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अमेरिका में बर्थराइट नागरिकता पर नई बहस: ट्रम्प द्वारा साझा पोस्ट से भारत-चीन पर विवादित टिप्पणी

रिपोर्ट – ब्रजेश शर्मा 

अमेरिका में जन्म के आधार पर नागरिकता (बर्थ राइट सिटिजनशिप) को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। इस बार यह मुद्दा तब सुर्खियों में आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा साझा की गई एक पोस्ट में भारत और चीन के संदर्भ में विवादित टिप्पणी का उल्लेख किया गया। इस पोस्ट में जन्म के आधार पर नागरिकता देने की नीति की आलोचना की गई है और इसे लेकर देशव्यापी जनमत संग्रह की मांग उठाई गई है।

हालांकि पोस्ट में व्यक्त विचार मूल रूप से एक रेडियो होस्ट की चिट्ठी के बताए जा रहे हैं, लेकिन इसे साझा किए जाने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा बढ़ गई है।

जानिए क्या है पूरा मामला?

साझा की गई चिट्ठी में अमेरिका की बर्थ राइट सिटिजनशिप नीति की आलोचना करते हुए कहा गया है कि जन्म के आधार पर नागरिकता देने का प्रावधान प्रवासन को बढ़ावा देता है। इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ प्रवासी परिवार अपने बच्चों को अमेरिका में जन्म दिलाकर नागरिकता प्राप्त करते हैं और बाद में उसी आधार पर परिवार को स्थायी रूप से बसाने की कोशिश करते हैं।

इसके साथ ही एक सोशल मीडिया सर्वे का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि बड़ी संख्या में लोग इस कानून में बदलाव चाहते हैं। हालांकि ऐसे सर्वे की प्रामाणिकता और प्रतिनिधित्व को लेकर अलग-अलग मत हैं।

भारत और चीन का उल्लेख

चिट्ठी में कैलिफोर्निया के टेक सेक्टर का जिक्र करते हुए यह दावा किया गया कि उच्च तकनीकी नौकरियों में भारत और चीन से जुड़े पेशेवरों की संख्या अधिक है। इसमें यह भी कहा गया कि भर्ती प्रक्रिया में कथित असंतुलन है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी टेक उद्योग में विविधता लंबे समय से उसकी वैश्विक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा रही है। भारतीय और चीनी मूल के पेशेवरों ने विज्ञान, तकनीक और शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसलिए इस विषय पर संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक है।

ACLU पर भी की टिप्पणी

चिट्ठी में अमेरिकन सिविल लिबर्टी यूनियन (ACLU) की नीतियों की आलोचना की गई है। आरोप लगाया गया है कि यह संगठन अवैध प्रवासियों के पक्ष में नीतियों का समर्थन करता है।

दूसरी ओर, ACLU का कहना है कि वह संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए कार्य करता है। ऐसे में इस मुद्दे पर भी राजनीतिक विचारधाराओं के अनुसार मतभेद स्पष्ट हैं।

बर्थ राइट नागरिकता क्या है?

दुनिया में नागरिकता देने के दो प्रमुख आधार माने जाते हैं:

1. राइट ऑफ सॉइल (Jus Soli): जहां जन्म हुआ, वही देश नागरिकता देता है।
2. राइट ऑफ ब्लड (Jus Sanguinis): माता-पिता की नागरिकता के आधार पर नागरिकता मिलती है।

अमेरिका में 1868 में 14वें संशोधन के तहत राइट ऑफ सॉइल को संवैधानिक मान्यता दी गई थी। गृहयुद्ध के बाद इस संशोधन का उद्देश्य पूर्व में गुलामी का सामना कर चुके लोगों को पूर्ण नागरिक अधिकार देना था।

समय के साथ इसकी व्याख्या व्यापक रूप से की गई और अमेरिका में जन्मे लगभग सभी बच्चों को नागरिकता का अधिकार मिला, चाहे उनके माता-पिता का आव्रजन दर्जा कुछ भी हो।

कानूनी स्थिति क्या है?

रिपोर्ट्स के अनुसार, 20 जनवरी 2025 को ट्रम्प प्रशासन ने जन्म आधारित नागरिकता को सीमित करने का आदेश जारी करने की कोशिश की थी। हालांकि, इसके बाद संघीय अदालतों में इस आदेश को चुनौती दी गई और कई स्थानों पर अस्थायी रोक लगा दी गई।

वर्तमान में यह मामला न्यायालयों में विचाराधीन है। इसलिए अंतिम निर्णय कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव

इस मुद्दे का प्रभाव केवल कानूनी दायरे तक सीमित नहीं है। यह अमेरिकी समाज में प्रवासन, पहचान और अवसरों से जुड़ी व्यापक बहस को भी प्रभावित करता है।

एक ओर, कुछ समूह मानते हैं कि नागरिकता नीति में बदलाव से आव्रजन नियंत्रण मजबूत होगा। वहीं दूसरी ओर, कई विशेषज्ञों का तर्क है कि यह संविधान की मूल भावना और ऐतिहासिक संदर्भ को प्रभावित कर सकता है।

डेटा और वास्तविकता

प्यू रिसर्च सेंटर की 2022 की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग तकनीकी और शैक्षणिक क्षेत्रों में सक्रिय हैं। हालांकि, इस डेटा की व्याख्या अलग-अलग संदर्भों में की जाती है।

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था में प्रवासियों का योगदान लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। इसलिए किसी भी नीति परिवर्तन का व्यापक सामाजिक और आर्थिक प्रभाव हो सकता है।

अमेरिका में बर्थ राइट नागरिकता विवाद एक जटिल और बहुआयामी विषय है। ट्रम्प द्वारा साझा पोस्ट ने इस बहस को फिर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।

हालांकि, अंतिम निर्णय अदालतों और विधायी प्रक्रियाओं के माध्यम से ही तय होगा। इस बीच, विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे पर तथ्यात्मक और संतुलित चर्चा आवश्यक है, ताकि किसी भी समुदाय के प्रति पूर्वाग्रह या गलतफहमी न बढ़े।

अंततः, अमेरिका में बर्थराइट नागरिकता विवाद केवल एक कानूनी प्रश्न नहीं, बल्कि देश की ऐतिहासिक विरासत, संवैधानिक मूल्यों और भविष्य की सामाजिक संरचना से जुड़ा विषय है।

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