कानपुर: परमट स्कूल पुनर्निर्माण विवाद पर विधायक अमिताभ बाजपेयी का वर्चुअल शिलान्यास, प्रशासन से टकराव

रिपोर्ट – शुभम शर्मा
कानपुर: आर्यनगर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत परमट स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय के पुनर्निर्माण को लेकर चल रहा विवाद आज एक नए मोड़ पर पहुंच गया। यह मामला अब केवल निर्माण कार्य तक सीमित न रहकर लोकतांत्रिक अधिकार, जनभावना और प्रशासनिक प्रक्रिया के टकराव का प्रतीक बन गया है।

जर्जर भवन और लंबे समय से उठ रही मांग
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि यह विद्यालय लंबे समय से जर्जर स्थिति में था। बच्चों की सुरक्षा, भवन की अस्थिर संरचना और अव्यवस्थित विद्युत व्यवस्था को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही थी।

विधायक अमिताभ बाजपेयी ने 08 जुलाई 2024 से इस मुद्दे को लगातार प्रशासन और संबंधित विभागों के समक्ष उठाया। इसके लिए उन्होंने कई बार पत्राचार, निरीक्षण और फॉलोअप भी किया।

इसके परिणामस्वरूप विद्यालय के ध्वस्तीकरण और पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृति, एनओसी और टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई।
निर्माण कार्य में बाधा और बढ़ता विवाद
हालांकि, इसके बाद स्थिति तब बदल गई जब कुछ स्थानीय स्तर पर विरोध और विवाद सामने आया। आरोप है कि वैध प्रशासनिक स्वीकृति और वर्क ऑर्डर के बावजूद निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न की गई।

धीरे-धीरे यह मामला केवल निर्माण तक सीमित न रहकर राजनीतिक और सामाजिक बहस का मुद्दा बन गया।
प्रशासनिक रोक और पुलिस की मौजूदगी
इसके बाद जब विधायक अमिताभ बाजपेयी शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विद्यालय परिसर पहुंचे, तो भारी पुलिस बल की तैनाती के चलते उन्हें स्थल तक जाने से रोक दिया गया।

सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर रात से ही क्षेत्र में पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। इसके बावजूद विधायक ने स्थिति को शांतिपूर्ण रखते हुए गांधीवादी तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया।
वर्चुअल शिलान्यास और हवन-पूजन
इसके बाद विधायक ने अपने आवास पर हवन-पूजन किया और वैदिक विधि-विधान के माध्यम से विद्यालय पुनर्निर्माण कार्य का “वर्चुअल शिलान्यास” किया।

इस दौरान बड़ी संख्या में समर्थक, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। वातावरण भावनात्मक रहा, जहां बच्चों के भविष्य और शिक्षा को लेकर चिंता स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
जानिए क्या है विधायक का संकल्प और बयान
इस अवसर पर विधायक अमिताभ बाजपेयी ने भारतीय संविधान की शपथ लेते हुए कहा कि यह संघर्ष किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि गरीब बच्चों के अधिकारों के लिए है।

उन्होंने कहा कि जब तक विद्यालय का विधिवत निर्माण नहीं होता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कुछ प्रतीकात्मक संकल्प भी लिए, जिन्हें उन्होंने लोकतांत्रिक विरोध का हिस्सा बताया।
प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन
इसके बाद विधायक ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा, जिसे एडीएम सिटी ने प्राप्त किया।

ज्ञापन में कई गंभीर मुद्दों को उठाया गया, जिनमें निर्माण कार्य में बाधा, मजदूरों के साथ कथित दुर्व्यवहार, जनप्रतिनिधि की सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं और सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री शामिल हैं।
जांच और कार्रवाई की रखी मांग
विधायक ने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने मजदूरों या जनप्रतिनिधियों के साथ दुर्व्यवहार किया है, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

इसके अलावा, प्रशासनिक भूमिका की भी समीक्षा की मांग की गई ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न उत्पन्न हो।

प्रशासन और विधायक के बीच हुई वार्ता
इसके उपरांत प्रशासनिक अधिकारियों और विधायक के बीच बातचीत भी हुई। इसमें समस्या के समाधान को लेकर लोकतांत्रिक और संवैधानिक रास्ता निकालने पर चर्चा की गई।

परमट मंदिर में दर्शन और प्रार्थना
कार्यक्रम के अंत में विधायक परमट मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने दर्शन-पूजन किया। यहां भी बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे। मंदिर परिसर में विद्यालय निर्माण और क्षेत्र की शांति के लिए प्रार्थना की गई।

कानपुर का यह मामला अब केवल एक स्कूल निर्माण विवाद नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासन, जनप्रतिनिधि और जनभावनाओं के बीच संतुलन का बड़ा उदाहरण बन गया है। फिलहाल सभी पक्षों की नजर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई और समाधान पर टिकी हुई है, जिससे बच्चों के लिए सुरक्षित और बेहतर शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।



