
रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में हाल ही में फिल्म ‘धुरंधर 2’ ने हलचल मचा दी है। इस फिल्म में दिखाए गए कुछ किरदार और घटनाएं राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई हैं। विशेष रूप से माफिया डॉन अतीक अहमद की तरह दिखते किरदार और उनके कथित पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI और आतंकी संगठनों से कनेक्शन को लेकर राजनीति गरमाई हुई है।

फिल्म में कराची के ल्यारी इलाके का उदाहरण देकर, अखिलेश यादव के शासनकाल की तुलना की गई है। ल्यारी अपने अपराध और राजनीति के मिश्रित माहौल के लिए जाना जाता है। इस फिल्म में इसे बड़े पर्दे पर दिखाया गया है, जिससे भारतीय राजनीति में सियासी बयानबाजी का नया विषय बन गया है।
जानिए किसने लगाए हैं पोस्टर
इस फिल्म से प्रेरित होकर भारतीय किसान मंच के अध्यक्ष देवेंद्र तिवारी ने लखनऊ की सड़कों पर पोस्टर लगवाए हैं। इन पोस्टरों में लिखा गया है, “सपा का ल्यारी राज, न भूले हैं न भूलेंगे।” यह पोस्टर अब राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन चुका है और सपा तथा अन्य दलों के बीच बयानबाजी को बढ़ावा दे रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह फिल्म केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रही, बल्कि राजनीतिक संदेश भी दे रही है। फिल्म का किरदार, जो अतीक अहमद से मिलता-जुलता दिखाया गया है, और ISI व आतंकी संगठनों से उसका कथित संबंध राजनीतिक दलों के लिए मुद्दा बन गया है। इसके साथ ही, कराची के ल्यारी का उदाहरण देकर सपा शासनकाल की तुलना करना, राजनीतिक विरोधियों के लिए एक नया हथियार साबित हो सकता है।
यूपी की सियासत हुई गरम
फिल्म से जुड़े पोस्टरों ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नया मोड़ ला दिया है। जनता के बीच चर्चा का विषय बन चुके ये पोस्टर सपा और अन्य राजनीतिक दलों के लिए चुनावी रणनीति में भी प्रभाव डाल सकते हैं। पोस्टरों में प्रयुक्त भाषा और संदेश स्पष्ट रूप से जनता में असंतोष और राजनीतिक चेतना को जागृत करने का प्रयास कर रहे हैं।

इसके अलावा, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि फिल्म और उसके बाद के पोस्टरों ने मीडिया और सोशल मीडिया पर भी राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। अब राजनीतिक विश्लेषक और पत्रकार इस मुद्दे पर बहस कर रहे हैं कि क्या फिल्मों और कला के माध्यम से राजनीतिक संदेश देना लोकतंत्र में स्वीकार्य है, या इससे राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ता है।
खामोश हैं सपा नेता
सपा के नेताओं ने अभी तक इस तुलना पर प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन राजनीतिक विरोधी दल इसे चुनावी मुद्दे के रूप में भुनाने की तैयारी में हैं। इस प्रकार, फिल्म ने केवल सिनेमा प्रेमियों को मनोरंजन नहीं दिया, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस का जन्म दिया।
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में यह मुद्दा उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों में भी चर्चा का विषय बन सकता है। फिल्म की कहानी, किरदार और पोस्टरों का संदेश सीधे जनता की सोच और राजनीतिक धारणा को प्रभावित कर सकता है।

नए विवाद ने लिया जन्म
संक्षेप में, फिल्म ‘धुरंधर 2’ ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया राजनीतिक विवाद पैदा कर दिया है। अतीक अहमद जैसे किरदार, ISI और आतंकी संगठन के कथित कनेक्शन, कराची के ल्यारी का उदाहरण, और सपा शासनकाल से जोड़कर पोस्टरों का प्रचार—ये सभी घटनाएं राजनीतिक हलकों में गहमागहमी बढ़ा रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषक इस पर सहमति व्यक्त करते हैं कि फिल्म और उससे उत्पन्न विवाद, केवल मनोरंजन या सिनेमा तक सीमित नहीं हैं। बल्कि यह जनता की राजनीतिक सोच, राजनीतिक दलों की रणनीति और चुनावी माहौल पर प्रभाव डाल रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता इस मुद्दे को किस तरह से ग्रहण करती है और आने वाले चुनावों में इसका किस प्रकार असर पड़ता है।



