहां उन्हें न्यायालय में पेश किया गया। इसी बीच, विभागीय स्तर पर भी त्वरित कार्रवाई की गई। बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी पैगाम हैदर ने पुष्टि की कि अल्ताफ अली को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

साथ ही, मामले की विभागीय जांच चकबंदी अधिकारी सरीला गजाधर को सौंपी गई है, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।
विभाग में मचा हड़कंप
इस कार्रवाई के बाद चकबंदी विभाग में हलचल तेज हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई से न केवल पारदर्शिता बढ़ती है, बल्कि अन्य कर्मचारियों के लिए भी यह एक संदेश होता है कि अनियमितताओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जानिए शिकायतकर्ता का पक्ष
सेवानिवृत्त सैनिक धर्मवीर सिंह ने बताया कि उन्होंने कानूनी प्रक्रिया के तहत जमीन खरीदी थी और केवल नक्शा दुरुस्त कराने की औपचारिकता पूरी करना चाहते थे।

हालांकि, कथित तौर पर बार-बार पैसों की मांग और देरी से वे मानसिक रूप से परेशान हो गए। अंततः उन्होंने एंटी करप्शन विभाग से संपर्क किया, जिसके बाद यह कार्रवाई संभव हो सकी। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई न होती, तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता था।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती का है संकेत
राज्य सरकार और प्रशासन समय-समय पर भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात करते रहे हैं। यह कार्रवाई उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इसमें आम नागरिकों की जीवन भर की पूंजी जुड़ी होती है। यदि इस प्रकार की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की जाए, तो लोगों का विश्वास प्रशासन में मजबूत होता है।
जानिए आगे की प्रक्रिया
मामले की न्यायिक और विभागीय जांच जारी है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इसके अलावा, विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में कठोर कदम उठाए जाएंगे।

हमीरपुर चकबंदी रिश्वत मामला प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता की आवश्यकता को रेखांकित करता है। एक ओर जहां एंटी करप्शन टीम की त्वरित कार्रवाई ने शिकायतकर्ता को राहत दी, वहीं दूसरी ओर यह संदेश भी दिया कि भ्रष्टाचार के मामलों में सख्ती बरती जाएगी।

अब सभी की नजरें जांच के अंतिम परिणाम पर टिकी हैं। यदि निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई होती है, तो इससे आम नागरिकों का भरोसा और मजबूत होगा।



