अपराध व घटनायूपीशहर व राज्य

लखनऊ: फिर से हुई ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी: रिटायर्ड महिला डॉक्टर से 1.55 करोड़ की साइबर ठगी, जांच शुरू

रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा 

लखनऊ: ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है। इस मामले में एक रिटायर्ड महिला डॉक्टर से करीब 1.55 करोड़ रुपये की ठगी कर ली गई। ठगों ने खुद को केंद्रीय जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर उन्हें कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का भय दिखाया तथा विभिन्न खातों में धनराशि ट्रांसफर करा ली। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

यह घटना एक बार फिर इस बात की चेतावनी देती है कि साइबर अपराधी अब नई-नई तरकीबों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों और पेशेवर वर्ग को डर और भ्रम की स्थिति में डालकर आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

जानिए क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट’ का तरीका?

‘डिजिटल अरेस्ट’ कोई कानूनी शब्द नहीं है, बल्कि साइबर ठगों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक मनोवैज्ञानिक जाल है। इस तरीके में अपराधी फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से खुद को किसी सरकारी एजेंसी—जैसे एटीएस या एनआईए—का अधिकारी बताकर संपर्क करते हैं।

वे दावा करते हैं कि पीड़ित का नाम किसी आपराधिक जांच में सामने आया है और यदि तुरंत सहयोग नहीं किया गया तो गिरफ्तारी हो सकती है। इसके बाद वे बैंक खातों की जांच, सत्यापन या सुरक्षित रखने के नाम पर धनराशि ट्रांसफर करने का दबाव बनाते हैं। इस मामले में भी ठगों ने इसी प्रकार की रणनीति अपनाई और लगातार संपर्क में रहकर पीड़िता को भय और भ्रम की स्थिति में रखा।

अब जानिए कैसे हुई ठगी?

प्राथमिक जानकारी के अनुसार, ठगों ने महिला डॉक्टर को फोन कर बताया कि उनके बैंक खाते संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े हैं। उन्होंने स्वयं को जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए वीडियो कॉल के माध्यम से कथित दस्तावेज भी दिखाए।

इसके बाद पीड़िता को यह विश्वास दिलाया गया कि यदि वह जांच में सहयोग नहीं करेंगी तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है। डर के कारण उन्होंने अलग-अलग किश्तों में कुल 1.55 करोड़ रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दिए।

हालांकि बाद में जब उन्हें संदेह हुआ, तब उन्होंने पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और संबंधित बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है।

पुलिस ने शुरू की कार्रवाई

लखनऊ पुलिस के साइबर प्रकोष्ठ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, जिन खातों में राशि ट्रांसफर की गई, उनकी जानकारी एकत्र की जा रही है। इसके अलावा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण भी किया जा रहा है।

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के संदिग्ध कॉल पर घबराएं नहीं और तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करें।

पढ़िए क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे मामले?

कानून विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध के मामले भी बढ़ रहे हैं। ठग अक्सर सरकारी एजेंसियों के नाम का दुरुपयोग कर भरोसा हासिल करते हैं।

इसके अलावा, वे तकनीकी शब्दों और कानूनी प्रक्रियाओं का हवाला देकर पीड़ित को मानसिक दबाव में रखते हैं। चूंकि अधिकांश लोग कानूनी प्रक्रिया से परिचित नहीं होते, इसलिए वे घबरा जाते हैं और जल्दबाजी में निर्णय ले लेते हैं।

जनता के लिए महत्वपूर्ण सलाह – जरूर पढ़ें 

पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां साझा की हैं:

* कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती।
* किसी भी अनजान व्यक्ति को ओटीपी, बैंक डिटेल्स या पासवर्ड साझा न करें।
* यदि कोई कॉल डराने या दबाव बनाने की कोशिश करे, तो तुरंत कॉल काट दें।
* संदिग्ध कॉल की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें।

इन सावधानियों का पालन कर ऐसे जाल से बचा जा सकता है।

जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव

हाल के महीनों में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे मामलों में वृद्धि देखी गई है। इसलिए जागरूकता बेहद आवश्यक है। परिवारों को चाहिए कि वे वरिष्ठ सदस्यों को साइबर सुरक्षा के बारे में नियमित रूप से जानकारी दें।

इसके साथ ही, बैंक और सरकारी एजेंसियां भी समय-समय पर जन जागरूकता अभियान चला रही हैं। हालांकि, अंतिम जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक की भी है कि वह सतर्क रहे और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत दे।

डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का यह मामला दर्शाता है कि अपराधी तकनीक और मनोवैज्ञानिक दबाव का उपयोग कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। लखनऊ में हुई यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि केवल एक फोन कॉल भी भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।

इसलिए जरूरी है कि नागरिक सतर्क रहें, किसी भी संदिग्ध कॉल पर भरोसा न करें और तुरंत संबंधित प्राधिकरण को सूचित करें। जागरूकता, संयम और त्वरित कार्रवाई ही ऐसे साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

UP Now

Upnownews.com एक स्वतंत्र न्यूज़ चैनल है, जो आपको सबसे तेज और सटीक खबरें प्रदान करता है। हमारा लक्ष्य है कि हम दुनिया भर की महत्वपूर्ण और प्रासंगिक खबरें आप तक पहुँचाएँ। राजनीति, मनोरंजन, खेल, बिज़नेस, टेक्नोलॉजी, और अन्य विषयों पर हमारी निष्पक्ष और प्रमाणिक रिपोर्टिंग हमें सबसे अलग बनाती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button