श्रावस्ती: एसएसबी-वन विभाग ने की संयुक्त कार्रवाई: देखिए बरामद किया गया रेड सैंड बोआ – तस्कर गिरफ्तार

रिपोर्ट – सूर्य प्रकाश शुक्ला
श्रावस्ती: जिले में वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक बड़ी सफलता सामने आई है। एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) और वन विभाग की संयुक्त टीम ने ककरदरी वन क्षेत्र में विशेष अभियान चलाते हुए एक दुर्लभ रेड सैंड बोआ सांप बरामद किया है। इस मामले में एक व्यक्ति को वन्यजीव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान इरफान खान के रूप में हुई है, जो पड़ोसी जनपद बहराइच का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी रेड सैंड बोआ को कैसरगंज की ओर ले जाने की कोशिश में था। हालांकि, गुप्त सूचना के आधार पर पहले से सतर्क एसएसबी और वन विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई कर उसे पकड़ लिया।
गुप्त सूचना पर चलाया था विशेष अभियान
सूत्रों के अनुसार, एसएसबी को सीमा स्तंभ संख्या 635/10 के पास संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली थी। इसके बाद अधिकारियों ने तत्काल रणनीति बनाकर क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान शुरू किया। चूंकि यह इलाका सीमावर्ती और वन क्षेत्र से सटा हुआ है, इसलिए यहां वन्यजीव तस्करी की आशंका पहले भी जताई जाती रही है।

संयुक्त टीम ने निर्धारित स्थान पर घेराबंदी की और संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से रेड सैंड बोआ बरामद हुआ। तत्पश्चात आरोपी और बरामद वन्यजीव को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद वन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया।
जानिए क्या है रेड सैंड बोआ: संरक्षित और दुर्लभ प्रजाति
रेड सैंड बोआ (Eryx johnii) भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में शामिल प्रजाति है। इसका अर्थ है कि यह अत्यंत संरक्षित श्रेणी में आता है और इसके शिकार, व्यापार या अवैध परिवहन पर सख्त कानूनी प्रावधान लागू होते हैं।

विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, यह सांप पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि, अंधविश्वास और अवैध अंतरराष्ट्रीय मांग के कारण इस प्रजाति की तस्करी की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। यही कारण है कि वन विभाग और सुरक्षा एजेंसियां इस पर विशेष नजर रखती हैं।
सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ी निगरानी
श्रावस्ती का यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट स्थित है। ऐसे में एसएसबी की जिम्मेदारी केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि अवैध तस्करी, विशेषकर वन्यजीवों की तस्करी पर भी कड़ी नजर रखी जाती है।

अधिकारियों का कहना है कि हाल के वर्षों में वन्यजीव तस्करी के मामलों में कमी लाने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत किया गया है। इसी कड़ी में यह संयुक्त कार्रवाई की गई, जो सफल रही।
जानिए कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया जा रहा है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या आरोपी किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।

यदि जांच में संगठित गिरोह की पुष्टि होती है, तो संबंधित एजेंसियां अन्य संदिग्धों की पहचान कर आगे की कार्रवाई करेंगी। फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है।
वन्यजीव संरक्षण की है आवश्यकता
यह घटना एक बार फिर इस बात को रेखांकित करती है कि वन्यजीव संरक्षण केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज की भी अहम भूमिका है। जागरूकता की कमी और अंधविश्वास के चलते कई दुर्लभ प्रजातियां खतरे में पड़ जाती हैं।

हालांकि सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता से कई मामलों में सफलता मिल रही है, लेकिन तस्करी की कोशिशें पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। इसलिए निरंतर निगरानी, सामुदायिक सहभागिता और कड़े कानूनी प्रावधानों का पालन आवश्यक है।

श्रावस्ती में एसएसबी और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई ने यह साबित किया है कि समन्वित प्रयासों से वन्यजीव तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। ककरदरी वन क्षेत्र से रेड सैंड बोआ की बरामदगी न केवल एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि संरक्षित प्रजातियों के अवैध व्यापार को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

आने वाले समय में भी सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी और सख्ती बढ़ाने की योजना है, ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखा जा सके।



