कानपुर: GSVM मेडिकल कॉलेज की रिसर्च में हुआ खुलासा – टैटू बनवाने से बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा, जानिए डॉक्टरों की सलाह

रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा
कानपुर: जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज और हैलेट अस्पताल के चर्म रोग विभाग द्वारा हाल ही में किए गए एक शोध ने टैटू बनवाने के बढ़ते चलन को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। शोध में बताया गया है कि यदि टैटू बनवाते समय स्वच्छता और सुरक्षा मानकों का पालन न किया जाए, तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

डॉक्टरों का कहना है कि टैटू बनवाना अपने आप में जोखिमपूर्ण नहीं है, लेकिन यदि प्रक्रिया के दौरान लापरवाही बरती जाए, तो इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए विशेषज्ञों ने लोगों से सतर्क रहने और प्रमाणित पार्लर में ही टैटू बनवाने की सलाह दी है।
जानिए शोध में क्या सामने आया?
चर्म रोग विभाग के चिकित्सकों के अनुसार, अस्पताल में पिछले कुछ समय में ऐसे कई मरीज आए, जिन्हें टैटू बनवाने के बाद त्वचा संबंधी संक्रमण, एलर्जी या अन्य जटिलताएं हुईं। इसी आधार पर विभाग ने एक अध्ययन किया, जिसमें टैटू से जुड़े संभावित जोखिमों का विश्लेषण किया गया।

शोध में यह पाया गया कि यदि सुई, इंक या उपकरण पूरी तरह से स्टरलाइज न हों, तो बैक्टीरिया और वायरस के संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है। विशेष रूप से, असुरक्षित सुई के उपयोग से रक्तजनित संक्रमण जैसे हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और एचआईवी का खतरा सैद्धांतिक रूप से संभव हो सकता है। हालांकि, डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया कि संक्रमण का जोखिम मुख्यतः अस्वच्छ परिस्थितियों में अधिक होता है।

पढ़िए टैटू और त्वचा संबंधी समस्याएं
मेडिकल विशेषज्ञों के मुताबिक, कई बार टैटू बनवाने के बाद त्वचा पर लालिमा, सूजन, खुजली या पस बनने जैसी समस्याएं देखी गई हैं। कुछ मामलों में एलर्जिक रिएक्शन भी सामने आया है।

इसके अलावा, जिन लोगों को पहले से त्वचा संबंधी रोग हैं, उनके लिए जोखिम अधिक हो सकता है। इसलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि टैटू बनवाने से पहले त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श लेना उपयोगी हो सकता है।
युवाओं में बढ़ रहा टैटू का चलन
आज के समय में टैटू फैशन और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का माध्यम बन चुका है। खासकर युवाओं में इसका आकर्षण तेजी से बढ़ा है। हालांकि, फैशन के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का ध्यान रखना भी आवश्यक है।

डॉक्टरों का कहना है कि जागरूकता की कमी के कारण लोग अक्सर सस्ते या अस्थायी पार्लरों में टैटू बनवा लेते हैं, जहां सुरक्षा मानकों का पालन पूरी तरह से नहीं होता। इसलिए जागरूकता बढ़ाना समय की मांग है।

जरूर पढ़िए डॉक्टरों की सलाह
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:
1. केवल लाइसेंस प्राप्त और प्रमाणित टैटू पार्लर का चयन करें।
2. यह सुनिश्चित करें कि सुई और उपकरण पूरी तरह से स्टरलाइज हों।
3. टैटू कलाकार द्वारा डिस्पोजेबल सुई का उपयोग किया जाए।
4. टैटू के बाद उचित देखभाल के निर्देशों का पालन करें।
5. यदि किसी प्रकार की एलर्जी या संक्रमण के लक्षण दिखें, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।
इन सावधानियों का पालन करने से जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

जानिए संक्रमण से बचाव क्यों जरूरी?
रक्तजनित संक्रमण गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं। हालांकि हर टैटू से संक्रमण नहीं होता, लेकिन असावधानी के कारण जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए, संक्रमण से बचाव के लिए जागरूक रहना और सुरक्षित विकल्प चुनना आवश्यक है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि फैशन और व्यक्तिगत पसंद महत्वपूर्ण हैं, लेकिन स्वास्थ्य सर्वोपरि है। यदि सावधानी बरती जाए, तो टैटू बनवाने का अनुभव सुरक्षित हो सकता है।
प्रशासन ने शुरू की निगरानी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया है कि स्थानीय प्रशासन को टैटू पार्लरों की नियमित जांच करनी चाहिए, ताकि स्वच्छता और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके। इससे न केवल ग्राहकों की सुरक्षा होगी, बल्कि पेशेवर टैटू कलाकारों की विश्वसनीयता भी बनी रहेगी।

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज और हैलेट अस्पताल की रिसर्च ने यह स्पष्ट किया है कि टैटू बनवाते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। अस्वच्छ उपकरण या लापरवाही गंभीर संक्रमण का कारण बन सकती है।

इसलिए अगली बार जब आप टैटू बनवाने का निर्णय लें, तो केवल डिजाइन और फैशन ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों को भी प्राथमिकता दें। जागरूकता और सावधानी ही सुरक्षित भविष्य की कुंजी है।



